उम्मीद

क्यों इतनी खामोश सी पढ़ गई है तू? क्यूं अंदर ही अंदर खुद से लड़ रही है तू? वक्त ही तो है गुजर जाएगा, सूरज फिर से एक नया आएगा। खुद पर यकीन रख कर आगे बढ़ती जा तू, कभी ना कभी तो रास्ता मिल ही जाएगा।

~ Isha Chawla 🥀