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आरोह अध्याय दो काव्य भाग

प्रश्न – मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती है यह रूप कैसा है ?
उत्तर –   

हम भक्ति को दो रूपों में देखते हैं सगुण भक्ति और निर्गुण भक्ति मीरा कृष्ण के सगुण

रूप के उपासक थी | बचपन से ही कृष्ण भक्ति की भावना उनके अंदर जन्म ले चुकी थी
वह श्री कृष्ण को ही अपना आराध्य मानती थी | मीरा के कृष्ण का रूप मन को मोहने
वाला गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाला सिर के ऊपर मोर मुकट विराजमान श्री कृष्ण
है | मीरा उन्हें अपने पति के रुप में देखती थी वह मीरा के लिए सर्वस्व है कृष्ण के
अतिरिक्त मीरा संसार में किसी को भी अपना नहीं मानती वह स्वयं को उनकी दासी
मानती हैं |

प्रश्न – लोग मीरा को बावरी क्यों कहते हैं ?
उत्तर –
मीरा श्री कृष्ण  की भक्ति में अपनी सुध-बुध खो बैठी है | उसे किसी परंपरा या मर्यादा
का कोई ध्यान नहीं है | कृष्ण भक्ति के लिए उसने अपना राजपरिवार भी छोड़ दिया
विवाहिता होते हुए भी पांव में घुंघरू बांध कर कृष्ण की भक्ति में नाचती है | लोकलाज की
चिंता किए बिना संतों के पास बैठी रहती है | भक्ति कि यह पराकाष्ठा बावले पन को
दर्शाती है इसलिए लोग मीरा को बावरी कहते |


प्रश्न – मीरा जगत को देखकर रोती क्यों है ?
उत्तर –
मीरा जगत  के स्वार्थी रूप को देखकर रो पड़ती है यह देखती है कि जीवन व्यर्थ ही
जा रहा है | लोग संसारिक सुख दुख को असार मानते हैं जबकि उन्हें सच्चाई नहीं
मालूम हु इस संसार में ही उलझे हुए हैं | लोग मीरा को बावरी कहते हैं मीरा संसार के
लोगों को बावरा समझती है |


प्रश्न – मीरा ने सहज मिले अविनाशी क्यों कहा है ?
उत्तर –

मीरा के अनुसार प्रभु अविनाशी हैं अर्थात अनश्वर हैं | उन्हें पाने के लिए मन में सहज

भक्तिभाव की आवश्यकता है उन्हें पाने के लिए सच्चे मन से भक्ति करनी पड़ती है |
इस भक्ति से प्रभु प्रसन्न होकर भक्तों को आसानी से मिल जाते है |

व्याकरण पत्र लेखन

अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
– सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
– बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
जाता है |

अभिवादन :
– सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
– अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
होता है |

समाप्ति :
– मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
– पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र – अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
हुए पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय भाई !

शुभ आशीर्वाद |
कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
करोगे |

शुभकामनाओं सहित |

तुम्हारी बहन,
ममता

_________________________________________________________

सामाजिक पत्र – सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
होता है |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे – संबंधियों
आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

प्रारंभ :
निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

समाप्ति :
अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र – अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय अतुल,

सस्नेह नमस्कार |

अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
लिए सबल देंगी |

चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

तुम्हारा अभिन्न मित्र
सहदेव

__________________________________________________________

कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
प्रारंभ :   
– सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
– जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
– इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |
प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
– शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
जाता है|
विषय और शीर्षक :
– पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
– संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |
संबोधन :
– विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
की विशेषता नहीं पड़ती |
पत्र की मुख्य सामग्री :
– संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
– संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
– दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि ……….. आदि |
– एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
– पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |
पत्र का समापन :
– विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
कि आशा है |
– आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
– सधन्यवाद |
अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

पुनश्च :
– यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र – हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
चंडीगढ़ |
पत्र संख्या – हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
दिनांक – 15  जुलाई 2018

प्रति,
उपायुक्त,
करनाल |
विषय – करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

महोदय,

हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
की धनराशि भी दी जाए |

इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

भवदीय,
सचिव
कृषि मंत्रालय,

व्याकरण रिपोर्ट / प्रतिवेदन

रिपोर्ट शब्द अंग्रेजी से हिंदी में लिया गया है | यह पत्रकारिता से संबंधित है रिपोर्ट शब्द का अर्थ
है | घटना की ठीक-ठीक सूचना सूचना देने या संवाद भेजने के कार्य को रिपोर्टिंग भी कहा जाता है |

प्रतिवेदन को अंग्रेजी में रिपोर्ट या रिपोर्टिंग कहते हैं | यह एक प्रकार का लिखित विवरण होता है |
जिसमें किसी संस्था सभा वन विभाग या विशेष आयोजन की तथ्यात्मक जानकारी दी जाती है |
प्रतिवेदन कई प्रकार के होते हैं | अर्थात इन्हें कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
– सभा, गोष्ठी या किसी सम्मेलन का प्रतिवेदन
– संस्था का वार्षिक / मासिक प्रतिवेदन
– व्यवसाय की प्रगति या स्थिति का प्रतिवेदन
– जांच समिति द्वारा प्रतिवेदन

प्रतिवेदन अर्थात रिपोर्ट लेखन के तत्व :
1. तथ्यपरकता : रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित होती है यह किसीछोटी  घटना पर भी हो सकती है
या बड़ी घटना पर भी |  जब तक रिपोर्टर तथ्यों को पाठकों के सामने नहीं लगता वह रिपोर्ट नहीं
होती | इस में आंकड़ों तथा तथ्यों की जरूरत होती है |

2. प्रत्यक्ष अनुभव : रिपोर्ट लेखन प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होता है| रिपोर्टर घटनास्थल पर
पहुंच कर घटना का जायजा लेता है | वह तथ्य एकत्रित करता है | तथा आसपास के माहौल की
जांच करता है | प्रत्यक्ष अनुभव के बिना रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती |

3. संक्षिप्तता : रिपोर्ट में संक्षिप्तता का गुण आवश्यक है यदि किसी घटना का विवरण बढ़ा
चढ़ाकर किया जाता है तो वह निराश हो जाती है | पाठक को सिर्फ वोट को पड़ता है | जिसमें
कम शपथ और अधिक जानकारी हो बड़ी रिपोर्ट जो उबाऊ हो जाती है |

4. रोचकता क्रमबद्धता : रिपोर्ट में रोचकता और क्रमबद्धता जरूरी है यदि घटना को सिलसिलेवार
वर्णन प्रस्तुत किया जाए सुविचारों की तारतम्यता टूटती है | इससे तथ्य  गड़बड़हो जाते हैं |
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में रोचकता होनी चाहिए | रिपोर्ट की शैली रोचक होनी चाहिए |

रिपोर्ट के गुण :
– रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट और पूर्ण होनी चाहिए |
– भाषा में अलंकार और मुहावरेदार नहीं होनी चाहिए| किसी भी वाक्य का एक से अधिक अर्थ
नहीं निकलना चाहिए |
– केवल महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश होना चाहिए |
– प्रतिवेदन का एक शीर्षक भी होना चाहिए |
– सभी तथ्य सत्य प्रमाणित और विश्वसनीय होने चाहिए |
– प्रतिवेदन के अंत पर अर्थात रिपोर्ट के अंतर पर सभा दल संस्था के अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी
होने चाहिए |

रिपोर्ट के 2 उदाहरण देखिए :

1. बस स्टैंड पर हुए बम विस्फोट के आप प्रत्यक्षदर्शी हैं इसकी एक रिपोर्ट तैयार कीजिए |
                           बस स्टैंड में बम विस्फोट
आज 5 अगस्त को प्रातः सुबह 8:00 बजे भीड़-भाड़ से भरे अति व्यस्त बस स्टैंड में बम विस्फोट
हुआ | विस्फोट का जोरदार धमाका दूर दूर तक सुनाई दिया | उसके कारण उत्पन्न काला धुआं
आकाश में देर तक छाया रहा | इससे 4 लोग घायल हो गए लेकिन किसी के जीवन की क्षति
नहीं हुई विस्फोट के कारण कुछ खिड़कियों के शीशे टूट गए | उपस्थित सभी लोगों में भगदड़ मच
गई और उससे हल्की चोटें भी आई पुलिस ने तत्काल विस्फोट स्थल को घेर लिया | वह कारणों
की जानकारी प्राप्त कर रही है | विस्फोटक साइकिल के पीछे रखे थैले में विस्फोटक सामग्री के
कारण हुआ | इस फोटो के पीछे आंतकवादियों का हाथ हो सकता है |  

2.
                    सिलेंडर बदलने के दिन खत्म, सीधे रसोई में पहुंचेगी गैस पाइप
अमेरिका जापान और ब्रिटेन जैसे विकसित राष्ट्रों को छोड़ दीजिए | पाकिस्तान तक की गृहिणियां
कम से कम एक मामले में भारतीय गृहिणियों के सामने इतरा सकती हैं | उक्त देशों सहित विश्व
के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में अब पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस सीधे
रसोईघर पहुंचाई जा  रही हैं | अब भारत सरकार ने भी भारतीयों  गृहिणियों को सिलेंडर बदलने
के झंझट से मुक्ति देने के लिए सीधा रसोई घर तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय नीति लागू करने
का फैसला किया है | पहले चरण में लगभग दो दर्जन शहरों में लागू किया जाएगा| उनमें उत्तर
प्रदेश के भी पांच शहर है लखनऊ,  कानपुर, बरेली, आगरा, नोएडा |


इसके अलावा महाराष्ट्र  के मुंबई के आसपास के शहर में नवी मुंबई | गुजरात में सूरत,
अहमदाबाद, बड़ौदा को शामिल  किया जा सकता जा रहा है | कीमत निर्धारण पेट्रोलियम
नियामक बोर्ड ही करेगा | योग्यता के आधार पर प्रवेश की अनुमति मिलेगी | बहुत संभव है कि
जिस तरह से आधारित सिटी परिवहन व्यवस्था लागू की जा रही है उसी तर्ज पर घरों तक रसोई
गैस पहुंचाने की  भी व्यवस्था की जाए | इस समय दिल्ली और उसके आसपास के कुछ इलाकों
में इस तरह की योजना लागू की गई है | लेकिन पहली बार सरकार इस बारे में एक नीति बनाकर
आगे का रास्ता खोलना चाहती हैं | पहले चरण की सफलता के बाद इसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू
किया जाएगा | सबसे पहले तो उन्हें सिलेंडर में गैस का सिर दर्द खत्म होगा बेवक्त बेवक्त गैस
खत्म होने की टेंशन भी नहीं रहेगी |

यदि मैं पुलिस अधिकारी होता

प्रस्तावना : वह क्या बनना चाहता है ? यह प्रश्न शैशवकाल से ही हर व्यक्ति के मन में उभर आता  है। मेरे मन रूपी आकाश में भी ऐसे ही प्रश्नों ने खूब चक्कर काटे हैं। मैंने तभी से पुलिस अधिकारी बनने का निश्चय कर लिया था। उसका रौबदार चेहरा और शानदार वर्दी हमेशा आकर्षित करती रहती थी; पर इंसान की सभी इच्छाएँ तो कभी पूर्ण नहीं हो पाती है। उनकी पूर्ति में कोई न कोई बाधा अवश्य आ जाती है। फिर मैं ठहरा एक व्यापारी का बेटा । मेरे भाग्य में तो पैतृकं व्यवसाय ही लिखा है। परिवार के हर सदस्य ने बार-बार यही मंत्र फूका है। मैं भी यही सोचता हूँ कि यदि उन सब की बात को ठुकरा कर यदि मैं पुलिस अधिकारी बन भी गया, तो समाज की सेवा में मेरा क्या योगदान रहेगा।
वर्तमान समाज की दृष्टि में : आज के समाज में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को हेय दृष्टि से देखा जाता है। इन लोगों को समाज के रक्षक के स्थान पर भक्षक माना जाता है। प्रायः देखा गया है कि भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अपनी जेबें गरम करके असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देते पाए गए हैं। चोरी करना और डकैती डलवाना ही मानो इनका काम रह गया है। निर्दोष इनकी हवालात की सैर करते हैं और गुण्डे बेधड़क घूमते हैं। पैसे के आगे माँ बेटी की इज्जत भी तुच्छ समझी जाती है। इसीलिए अधिकांश लोग इन्हें वर्दीधारी गुंडों की संज्ञा देते हैं।
यदि पुलिस अधिकारी बनता : यदि मेरी इच्छा पूर्ण हो जाती। और मुझे पुलिस अधिकारी की वर्दी मिल जाती, तो मैं समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाता। मैं अपने क्षेत्र से गुण्डों का सफाया कर देता। इस अभियान में मैं अपनी जान की भी प्रवाह नहीं करता। असामाजिक तत्त्व मुझसे सदा ही भयभीत रहते। मैं अपराधियों को कभी भी माफ नहीं करता और उनके कुकृत्यों का दंड दिलवा कर ही पीछा छोड़ता।
यदि मैं पुलिस अधिकारी बनता, तो कदापि घूस नहीं लेता। जबकि आजकल पुलिस स्टेशन में बापू के चित्र के नीचे ही उनके आदर्शों को भुलाकर जेबें गरम की जाती हैं। निर्धन और दु:खी लोगों को बेवकूफ समझा जाता है तथा पलिस अधिकारी उनकी बात नहीं। सुनते। मैं सबसे पहले असहाय और निर्धन लोगों की शिकायतें सुनता तथा उन्हें दूर करने का भरसक प्रयास करता।
पुलिस का आतंक : उत्तर प्रदेश तथा बिहार जैसे राज्यों में पुलिस का आतंक दिन-दिन बढ़ता जा रहा है। मेरठ का माया त्यागी कापट पलिस की पाशविकता की अमिट गाथा बन गया है। बिहार की ग्रामीण महिलाओं का सामूहिक रूप से शील भंग करना पुलिस का जन्मसिद्ध अधिकार बन गया है। हाल ही में बनारस में निर्दोषों की तोड़ी गईं अस्थियाँ और उनके हथकरघे पुलिस की पाशविकता की कहानी कह रहे हैं। इतना ही नहीं, इनकी माँग की पूर्ति न करने पर निर्दोषों को पीट-पीट कर यमलोक पहुँचा दिया जाता है। घरों को लुटवाकर आग लगवा दी जाती है।
उपसंहार : आज के युग में जनता भी उन्हें पसंद नहीं करती। उनकी गिद्ध दृष्टि के आगे अपने को असहाय समझती है; लेकिन मैं । पुलिस अधिकारी बनकर ऐसा नहीं होने देता। मैं महिला समाज को पूरा सम्मान दिलाता। अभद्र व्यवहार करने वालों को दण्डित करता। बनावटी मुठभेड़ों में निर्दोषों की हत्या नहीं करने देता। अपराधियों के लिए साक्षात् यमदूत बन जाता। इस तरह मैं स्वयं अन्य पुलिस अधिकारियों के लिए आदर्श बन जाता।

कहां और कब करना चाहिए ?

वर्तमान समय में कई लोगो ने blogging को अपना career बना लिया है और पूरी तरह से ब्लॉगिंग पर फोकस कर रहे हैं ।
काम चाहे कुछ भी हो लेकिन चीज में कहीं न कहीं कुछ Investment करना पड़ता है ।
Blogging में भी कुछ चीजों मे निवेश जरूरी है जो आपको और आपके ब्लॉग को successful बना देगा ।
यहां मैं आपको बताऊंगा की Blog में कहां और कब invest करना चाहिए और कहां नहीं ।
invest in google
Blogging Me Kha invest Kare

1. Domain & Hosting – सबसे पहले हमें Domain और Hosting में ही invest करना होता है ।
आपका डोमेन ही आपका ब्रांड नेम है, यही आपकी पहचान बनेगा
इसलिए अपने ब्लॉग के हिसाब से परफेक्ट डोमेन सिलेक्ट करें ।
आप अपने ब्लॉग के niche के according domain name select करे ।
अपने ब्लॉग के लिए सही Hosting भी select करें जहां आपको सभी important features मिल जाएं ।
जिससे बाद में कोई problem न हो ।
2. Design – हर Blog के लिए एक Perfect Design बहुत important होता है क्योंकि यही आपके ब्लॉग को Professional look देता है ।
Blog के लिए सही Theme का चयन कर लें Theme select करते समय हर चीज पर ध्यान करें और Perfect Theme में invest करें ।
क्योंकि अगर बाद में Design में किसी तरह की कमी आये तो आप दोबारा कोई दूसरी Theme select करेगे
इससे आपके कुछ पैसे भी वेस्ट हो जाएगे और बार बार Theme change करने से blog पर भी bad SEO effect पड़ सकता है ।
आप अपनी पसंद अनुसार best Theme बनवाने के लिए Developer से भी Contact कर सकते हैं ।
3. Tutorials – आप Blogging, SEO, Marketing आदि सीखने के लिए Online Tutorials, Videos, ebooks में भी invest कर सकते हैं ।
इससे आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा और आप सही तरीके से Blogging कर पाएगे ।
4. SEO tools – आप Keywords Research, SEO analyse आदि के लिए SEO tools में भी invest कर सकते हैं ।
Invest करने से पहले एक बार Free trial भी ले सकते हैं जिससे आपको Tool की Working और Quality के बारे मे भी पता चलेगा ।
अगर आपकी Brand Website है तो आप SEO Expert की मदद ले सकते है लेकिन अगर आपका Blog है तो आपको खुद ही SEO करना चाहिए ।
क्योंकि इससे आप खुद भी SEO techniques को सीख लेगे जो हर ब्लॉगर के लिए जरूरी है ।
इसलिए शुरुआत मे चाहे तो आप किसी Expert की help ले सकते हैं लेकिन आपको खुद भी SEO पर ध्यान देना होगा ।
आप इसके लिए SEO tools और Tutorials की मदद ले सकते हैं ।

Other post : How to Stay Calm During Exam 

5. Giveways – आजकल बहुत सी sites Giveways करके यूजर्स को attract करती हैं ।
Giveways की मदद से आप कम बजट में ही अधिक Audience तक अपनी पहुंच बना सकते हैं।
जैसे अगर आपका blog SEO से related है तो आप Giveways price में winner को SEO pdf, SEO tools या premium theme दे सकते हैं ।
आपको Giveways का अधिक से अधिक promotion करना होगा जिससे इसे ज्यादा Audience join करे और आपका Blog अधिक famous हो ।
लेकिन एक बात याद रखे जब आपका ब्लॉग audience के सामने लाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो तभी Giveways का use करें ।
Because “First impressions is the last impression”

6. Perfect Team – जब ब्लॉग अधिक famous हो जाता है तो इसे manage करना भी थोड़ा कठिन हो जाता है और इसमे अधिक समय भी लगता है ।
ऐसे में आप अपनी Team create कर सकते है जिसके साथ मिलकर आप अपने ब्लॉग को एक नई दिशा दे सकते हैं ।
इससे आप blog को आसानी से manage कर पाएगे ।
आप अपनी Team में Content Creators, SEO experts, Developer, Marketing manager आदि लोगो को जोड़ सकते हैं ।
Content creators का मतलब यहां केवल content Writers से नहीं बल्कि हर तरह के content से है
Images, Videos आदि भी कंटेंट का ही हिस्सा है ।
इनमे Videos creators & editors, Infographics maker भी आते हैं ।
एक Perfect team के साथ मिलकर काम करने से आपकी कई मुश्किलें कम हो जाती है और बडे बडे काम भी आसन हो जाते हैं ।
Final words : मैं आपसे यही कहूंगा कि कही भी Investment करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर ले ।
बिना किसी जानकारी किसी भी चीज मे Invest न करें
हर चीज मे जरूरत और बजट के हिसाब से ही Invest करें ।

चेजारा के साथ गांव – समाज के व्यवहार मैं पहले की तुलना में आ ज क्या फर्क है पाठ के आधार पर बताइए ?

चेजारा अर्थात चिनाई करने वाला | कुंई  के निर्माण में यह लोग दक्ष होते हैं | इनका उस
समय विशेष ध्यान रखा जाता था | कुंई खोदने पर इन विदाई के समय तरह-तरह की भेंट
दी जाती थी इसके बाद भी उनका संबंध गांव से जुड़ा रहता था और पूरा वर्ष उन को
सम्मानित किया जाता था | फसल की कटाई के समय इन्हें अलग से फसल का हिस्सा
दिया जाता था तीज त्यौहार विवाह जैसे अवसरों पर उनका सम्मान किया जाता था |
इस प्रकार इनको भीग्रामीण समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलता था और
उनके कार्य को सराहा भी जाता था | वर्तमान समय में इनका सम्मान उतना नहीं रहा जितना
कि पहले था | उनको काम की मजदूरी देकर संबंध खत्म कर दिए जाते हैं | अब सिर्फ
मजदूरी देकर काम करवा लिया जाता है अब स्थिति पूर्णता बदल गई है |

व्याकरण पत्र लेखन

अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
– सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
– बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
जाता है |

अभिवादन :
– सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
– अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
होता है |

समाप्ति :
– मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
– पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र – अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
हुए पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय भाई !

शुभ आशीर्वाद |
कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
करोगे |

शुभकामनाओं सहित |

तुम्हारी बहन,
ममता

_________________________________________________________

सामाजिक पत्र – सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
होता है |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे – संबंधियों
आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

प्रारंभ :
निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

समाप्ति :
अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र – अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय अतुल,

सस्नेह नमस्कार |

अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
लिए सबल देंगी |

चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

तुम्हारा अभिन्न मित्र
सहदेव

__________________________________________________________

कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
प्रारंभ :   
– सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
– जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
– इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |
प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
– शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
जाता है|
विषय और शीर्षक :
– पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
– संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |
संबोधन :
– विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
की विशेषता नहीं पड़ती |
पत्र की मुख्य सामग्री :
– संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
– संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
– दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि ……….. आदि |
– एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
– पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |
पत्र का समापन :
– विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
कि आशा है |
– आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
– सधन्यवाद |
अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

पुनश्च :
– यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र – हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
चंडीगढ़ |
पत्र संख्या – हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
दिनांक – 15  जुलाई 2018

प्रति,
उपायुक्त,
करनाल |
विषय – करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

महोदय,

हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
की धनराशि भी दी जाए |

इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

भवदीय,
सचिव
कृषि मंत्रालय,

आरोह अध्याय दो गद्य भाग

प्रश्न – मियां नसीरुद्दीन नानबाईयों  का मसीहा क्यों कहा जाता था?
उत्तर –
मियां नसीरुद्दीन कोई साधारण नानबाई नहींहै | वह खानदानी नानबाई हैं | उनके पास 56
प्रकार की रोटियां बनाने का हुनर है | तुनकी और रुमाली जैसी महीन रोटियां बनाना जानते
हैं | वह रोटी बनाने  को एक कला मानते हैं | वह अन्य नानबाईयों के मुकाबले में स्वयं को
श्रेष्ठ इसलिए मानते हैं क्योंकि नानबाई का प्रशिक्षण अपने परिवार की परंपरा से प्राप्त
किया | उनके पिता बरकत शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से प्रसिद्ध थे|और उनके बुजुर्ग
दादा भी यही काम करते थे|वह बादशाह को नई-नई चीजें बनाकर खिलाते थे और उनकी
प्रशंसा प्राप्त करते थे  मियां नसीरुद्दीन स्वयं 56 प्रकार की रोटियां बनाने के लिए प्रसिद्ध
थे | इसलिए उन्हें नानबाई का मसीहा कहा जाता था |
प्रश्न – लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास क्यों गई थी ?
उत्तर –
लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास इसलिए गई थी ताकि वे रोटी बनाने की कारीगरी को
जानने तथा उसेप्रकाशित करने के उद्देश्य से उनके पास गई थी | पत्रकार की हैसियत से
वहां गई थी उसने पूछा तो पता चला की यह खानदानी नानबाई मियां नसरुद्दीन की दुकान
है | जो कि 56 प्रकार की रोटियां बना लेते हैं | उनकी कारीगरी के रहस्य को जानने के
लिए उनके पास जाती हैं और उनको अलग-अलग तरह की रोटियां बनाने का प्रशिक्षण
कहां से मिला यह सारे सवालात पूछती हैं |
प्रश्न – बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों से मियां नसरुद्दीन की
दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
उत्तर –
लेखिका ने जब मियां नसीरुद्दीन से उनके खानदानी नानबाई होने का रहस्य पूछा तो उन्होंने
बताया कि उनके पिता शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से और दादा आला नानबाई के
नाम से प्रसिद्ध थे|उनके बुजुर्ग बादशाह के लिए भी रोटियां बनाते थे | एक बार बादशाह ने
उनके बुजुर्गों को ऐसी चीज बनाना बनाकर खिलाने के लिए कहा जो नाग से पक्के न पानी
से बने उन्होंने ऐसी चीज बादशाह को बनाकर खिलाई और बादशाह भी कि जब लेखिका
ने बादशाह का नाम पूछा तो वह नाराज हो गए | क्योंकि उन्हें बादशाह का नाम स्मरण ही
नहीं था | बादशाह का  बावर्ची होने की बात उन्होंने अपने परिवार की बड़ाई करने के लिए
गई थी | बादशाह का प्रसंग आती है बेरुखी दिखाने लग गए |
प्रश्न – पाठ में मियां नसरुद्दीन का शब्द चित्र लेखिका ने कैसे खींचा
उत्तर –
लेखिका के अनुसार मियां नसरुद्दीन 70 वर्ष के हैं| वह चारपाई पर बैठे हुए बीड़ी का मजा
ले रहे थे | मौसम की मार से उनका चेहरा  पक गया है | उनकी आंखों में काइयां भोलापन
परेशानी पर मंजू हुए कारीगर के तेवर थे | अखबार वाले उन्हें निठल्ले लगते हैं और वह 56
प्रकार की रोटियां बनाने में प्रसिद्ध भी हैं उन्होंने नाम भाइयों का परीक्षा प्रशिक्षण उन्होंने
अपने पिता से लिया था जब बात उनके हाथ से निकल जाए तो वह खीज भी जाते थे |
और पलट कर जवाब नहीं देते थे बात को पलट भी देते थे |

आरोह अध्याय तीसरा गद्य भाग

प्रश्न – पथेर पांचाली फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला ?
उत्तर –
पथेर पांचाली फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक इसलिए चला इसके कई कारण थे |
1. इस फिल्म के फिल्मकार  सत्यजीत राय के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे | पैसे खत्म होने के
बाद फिर से पैसे जमा होने तक  शूटिंग स्थगित रखनी पड़ती थी |
2. फिल्मकार स्वयं एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करते थे और उसे नौकरी के काम से जब
फुर्सत मिलती थी तब शूटिंग होती थी |
3. बीचों-बीच पात्रों स्थानों दृश्य आदि की भी समस्याएं आ जाती थी |
4. बारिश धूप अंधेरा प्रकाश उसकी भी समस्या आ जाती थी |
5. आसपास  भीड़ वाले लोगों के कारण उत्पन्न समस्याएं | जैसे सुबोध दा, धोबी की समस्या,
कुत्ते का मर जाना और एक पात्र मिठाई वाला मर जाता है | उसकी जगह पर वैसा ही मिलते
जुलते आदमी की तलाश करने के कारण भी शूटिंग कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी |
6. स्थान से संबंधित समस्याएं जैसे काश के फूल का नष्ट हो जाना कमरे में सांप निकल
आना फिर से फूलों के लिए पूरा साल इंतजार करना |

प्रश्न – किन दो  दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब
अपनाई गई है ?
उत्तर –
प्रथम दृश्य इस दृश्य में भूलो नामक कुत्ते को  अप्पू की मां द्वारा गमले में भात खाते हुए
चित्रित करना था | परंतु पैसे खत्म होने के कारण यह दृश्य चित्रित ना हो सका 6 महीने
के बाद लेखक पुनः उस स्थान पर गया तब तक कुत्ते की मौत हो चुकी थी | काफी प्रयास
के बाद उसे मिलता जुलता कुत्ता मिला और उसे भात खाते हुए उस दृश्य को पूरा किया गया |
यह दृश्य इतना स्वभाविक था कि कोई भी दर्शक उसे पहचान नहीं पाया कि कुत्ता बदला हुआ
है |
दूसरा दृश्य  इस दृश्य में श्रीनिवास नामक व्यक्ति मिठाई वाले की भूमिका निभा रहा था |
बीच में शूटिंग रोकनी पड़ी दोबारा उस स्थान पर जाने से पता चला कि उस व्यक्ति का देहांत
हो चुका है  | लेखक ने मिलते-जुलते व्यक्ति को लेकर बाकी दृश्य फिल्म आया | पहला
श्रीनिवास आसमान से बाहर आता है और दूसरा श्रीनिवास कमरे की ओर पीठ करके मुखर्जी
के घर के गेट के अंदर जाता है |  इस प्रकार इस दृश्य में भी दर्शक अलग-अलग कलाकार
को पहचान नहीं पाए |

फिल्मकार ने बताया कि पथेर पांचाली फिल्म का निर्माण करते समय अनेक समस्याओं का
सामना करना पड़ा | उदाहरणस्वरूप तीसरा दृश्य फिल्म की शूटिंग में रेलगाड़ी पर अनेक 
दृश्य दर्शाए गए किंतु जहां शूटिंग हो रही थी | गांव में रेलगाड़ी इतनी देर तक नहीं रूकती थी
सभी दृश्य नहीं फिल्माए जाते | नई तरकीब अपनाई गई वहां से निकलने वाली अलग-अलग
तीन रेलगाड़ियों पर दृश्य फिल्माए गए और फिर उन्हें आपस में जोड़ दिया गया | इस प्रकार
तीन रेलगाड़ियों का दृश्य फिल्म आने पर भी दर्शक रेलगाड़ी को नहीं पहचान पाए |


प्रश्न – भूलो की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया उसने फिल्म के किस दृश्य को पूरा
किया ?
उत्तर –
भूलो कुत्ते की मृत्यु हो जाने के कारण दूसरा कुत्ता लाया गया | फिल्म में दृश्य इस प्रकार था
कि अप्पू की मां सर्व जया पप्पू को भात खिला रही थी और वह अपने तीर कमान से खेलने के
लिए उतावला है | पप्पू   भात खाते-खाते कमान से तीर छोड़ता है और उसे लाने के लिए भाग
जाता है | उसकी मां सर्व जया उसे भात खिलाने के लिए उसके पीछे दौड़ती है | भूलो कुत्ता
वहीं खड़ा सब कुछ देख रहा है | उसका सारा ध्यान भात की थाली की ओर है और यह सारा
दृश्य भूलो कुत्ते पर ही दर्शाया गया है |  इसके बाद दृश्य में अप्पू की मां बचा हुआ भात गमले
में डाल देती है और यह बात भूलो कुत्ता का जाता है | यह दृश्य दूसरे कुत्ते से पूरा किया गया
क्योंकि भूलो कुत्ता मर चुका था |

प्रश्न – बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल है और उसका समाधान किस
प्रकार हुआ ?
उत्तर –
फिल्मकार के पास पैसे का भाव था | अतः बारिश के दिनों में शूटिंग नहीं कर सके | जब
उनके पास पैसा आया तो अक्टूबर का महीना शुरु हो चुका था | बरसात के दिन समाप्त
हो चुके थे | शरद ऋतु में बारिश होना भाग्य पर निर्भर था | लेखक हर रोज अपनी टीम
लेकर गांव में जाकर बैठ जाते थे | बादलों की ओर टकटकी लगाकर देखते रहते थे कि
आज बारिश आएगी लेकिन बारिश नहीं आती | परंतु अचानक बदल छा  जाते थे और
धुआंधार बारिश होने लगती थी इस तरह जो बारिश का दृश्य फिल्माया गया | इतना
अवश्य हुआ कि बेमौसमी बरसात में भीगने के कारण अप्पू और दुर्गा दोनों बच्चों को
ठंड लग गई |

प्रश्न – किसी फिल्म की शूटिंग करते समय फिल्मकार को जिन समस्याओं का सामना
करना पड़ता है उन्हें सूचीबद्ध कीजिए ?
उत्तर –
1. फिल्म बनाने के लिए बहुत सारे धन की आवश्यकता पड़ती है कई बार फिल्म पर
अनुमान से भी अधिक खर्च हो जाता है |
2. कलाकारों के कलाकारों का चयन करते समय बहुत सी बातो का ध्यान रखना
पड़ता है |
3. कई बार फिल्मकार को फिल्म की कहानी के अनुसार पात्र ही नहीं मिल पाते |
4. फिल्म में काम करने वाले कलाकारों में से किसी एक की अचानक मृत्यु भी
फिल्म की शूटिंग के लिए समस्या बन जाती है |
5. स्थानीय लोगों का हस्तक्षेप व सहयोग भी कई बार फिल्मकार को अपनी फिल्म
की शूटिंग किसी पिछड़े गांव में जाकर करनी होती है | जहां उन्हें गांव वालों का सहयोग
प्राप्त नहीं हो पाता कई समस्याएं खड़ी हो
जाती है |
6. प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी मौसम पर निर्भर होना पड़ता है |

आरोह अध्याय 4 गद्य भाग

प्रश्न – लार्ड कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ गया?
उत्तर –
लॉर्ड कर्जन भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के वायसराय बन कर आया | उसमें भारत में अंग्रेजी
साम्राज्य की जड़े मजबूत करने और उनका वर्चस्व स्थापित करने का हर संभव प्रयास किया |
भारत के लोगों पर भी उसने अनेक दमनकारी नीतियां बनाकर अधिकार जमा लिया था | लार्ड
कर्जन के इस्तीफे के दो कारण थे |
1. बंग भंग की योजना को मनमाने ढंग से लागू करने के कारण सारे भारतवासी उसके विरुद्ध
उठ खड़े हुए | इस से कर्जन की जड़े हिल गई | वह इंग्लैंड वापस जाने के बहाने ढूंढने लगा |
2. कर्जन ने फौजी अफसर को अपनी इच्छा से  नियुक्त करना चाहा | दबाव बनाने के लिए
उसने इस्तीफा देने की बात कही  उसने सोचा नहीं था कि उनके रुतबे को देखते हुए अंग्रेजी
सरकार उनकी बात मान लेगी | लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसके विपरीत अंग्रेजी सरकार ने उनका
इस्तीफा ही मंजूर कर दिया और इंग्लैंड वापिस जाना पड़ा |
प्रश्न – शिव शंभू की दो गायों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
उत्तर –
शिव शंभू की दो गायों  के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि भारत के पशु हो या
मनुष्य अपने संगी-साथियों के साथ गहरा लगाव रखते हैं | चाहे वह आपस में लड़ते झगड़ते
भी हो तो भी उनका परस्पर प्रेम अटूट होता है | एक दूसरे से विदा होते समय वह दुख का
अनुभव करते हैं | लेखक यह बताना चाहता कि भारत देश में भावनाएं प्रदान है | इसी प्रकार
लॉर्ड कर्जन ने भारत में रहते हुए भारत वासियों को बहुत दुख पहुंचाया है | भारत वासियों को
पतन की ओर धकेला है | फिर भी भारतवासियों को उसकी विदाई पर गहरा दुख अनुभव हो रहा है |

प्रश्न – नादिरशाह से भी बढ़कर जिद्दी है लॉर्ड कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही
लगती है पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए ?
उत्तर –  
जी हां, कर्जन के संदर्भ में ही हमें यह बात सही लगती है | क्योंकि नादिरशाह एक बड़ा ही क्रूर
राजा था | उसने दिल्ली में कत्लेआम करवाया था | परंतु आसिफजहा ने तलवार गले में डाल
कर उसके आगे समर्पण कर के कत्लेआम रोकने की प्रार्थना की तो तुरंत नादिरशाह ने कत्लेआम
रोक दिया गया | परंतु जब लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया 8 करोड़ भारत वासियों
की ओर से विनती बार-बार हो रही थी | परंतु उसने अपनी जिद नहीं छोड़ी इस संदर्भ में कर्जन
की जिद्द नादिरशाह से भी बड़ी है लॉर्ड कर्जन नादिरशाह से भीअधिक क्रूर था | उसने जनहित
की अपेक्षा की है |

प्रश्न – 8 करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद ना करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान
नहीं दिया यह किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर –
लेखक बाबू बालमुकुंद जी यहां बंगाल के विभाजन की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत करते
हैं | लार्ड कर्जन दो बार भारत का वायसराय बनकर आया |उसने भारत पर अंग्रेजी का प्रभुत्व
स्थाई करने के लिए अनेक काम किए | भारत में राष्ट्रवादी भावनाओं को कुचलने के लिए
उन्होंने बंगाल का विभाजन की योजना बनाई | देश की जनता कर्जन की ओर इस चाल को
समझ गई | उन्होंने इस योजना का विरोध भी किया | परंतु भारतीय लोग पूरी तरह असहाय
और लाचार थे | भारत के लोग बंगाल का विभाजन नहीं चाहते थे | किंतु उसने अपनी मनमानी
करते हुए बंगाल को दो टुकड़ों में बांट दिया | पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल लेकिन भारत
से जाते-जाते उन्होंने बंगाल का विभाजन कर दिया | यद्यपि उनका भारत में वायसराय बनने का
कार्यकाल भी समाप्त हो चुका था |

प्रश्न –  क्या  शान आप की देश में थी अब क्या हो गई कितने ऊंचे   होकर आप कितने
नीचे गिरे पाठ के आधार पर आशय स्पष्ट कीजिए  ?
उत्तर –
लॉर्ड कर्जन को संबोधित करते हुए लेखक कहते हैं कि कुछ समय पहले तक भारत और
ब्रिटिश साम्राज्य में आपकी जड़े बहुत मजबूत थी | लेकिन अब आप ने अपना मान सम्मान
खो दिया | भारत में आपका बड़ा रुतबा था | दिल्ली दरबार में उनका वैभव चरम सीमा पर था |
पति-पत्नी की कुर्सी सोने की थी | उनका हाथी सबसे ऊंचा और सबसे आगे रहता था | सम्राट
के भाई का स्थान भी उनसे कम था | उनके  इशारे पर प्रशासक ,राजा, धनीआदमी नाचते थे |
उनके संकेत पर बड़े-बड़े राजाओं को मिट्टी में मिला दिया गया और बहुत से निकम्मों को बड़े
पदों पर रखा गया | परंतु बाद में यह स्थिति थी कि एक फौजी अफसर को भी आपके कहने
के अनुसार ब्रिटिश सरकार ने नहीं रखा | इससे भारत और ब्रिटिश साम्राज्य दोनों जगह पर
आप का अपमान हुआ | आप बहुत ऊंचे उठकर भी बहुत नीचे गिर गए |

व्याकरण जनसंचार की विधाएं

जनसंचार को समझने के लिए संचार के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है |

प्रश्न –  संचार क्या है?

उत्तर –
मनुष्य सामाजिक प्राणी है सामाजिक प्राणी होने के कारण वह संचार करता है | संचार का मतलब
विचरण करना | दैनिक जीवन में संचार के बिना हम जीवित नहीं रह सकते | क्योंकि मनुष्य जब
तक जीवित है | संचार अर्थात विचरण करता रहेगा | हम यह भी कह सकते हैं कि समाचार जीवन
की निशानी है | हम जिस संचार की बात कर रहे हैं | उसका अर्थ है मानव के संदेशों को पहुंचाना
अर्थात संदेश भेजना प्राप्त करना इसके दो अनिवार्य लक्षण है |
1. दो या दो से अधिक व्यक्ति
2. उनके बीच किसी संदेश का ग्रहण होना या संप्रेषण होना |
संचार जो है अनुभवों की साझेदारी है | संचार की परिभाषा इस प्रकार हम कह सकते हैं | सूचनाओं
विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य- श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक एक
जगह से दूसरी जगह पहुंचाना ही संचार है |

प्रश्न – संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर –
वह साधन हमारे संदेश को पहुंचाते हैं  जैसे समाचार पत्र, फिल्म, टेलीफोन रेडियो, दूरदर्शन,
इंटरनेट, सिनेमा और फक्स आदि |


प्रश्न – संचार की प्रक्रिया के तत्व कौन कौन से हैं ?
उत्तर –
संचार की प्रक्रिया के निम्नलिखित तत्व है |
– संचारक या स्त्रोत
– संदेश का कुटीकरण
– संदेश का  कूटवाचन
– प्राप्तकर्ता

प्रश्न – संचार के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए ?
उत्तर –
संचार के निम्न प्रकार है |
– सांकेतिक संचार
– मौखिक संचार
– समूह संचार
– अंत: र्वैयक्तिक  संचार
– जनसंचार

प्रश्न – फीडबैक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
कुट्टी कृत संदेश के पहुंचने पर प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया करता है |
इससे पता चलता कि संचारक का संदेश प्राप्त करता तक पहुंच गया |

प्रश्न – एनकोडिंग या कुटीकरण का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर –
संदेश को भेजने के लिए शब्दों संकेतों या ध्वनि चित्रों का उपयोग किया जाता है | भाषा भी
एक प्रकार का कोट चिन्ह या कोड  होता है | अतः प्राप्तकर्ता को समझाने योग्य कुटों में
संदेश को बांधना एनकोडिंग या कुटीकरण कहलाता है |

प्रश्न – कूट वाचन या डिकोडिंग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
कुटीकरण की उल्टी प्रक्रिया कूट वाचन कहलाती है | इसके माध्यम से संदेश को प्राप्त करता
कूट चिन्हों में बंधे संदेश समझाता है | इसके लिए आवश्यक है कि प्राप्तकर्ता भी कोड का
वही अर्थ समझता हूं | जो उसे संचारक समझाना चाहता है |

प्रश्न – सांकेतिक संचार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – सांकेतिक संचार का आर्थिक संकेतों द्वारा संदेश पहुंचाना | मनुष्य का हाथजोड़ना, पांव
छूना, हाथ मिलाना, मुट्ठी कसना, सिग्नल देना, लाल बत्ती होना, हरी बत्ती होना आदि सांकेतिक
संचार है |

प्रश्न – समूह संचार का क्या आशय है?
उत्तर –
एक से अधिक व्यक्तियों से बात करता है  | किसी समूह के सदस्य आपस में विचार विमर्श करते हैं
तो उसे समूह संचार कहते हैं | अध्यापक का कक्षा में पढ़ाना किसी संस्था की बैठक होना, जलसा
या जुलूस  मैं वार्तालाप कोई एक व्यक्ति बात करता है और वह सबके लिए करता है | वह सामूहिक
मुद्दों पर की गई वार्ता समूह संचार के अंतर्गत ही आती है |

प्रश्न – जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
जनसंचार नहीं सभ्यता का शब्द है जब संचार किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज
के विशाल वर्ग से संवाद करने की कोशिश की जाती है तो उसे जनसंचार कहते हैं | इसमें एक संदेश
को यांत्रिक माध्यम के जरिए बहुगुणित किया जाता है | ताकि उसे अधिक से अधिक लोगों तक
पहुंचाया जा सके |

जनसंचार की प्रमुख विशेषताएं –
– जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या  प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है |
– इसमें संचालक और प्राप्तकर्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता |
– इस माध्यम में अनेक द्वार पाल होते हैं जो इन माध्यमों  से प्रकाशित /प्रसारित होने वाली सामग्री
को नियंत्रण तथा निर्धारित करते हैं |

प्रश्न – जनसंचार माध्यमों में द्वारपालों की भूमिका क्या है ?
उत्तर –
जनसंचार  माध्यमिक में द्वारपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है | यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह
सार्वजनिक हित, पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों और आचार संहिता के अनुसार सामग्री को संपादित
करें तथा इसके बाद ही उनके प्रसारण या प्रकाशन को इजाजत दे |

प्रश्न – जनसंचार के कौन-कौन से कार्य हैं स्पष्ट करें?
उत्तर –
जनसंचार के निम्नलिखित कार्य हैं  |
1. सूचना देना – जनसंचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है यह दुनिया भर से सूचनाएं
प्रसारित करते हैं |
2. मनोरंजन – जनसंचार माध्यम सिनेमा रेडियो-टीवी आदि मनोरंजन के भी प्रमुख साधन है |
3. जागरूकता – यह जनता को शिक्षित करते हैं जनसंचार माध्यम लोगों को जागरूक बनाते हैं |
4. निगरानी – जनसंचार माध्यम सरकार और संस्थाओं के कामकाज पर निगरानी भी रखते हैं |
5. विचार विमर्श के मंच – यह माध्यम लोकतंत्र में विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति का मंच
उपलब्ध कराते हैं इसके जरिए विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुँचाते हैं |

प्रश्न – जनसंचार के माध्यमों को आम जीवन पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर –
जनसंचार माध्यमों का आम जीवन पर बहुत प्रभाव है इनसे सेहत, अध्यात्मक, दैनिक जीवन
की जरूरतें हैं आदि पूरी होने लगी है | यह हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं |

प्रश्न – लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों का प्रभाव बताइए ?
उत्तर –
लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों में जीवन को गतिशील व पारदर्शी बनाया है | इससे माध्यम में
विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श व  बहस होती है | सूचनाओं में जानकारियों का आदान प्रदान
होता है | जो सरकार की कार्यशैली पर अंकुश रखती है | लोकतंत्र को सशक्त बनाती है |

प्रश्न – जनसंचार के दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर –
1. जनसंचार के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को कम महत्व दिया जाता है |
2.  समाज में अश्लीलता व सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं |
3.  जनसंचार के माध्यम खास तौर पर TV वेब सिनेमा ने लोगों को काल्पनिक दुनिया की
सैर कराई है | यह आम जनजीवन से दूर हो जाते हैं | यह पलायनवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं |
4. अनावश्यक मुद्दों को उछाला जाता है |
5. कई बार बहुत छोटी बात को बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है |


आरोह अध्याय तीसरा काव्य भाग


आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – पथिक (कवि रामनरेश त्रिपाठी)


प्रश्न- पथिक का मन कहां विचरना चाहता है ?
उत्तर –  
पथिक प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत है | प्रतिक्षण नूतन  वेश धारण करने वाली बादलों की
पंक्ति को तथा नीले समंदर की लहरों को देखकर वह  मुग्ध हो रहा है | पथिक का मन
नीले अकाश और नीले समुद्र के बीच विचार ना चाहता है | उसका मन चाहता है कि वह
बादलों पर बैठकर आकाश के बीच विचरण करें और प्रकृति के समस्त सौंदर्य का अनुभव
करें |

प्रश्न- सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के  बिंबो का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर –  
सुबह के सूरज की लालिमा जब समुद्र तल पर पड़ती है | तो चारों तरफ लालिमा बिखरती
हैं | कवि ने कल्पना की है कि मानो लक्ष्मी का मंदिर है और लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई
गई सुनहरी सड़क है | कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उसमंदिर का उज्जवल कअंगूरा
है और लक्ष्मी की सवारी को इस पुण्य धरती पर उतारने के लिए स्वयं समुद्र देव ने बहुत
सुंदर स्वर्णिम मार्ग बना दिया हो | कवि की कल्पना  बहुत ही सुंदर तरीके से बिंबो के रूप
में उभरकर आई है |

प्रश्न- पथिक कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है ऐसे
उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें?
उत्तर –  
श्री राम नरेश त्रिपाठी आधुनिक युग के कवियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | त्रिपाठी
जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार थे | प्राकृतिक प्रेम और नवीनता के प्रति आग्रह भी उनके
काव्य की प्रमुख विशेषता रही है | पथिक कविता में भी प्रकृति  के उपादान ओं को मानव
की भांति करते हुए दिखाया है | जिससे कविता के सौंदर्य अभिवृद्धि हुई है | सूर्य के सामने
बादलों का नाचना कभी श्वेत श्याम नील वर्ण को धारण करना गहरे अंधेरे का मानवीकरण
किया है आधी रात को सारे संसार को जो ढक लेता है | अकाश रूपी छत पर तारों को
बिखरा देता है तब इस जगत का स्वामी मंद गति से चलकर आता है | सागर ओं को अपने
मीठे गीत सुनाता है | आधी रात को जब सूर्य निकलने की तैयारी करता है और धीमी धीमी
गति से चलता हुआ सागर के किनारे अपनी लालिमा भी बिखेरता है | और चांद उसके रूप
को देखकर हंस कर वापसी की तैयारी करता है | पेड़ पत्ते फूल मुस्कुराने लगते हैं पक्षी
चहचाहने लगते हैं | वृक्षों को भी सजे धजे प्रसन्न मनुष्य के रूप में दर्शाया है | फूलों को
सुख की सास लेते हुए  प्राणी की भांति दिखाया गया है | इस तरह इस कविता में कई
स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है |


व्याकरण फीचर लेखन

फीचर लेखन के गुण:
1 – विश्वसनीयता
2 – सरसता एवं सहजता
3 – रोचकता एवं संक्षिप्त ता
4 – प्रसंगिकता


5 – प्रचलित शब्दावली का प्रयोग

फीचर लेखन का क्रम:
1 शीर्षक
2 भूमिका  
3 विषय का विस्तार  
4 निष्कर्ष या समापन

फीचर  लेखन कोनी मलिक श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
– सामाजिक सांस्कृतिक
– साहित्यिक  फीचर
– प्राकृतिक फीचर
– घटनापरक फीचर
– राजनीतिक फीचर

कुछ महत्वपूर्ण फीचर के उदाहरण –

1. स्वच्छता अभियान पर एक फीचर लिखिए | 
                     
स्वच्छता अभियान
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर
आरंभ किया गया स्वच्छ भारत अभियान अब तक सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है |
गांधी जी के आवाहन को पूरा करने वाले देश अब उनके लिए क्लीन इंडिया के आह्वान
को पूरा करने निकल पड़ा | देश को स्वच्छ बनाना सिर्फ किसी सरकार या संगठन की
जिम्मेदारी नहीं हो सकती हो नहीं संभव भी नहीं है | जब तक देश के नागरिक इसके
प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक इस महान लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है |
स्वच्छता की भावना हमारे अंदर होनी चाहिए बल्कि हमें स्वयं ही इसके प्रति आंतरिक
स्तर पर सचेत होना होगा | ना तो गंदगी फैलाएं और ना ही किसी को गंदगी फैलाने
दे यही भावना स्वस्थ अभियान को सफल एवं सार्थक बना सकती है | हमें स्वच्छता
के महत्व को समझना चाहिए इसके अभाव में यानी गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों को
भी जाना होगा विश्व पटल पर अपनी गंदगी की छवि को मिटाकर अपनी स्वच्छता
प्रिया छवि को स्थापित करना होगा और इस स्वच्छता अभियान को सफल बनाना होगा |

2. वन रहेंगे- हम रहेंगे पर एक फीचर लिखिए |

वन रहेंगे : हम रहेंगे
पिछले सैकड़ों वर्षों से वृक्ष कट रहे हैं जंगलों का सफाया हो रहा है | मनुष्य ने ठान
लिया कि हम ही रहेंगे चाहे जंगल रहे या ना रहे यदि जंगल रहे तो हम कहां रहेंगे |
जंगल सिकुड़ कर छोटे होते जा रहे हैं | नगर फल-फूल कर बड़े होते जा रहे हैं | मनुष्य
और प्रकृति में गहरा संबंध रहा है | मानव अपनी सभी अवस्थाओं की पूर्ति के लिए
पूर्णता प्रकृति पर ही निर्भर है | वन संपदा भी प्रकृति की एक अद्भुत और अत्यंत उपयोगी
है | वन तथा पेड़ पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  लेकर उसे प्राण दायिनी
ऑक्सीजन में बदल देते हैं | वृक्षों का प्रत्येक अंग – फल, फूल, पत्तियां, छाल यहां तक
की जड़ भी उपयोगी है | हमें स्वादिष्ट फलों के साथ साथ जीवन रक्षक औषधियां भी
मिलती हैं | वन बादलों को रोककर वर्षा कराने में भी सहायता करते हैं | पर्यावरण को
भी शुद्ध करते हैं वनों से प्राप्त लकड़ियां भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने का काम करती
हैं | वनों से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं | फिर भी मनुष्य ने अंधाधुंध वृक्षों की
कटाई की है | जिसके कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गए हैं | अचानक मौसम परिवर्तन
हो जाता है | जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं | पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
होने लग गई है | हिमनदो का पिघलना समुद्री जल- अति में वृद्धि अनेक समस्याओं को
उत्पन्न हो गई है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास के लिए वन संपदा
का प्रयोग करता है | इसलिए हमें यह बात समझनी होगी कि विकास और पर्यावरण
एक दूसरे के विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक हैं | यदि वृक्ष न रहे तो संपूर्ण मानव जगत
का अस्तित्व ही मिट जाएगा | यह भी सही है कि विकास के लिए वृक्ष काटना आवश्यक
है | इसके लिए हमें वृक्षारोपण को अपना कर्तव्य समझ इसका पालन करना चाहिए इसके
साथ ही हमें सतत पोषणीय विकास की विचारधारा को अपनाना चाहिए |

आरोह अध्याय चौथा काव्य भाग

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – वे आंखें (सुमित्रानंदन पंत)

प्रश्न –कविता भी आंखें में किसान की पीड़ा के लिए किसे जिम्मेदार बताया गया है?
उत्तर –
किसान की पीड़ा के लिए जमीदार और महाजन तथा क्रूर कोतवाल को जिम्मेदार ठहराया
गया है | महाजन ने अपना ब्याज और ऋण वसूलने के लिए उसके खेत, बैल और घरबार
बिकवा दिया | जमीदार के  कार् कूनो ने किसान के जवान बेटे को पीट-पीटकर मार दिया |
किसान इतना पैसों का मोहताज हो गया कीलाचार किसान अपनी पत्नी की दवा दारू ना
करा सका और वह भी चल बसी | और उसकी दूध मूही बच्ची का भी देहांत हो गया |
किसान की  पुत्रवधू पर भी कोतवाल ने कू दृष्टि डाली | वह भी कुएं में डूब कर मर गई |
समाज को अन् प्रदान करने वाले कृषक से सारा संसार किनारा कर तमाशा देखता रहा |
किसान अकेला ही पीड़ा को सहता रहा और भीतर ही भीतर घुटता रहा |

प्रश्न – पिछले सुख की स्मृति आंखों में क्षणभर एक चमक है लाती | इसमें किसान के
किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर –
वे आंखें कविता में सुमित्रानंदन पंत जी ने किसान के पिछले सुखों की ओर संकेत किया
है | किसान के कवि लहराते हरे भरे खेत  थे | जिन की हरियाली को देखकर उसका तन मन
प्रसन्न हो जाता था | तब वह स्वाधीनता उसी से उसका मस्तक ऊंचा उठता था | घर में बैलों
की जोड़ी थी | दूध देने वाली गाय थी |जो किसान से इतना प्रेम करती थी कि वह किसान
को ही अपना  दूध दोहने देती थी | किसान का भरा पूरा परिवार था | एक जवान बेटा और
बहू थी | किसान की देखभाल करने वाली उसकी अपनी पत्नी थी | वह सुख और समृद्धि से
सुख पूर्वक अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहा था | परंतु सब कुछ शोषक वर्ग
की भेंट चढ़ गया था | यह उपरोक्त खुशियां, सुख की स्मृतियां किसान की आंखों में क्षण
भर के लिए चमक ला देती थ |

प्रश्न – किसान की  विरान आंखें नॉक सदृश बन जाती हैं क्यों ?
उत्तर –
किसान बहुत खुश और धन-धान्य से भरपूर अपने परिवार में बहुत खुश था | लेकिन आज
उसकी दुर्दशा जो है उसे अपनी विवशता और असहायता पर रोना आता है | वह महाजन
का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता | यह सोच कर उसकी आंखें नम हो जाती है | कोतवाल
पर उसका जोर नहीं चलता |जमीदार के दुख वह सहता गया | यह सभी बातें उसकी आंखें
तीर के समान नुकीली हो जाती है औरऐसा लगता है मानो वह अत्याचारों की छाती को भेद
डालेगी |

प्रश्न – संदर्भ सहित आश्य स्पष्ट करें :
क – ऊजरी उसके सिवा किसे कब
       पास दुहाने आने देती?
ख – घर में विधवा रही पतोहू
       लक्ष्मी थी, यद्यपि पति घातिन
उत्तर –
क – आंखें कविता में किसान के पास एक श्वेत गाय थी | जिसका नाम ऊजरी था |
जिसे वह बहुत प्रेम करता था | महाजन ने ब्याज की कोड़ी कोड़ी वसूलने के लिए किसान
की बैलों की जोड़ी तथा गाय को नीलाम कर दिया | किसान को अपनी गाय की बहुत याद
आ रही थी कि दूध  दुहाने के लिए किसान  के अतिरिक्त किसी को पास नहीं आने देती थी |
आज सबकुछ उससे छीन गया |

ख- उपरोक्त  पंक्तियां  महाजन के कारकूनो  किसान के जवान पुत्र को मार डाला |
इसी कारण उसकी पुत्रवधू विधवा हो गई | उसकी इसी  स्थिति का चित्रण करते हुए कवि
कहता है की किसान का पुत्र नहीं रहा | उसके उसके पीछे उसकी विधवा पुत्रवधू रह गई जो
कहने का तो नाम से लक्ष्मी थी | परंतु वह पति को खाने वाली थी | कवि ने इन पंक्तियों में
समाज में विधवाओं के प्रति अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को व्यक्त किया है | कोई कसूर
ना होते हुए भी किसान की पुत्रवधू को पति घातिन होने का कलंक सहना पड़ रहा है |

आरोह अध्याय पांचवा काव्य भाग


आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)


प्रश्न – पानी के रात भर गिरने और प्राण मन के गिरने से परस्पर क्या संबंध है ?
उत्तर –
राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए कवि भवानी प्रसाद मिश्र को भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत
जेल यात्रा की यात्रा यातना सहनी पड़ी | यह कविता जब वह जेल में थे | तब उन्होंने लिखी
बहुत वर्षा हो रही है | रात भर वर्षा होने से कवि को अपने घर की याद आ गई घर के सदस्य
के साथ हंसी खेल करते हुए मनोरम दिन ज्यादा गए जिस प्रकार मेघा अकाश से गिरकर
वर्षा ला रहे हैं | उसी तरह कवि का मन यहां परिवार की स्मृतियों से गिरा हुआ है | जैसे जैसे
पानी रात भर लगातार गिरता जा रहा है वैसे-वैसे कवि के लिए में भी अपने परिजनों की
स्मृतियां चलचित्र बनकर निरंतर बढ़ती जा रही है |

प्रश्न – मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है ?
उत्तर –  
कवि सोच रहा है कि उसकी बहन मायके में अनंत खुशियां बांटने आई होगी | सोचा होगा
कि पिता के घर जाकर अपने भाइयों बहनों से मिलूंगी परंतु वहां जाकर उसे पता चला
होगा कि उसका एक भाई जेल में है | उसकी वही खुशियां दुख में बदल जाएंगी | वही
घर उसके लिए दुखों का घर बन गया होगा | इसी कारण बाप के घर को (परिताप का
घर) कहा है |

प्रश्न – पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?
उत्तर –
भवानी प्रसाद मिश्र के पिता की निम्नलिखित विशेषताओं को कार आ गया है –
i) बलिष्ठ शरीर और साहसी   कवि ने अपने पिता का विशालकाय और मजबूत
शरीर और साहसी व्यक्ति दर्शाया है | कभी कहते हैं कि उनके पिता पर बुढ़ापे का कोई
लक्षण दिखाई नहीं देता | वह अभी भी पूरी क्षमता के साथ दौड़ सकते हैं | खिल खिला
सकते हैं | साहस  तो उनमे इतना है कि वह अपने सामने शेर तो क्या मौत को देखकर
भी ना डरे | उनकी आवाज में बादलों जैसी गर्जन है | काम भी तूफान की तरह तेजी से
करते हैं |
ii) धार्मिक प्रवृत्ति – वह सुबह उठकर घर की छत पर जाकर व्यायाम करते हैं |
मुगलद भी जानते हैं | दंड बैठक निकालते हैं | और साथ में गीता का पाठ भी करते हैं |
यह उनकी एक धार्मिक प्रवृत्ति का उदाहरण है |
iii) कोमल हृदय – भवानी प्रसाद मिश्र के पिता मन से भी विशाल और उदार हैं | वह
अत्यंत सरल, भोले, सहृदय और  भावुक है | अपने परिवार जनों से वह गहरा लगाव
रखते हैं | उन के 5 पुत्र है वह सबसे गहरे जुड़े हुए हैं और कवि से उनका विशेष लगाव है |

प्रश्न – निम्नलिखित पंक्तियों में बस शब्द के प्रयोग की विशेषताएं बताइए?
मैं मजे में हूं सही है,
घर नहीं हूं बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब वीरस है |  
उत्तर –
यहां बस शब्द का प्रयोग विशिष्ट है बस शब्द तीन बार प्रयोग किया गया है |
परंतु तीनों बस का अर्थ अलग अलग है | एक बस का विविध प्रकार से अर्थ है | पहले
बस में कवि अपने पिता और परिवार जनों को सांत्वना दे रहा है | केवल मामूली सी बात
है कि मैं घर पर नहीं हूं बस यहां जेल में हूं | दूसरी बार बस शब्द में केवल कवि के मन
की व्याकुलता और पीड़ा का अनुभव होता है | वास्तविकता यही है कि वह घर से दूर है
कि उसकी सहनशक्ति कि मानो चरम सीमा हो गई है | अंतिम बस द्वारा कवि थोड़ा
आशावादी भी है कवि की विभिन्न स्थितियों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है | वैसे तो
जेल में मैं मजे से हूं लेकिन घर के लोग लोगों की खुशियों से मैं वंचित हूं यहां बस
निराशावादी चित्रण दे रहा है |

प्रश्न – कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कभी अपनी
किस स्थिति मन: स्थिति को अपने परिजनों से छुपाना चाहता है?
उत्तर –
कवि जेल में है | उसे घर की याद सताती है | बहुत तेज बारिश हो रही है तो वह सावन
को संबोधित करते हुए अपने आप से ही बातें कर रहा है | घर को याद कर रहा है | घर के
लोगों के वियोग से पीड़ित है |  दूसरे सभी लोगों से उसे डर लग रहा है | कहता है कि मैं
आदमी से भी डरने लग गया हूं जेल की यातनाएं सह रहा हूं | शरीर और मन ढलने लगा है |
रात रात भर जागता रहता हूं और चुप रहने लगा हूं | जेल में रहकर अपना अस्तित्व ही भूल
गया हूं | अपनी वास्तविकता छिपाकर सावन के माध्यम से अपने घर में खुशियों के संदेश
भिजवाता हूं | यहां कवि की मन की स्थिति दीवानों जैसी हो गई हैअर्थात उसे घर की याद
आ रही है |  

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का छटा अध्याय करेंगे – चंपा काले काले अक्षर नहीं चीनती

प्रश्न – कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर –
कवि ने चंपा की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है –
– भोलापन |
– अनपढ़ |
– शरारती स्वभाव |
– मुखर स्वभाव –  मन की बात को बिना छिपाए सीधे मुंह पर कहना |
– आत्मीयता  – परिवार के साथ मिलकर रहने की भावना |
– विद्रोही कष्ट देने वाले के प्रति खुला विद्रोह |

प्रश्न – चंपा कौन है उसे किस बात पर आश्चर्य होता है ?
उत्तर –
चंपा सुंदर नामक ग्वाले की बेटी है | बिल्कुल अनपढ़ है | मैं पढ़े-लिखे लोगों को अच्छा नहीं
मानती और पढ़ाई को भी अच्छा नहीं मानती | जब लेखक को काले काले अक्षर पढ़ते देखती है |
तो इस बात पर आश्चर्य होता है इन अक्षरों में कैसे-कैसे स्वर भरे हुए हैं | जिससे कुछ ना कुछ
पढ़ कर बोला जाता है | वह इस बात पर आश्चर्य करती है |

प्रश्न – चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कोलकाता पर बजर गिरे ?
उत्तर –
कवि चंपा को पढ़ने के लिए कहता है कि जब तेरी शादी हो जाएगी | तुम ससुराल जाओगी |
तब कुछ दिनों तक तो तुम्हारे पति तुम्हारे साथ रहेगा | फिर कमाने के लिए कोलकाता चला
जाएगा | तुम जानते हो कोलकाता बहुत दूर है तो तुम पति को संदेश कैसे भेजोगी | उसे पत्थर
कैसे लिखोगे इसलिए कभी उसे पढ़ने लिखने के लिए कहता है | तो तू कभी को वो बहुत अच्छे
से सीधा जवाब देती है | पहली बात तो मैं शादी नहीं करूंगी अगर करूंगी तो मेरे पति को मैं
कोलकाता नहीं जाने दूंगी | कोलकाता पर बजर गिरे अर्थात कोलकाता का  सत्यानाश हो |

प्रश्न – चंपा कोई पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा ने पढ़ने लिखने की बात कही
होगी ?
उत्तर –
चंपा ने दो बातें सुन रखी थी –
i) पढ़ना लिखना बुरी बात है |
ii) गांधी बाबा अच्छे मनुष्य है |
जब  कवि कहता है कि गांधी बाबा कहते हैं  सब पढ़ लिख जाए | तू भी पढ़ना शुरू कर दे |
तो उसको विश्वास नहीं हो पाता कि गांधी बाबा तो अच्छे मनुष्य थे | उन्होंने कैसे पढ़ने लिखने
जैसी बुरी बात कही होगी |

शुभकामनाएं सहित !

आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
उत्तर –
आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
सी सच्चाई उजागर होती है?
उत्तर –
इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
करिए?
उत्तर –
आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
उत्तर –
इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

पहली समस्या –
समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
दूसरी  समस्या –
सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
उत्तर –
‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
होता कल्पना करें और लिखें |
उत्तर –
बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
व्यतीत कर रही होती |

प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर – 
यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |

आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
उत्तर –
आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
सी सच्चाई उजागर होती है?
उत्तर –
इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
करिए?
उत्तर –
आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
उत्तर –
इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

पहली समस्या –
समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
दूसरी  समस्या –
सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
उत्तर –
‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
होता कल्पना करें और लिखें |
उत्तर –
बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
व्यतीत कर रही होती |

प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर – 
यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |

2020: A Clear Vision for Our Learners

20/20 vision is a term for visual acuity in which the numerator refers to distance and the denominator refers to size. Visual acuity (VA) commonly refers to the clarity of vision. Vision is all about clarity. 20/20 vision is perfect, high-definition clarity. The question is: How clear is your vision? Specifically, how clear is your vision [for your learners’] futures? (How to Have 20/20 Vision in 2020)

The year 2020 can act as metaphor for us, as educators, to have an overreaching vision for what we do. I really love the idea of approaching 2020 with a clear, well-articulated vision of our learners’ futures.

Grant Wiggins in Why Do You Teach had this to say about the importance of educators developing their vision-mission statements.

I am interested in [teachers being able to answer]:  Having taught, what should they have learned? What do you aim to accomplish as a teacher? What is your goal for the year, for all the years? What kind of a difference in their thinking and acting are you committed to?

Many teachers do not have good answers; most have no such personal Mission Statement; most have not even written a long-term syllabus in which they lay out the key goals for learners (and parents) and how those goals will best be achieved. But then – I say this with no malice –  you really have no goals. You are just marching through content and activities, hoping some of it will stick or somehow cause some learning.

 If you have no long-term accomplishments that you work daily to cause – regardless of or even in spite of the BS you encounter – then you are acting unprofessionally. What a professional educator does, in my view, is to stay utterly focused on a few long-term learning-related goals, no matter what happens in the way of administrative mandates, snow days, early dismissals for sports, or fire drills.

I have a vision – mission statement that I developed years ago but still holds true today:

To help learners developing the knowledge, skills, and passion to be self-directed, lifelong learners.

From my vision-mission statement I developed some guiding principles.

My vision-mission was not just a mental exercise I completed. It, along with my guiding principles, was developed to inform everything I do in my classrooms. I frequently revisit them as a form of self-assessment. Which principles are currently guiding my instructional strategies? Which ones are not being integrated into my classroom activities? What changes do I need to make to do so?

Here are some resources for developing your own vision-mission statement: