व्याकरण जनसंचार की विधाएं

जनसंचार को समझने के लिए संचार के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है |

प्रश्न –  संचार क्या है?

उत्तर –
मनुष्य सामाजिक प्राणी है सामाजिक प्राणी होने के कारण वह संचार करता है | संचार का मतलब
विचरण करना | दैनिक जीवन में संचार के बिना हम जीवित नहीं रह सकते | क्योंकि मनुष्य जब
तक जीवित है | संचार अर्थात विचरण करता रहेगा | हम यह भी कह सकते हैं कि समाचार जीवन
की निशानी है | हम जिस संचार की बात कर रहे हैं | उसका अर्थ है मानव के संदेशों को पहुंचाना
अर्थात संदेश भेजना प्राप्त करना इसके दो अनिवार्य लक्षण है |
1. दो या दो से अधिक व्यक्ति
2. उनके बीच किसी संदेश का ग्रहण होना या संप्रेषण होना |
संचार जो है अनुभवों की साझेदारी है | संचार की परिभाषा इस प्रकार हम कह सकते हैं | सूचनाओं
विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य- श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक एक
जगह से दूसरी जगह पहुंचाना ही संचार है |

प्रश्न – संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर –
वह साधन हमारे संदेश को पहुंचाते हैं  जैसे समाचार पत्र, फिल्म, टेलीफोन रेडियो, दूरदर्शन,
इंटरनेट, सिनेमा और फक्स आदि |


प्रश्न – संचार की प्रक्रिया के तत्व कौन कौन से हैं ?
उत्तर –
संचार की प्रक्रिया के निम्नलिखित तत्व है |
– संचारक या स्त्रोत
– संदेश का कुटीकरण
– संदेश का  कूटवाचन
– प्राप्तकर्ता

प्रश्न – संचार के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए ?
उत्तर –
संचार के निम्न प्रकार है |
– सांकेतिक संचार
– मौखिक संचार
– समूह संचार
– अंत: र्वैयक्तिक  संचार
– जनसंचार

प्रश्न – फीडबैक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
कुट्टी कृत संदेश के पहुंचने पर प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया करता है |
इससे पता चलता कि संचारक का संदेश प्राप्त करता तक पहुंच गया |

प्रश्न – एनकोडिंग या कुटीकरण का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर –
संदेश को भेजने के लिए शब्दों संकेतों या ध्वनि चित्रों का उपयोग किया जाता है | भाषा भी
एक प्रकार का कोट चिन्ह या कोड  होता है | अतः प्राप्तकर्ता को समझाने योग्य कुटों में
संदेश को बांधना एनकोडिंग या कुटीकरण कहलाता है |

प्रश्न – कूट वाचन या डिकोडिंग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
कुटीकरण की उल्टी प्रक्रिया कूट वाचन कहलाती है | इसके माध्यम से संदेश को प्राप्त करता
कूट चिन्हों में बंधे संदेश समझाता है | इसके लिए आवश्यक है कि प्राप्तकर्ता भी कोड का
वही अर्थ समझता हूं | जो उसे संचारक समझाना चाहता है |

प्रश्न – सांकेतिक संचार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – सांकेतिक संचार का आर्थिक संकेतों द्वारा संदेश पहुंचाना | मनुष्य का हाथजोड़ना, पांव
छूना, हाथ मिलाना, मुट्ठी कसना, सिग्नल देना, लाल बत्ती होना, हरी बत्ती होना आदि सांकेतिक
संचार है |

प्रश्न – समूह संचार का क्या आशय है?
उत्तर –
एक से अधिक व्यक्तियों से बात करता है  | किसी समूह के सदस्य आपस में विचार विमर्श करते हैं
तो उसे समूह संचार कहते हैं | अध्यापक का कक्षा में पढ़ाना किसी संस्था की बैठक होना, जलसा
या जुलूस  मैं वार्तालाप कोई एक व्यक्ति बात करता है और वह सबके लिए करता है | वह सामूहिक
मुद्दों पर की गई वार्ता समूह संचार के अंतर्गत ही आती है |

प्रश्न – जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर –
जनसंचार नहीं सभ्यता का शब्द है जब संचार किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज
के विशाल वर्ग से संवाद करने की कोशिश की जाती है तो उसे जनसंचार कहते हैं | इसमें एक संदेश
को यांत्रिक माध्यम के जरिए बहुगुणित किया जाता है | ताकि उसे अधिक से अधिक लोगों तक
पहुंचाया जा सके |

जनसंचार की प्रमुख विशेषताएं –
– जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या  प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है |
– इसमें संचालक और प्राप्तकर्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता |
– इस माध्यम में अनेक द्वार पाल होते हैं जो इन माध्यमों  से प्रकाशित /प्रसारित होने वाली सामग्री
को नियंत्रण तथा निर्धारित करते हैं |

प्रश्न – जनसंचार माध्यमों में द्वारपालों की भूमिका क्या है ?
उत्तर –
जनसंचार  माध्यमिक में द्वारपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है | यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह
सार्वजनिक हित, पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों और आचार संहिता के अनुसार सामग्री को संपादित
करें तथा इसके बाद ही उनके प्रसारण या प्रकाशन को इजाजत दे |

प्रश्न – जनसंचार के कौन-कौन से कार्य हैं स्पष्ट करें?
उत्तर –
जनसंचार के निम्नलिखित कार्य हैं  |
1. सूचना देना – जनसंचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है यह दुनिया भर से सूचनाएं
प्रसारित करते हैं |
2. मनोरंजन – जनसंचार माध्यम सिनेमा रेडियो-टीवी आदि मनोरंजन के भी प्रमुख साधन है |
3. जागरूकता – यह जनता को शिक्षित करते हैं जनसंचार माध्यम लोगों को जागरूक बनाते हैं |
4. निगरानी – जनसंचार माध्यम सरकार और संस्थाओं के कामकाज पर निगरानी भी रखते हैं |
5. विचार विमर्श के मंच – यह माध्यम लोकतंत्र में विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति का मंच
उपलब्ध कराते हैं इसके जरिए विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुँचाते हैं |

प्रश्न – जनसंचार के माध्यमों को आम जीवन पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर –
जनसंचार माध्यमों का आम जीवन पर बहुत प्रभाव है इनसे सेहत, अध्यात्मक, दैनिक जीवन
की जरूरतें हैं आदि पूरी होने लगी है | यह हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं |

प्रश्न – लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों का प्रभाव बताइए ?
उत्तर –
लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों में जीवन को गतिशील व पारदर्शी बनाया है | इससे माध्यम में
विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श व  बहस होती है | सूचनाओं में जानकारियों का आदान प्रदान
होता है | जो सरकार की कार्यशैली पर अंकुश रखती है | लोकतंत्र को सशक्त बनाती है |

प्रश्न – जनसंचार के दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर –
1. जनसंचार के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को कम महत्व दिया जाता है |
2.  समाज में अश्लीलता व सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं |
3.  जनसंचार के माध्यम खास तौर पर TV वेब सिनेमा ने लोगों को काल्पनिक दुनिया की
सैर कराई है | यह आम जनजीवन से दूर हो जाते हैं | यह पलायनवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं |
4. अनावश्यक मुद्दों को उछाला जाता है |
5. कई बार बहुत छोटी बात को बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है |


आरोह अध्याय तीसरा काव्य भाग


आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – पथिक (कवि रामनरेश त्रिपाठी)


प्रश्न- पथिक का मन कहां विचरना चाहता है ?
उत्तर –  
पथिक प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत है | प्रतिक्षण नूतन  वेश धारण करने वाली बादलों की
पंक्ति को तथा नीले समंदर की लहरों को देखकर वह  मुग्ध हो रहा है | पथिक का मन
नीले अकाश और नीले समुद्र के बीच विचार ना चाहता है | उसका मन चाहता है कि वह
बादलों पर बैठकर आकाश के बीच विचरण करें और प्रकृति के समस्त सौंदर्य का अनुभव
करें |

प्रश्न- सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के  बिंबो का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर –  
सुबह के सूरज की लालिमा जब समुद्र तल पर पड़ती है | तो चारों तरफ लालिमा बिखरती
हैं | कवि ने कल्पना की है कि मानो लक्ष्मी का मंदिर है और लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई
गई सुनहरी सड़क है | कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उसमंदिर का उज्जवल कअंगूरा
है और लक्ष्मी की सवारी को इस पुण्य धरती पर उतारने के लिए स्वयं समुद्र देव ने बहुत
सुंदर स्वर्णिम मार्ग बना दिया हो | कवि की कल्पना  बहुत ही सुंदर तरीके से बिंबो के रूप
में उभरकर आई है |

प्रश्न- पथिक कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है ऐसे
उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें?
उत्तर –  
श्री राम नरेश त्रिपाठी आधुनिक युग के कवियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | त्रिपाठी
जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार थे | प्राकृतिक प्रेम और नवीनता के प्रति आग्रह भी उनके
काव्य की प्रमुख विशेषता रही है | पथिक कविता में भी प्रकृति  के उपादान ओं को मानव
की भांति करते हुए दिखाया है | जिससे कविता के सौंदर्य अभिवृद्धि हुई है | सूर्य के सामने
बादलों का नाचना कभी श्वेत श्याम नील वर्ण को धारण करना गहरे अंधेरे का मानवीकरण
किया है आधी रात को सारे संसार को जो ढक लेता है | अकाश रूपी छत पर तारों को
बिखरा देता है तब इस जगत का स्वामी मंद गति से चलकर आता है | सागर ओं को अपने
मीठे गीत सुनाता है | आधी रात को जब सूर्य निकलने की तैयारी करता है और धीमी धीमी
गति से चलता हुआ सागर के किनारे अपनी लालिमा भी बिखेरता है | और चांद उसके रूप
को देखकर हंस कर वापसी की तैयारी करता है | पेड़ पत्ते फूल मुस्कुराने लगते हैं पक्षी
चहचाहने लगते हैं | वृक्षों को भी सजे धजे प्रसन्न मनुष्य के रूप में दर्शाया है | फूलों को
सुख की सास लेते हुए  प्राणी की भांति दिखाया गया है | इस तरह इस कविता में कई
स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है |


व्याकरण फीचर लेखन

फीचर लेखन के गुण:
1 – विश्वसनीयता
2 – सरसता एवं सहजता
3 – रोचकता एवं संक्षिप्त ता
4 – प्रसंगिकता


5 – प्रचलित शब्दावली का प्रयोग

फीचर लेखन का क्रम:
1 शीर्षक
2 भूमिका  
3 विषय का विस्तार  
4 निष्कर्ष या समापन

फीचर  लेखन कोनी मलिक श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
– सामाजिक सांस्कृतिक
– साहित्यिक  फीचर
– प्राकृतिक फीचर
– घटनापरक फीचर
– राजनीतिक फीचर

कुछ महत्वपूर्ण फीचर के उदाहरण –

1. स्वच्छता अभियान पर एक फीचर लिखिए | 
                     
स्वच्छता अभियान
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर
आरंभ किया गया स्वच्छ भारत अभियान अब तक सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है |
गांधी जी के आवाहन को पूरा करने वाले देश अब उनके लिए क्लीन इंडिया के आह्वान
को पूरा करने निकल पड़ा | देश को स्वच्छ बनाना सिर्फ किसी सरकार या संगठन की
जिम्मेदारी नहीं हो सकती हो नहीं संभव भी नहीं है | जब तक देश के नागरिक इसके
प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक इस महान लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है |
स्वच्छता की भावना हमारे अंदर होनी चाहिए बल्कि हमें स्वयं ही इसके प्रति आंतरिक
स्तर पर सचेत होना होगा | ना तो गंदगी फैलाएं और ना ही किसी को गंदगी फैलाने
दे यही भावना स्वस्थ अभियान को सफल एवं सार्थक बना सकती है | हमें स्वच्छता
के महत्व को समझना चाहिए इसके अभाव में यानी गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों को
भी जाना होगा विश्व पटल पर अपनी गंदगी की छवि को मिटाकर अपनी स्वच्छता
प्रिया छवि को स्थापित करना होगा और इस स्वच्छता अभियान को सफल बनाना होगा |

2. वन रहेंगे- हम रहेंगे पर एक फीचर लिखिए |

वन रहेंगे : हम रहेंगे
पिछले सैकड़ों वर्षों से वृक्ष कट रहे हैं जंगलों का सफाया हो रहा है | मनुष्य ने ठान
लिया कि हम ही रहेंगे चाहे जंगल रहे या ना रहे यदि जंगल रहे तो हम कहां रहेंगे |
जंगल सिकुड़ कर छोटे होते जा रहे हैं | नगर फल-फूल कर बड़े होते जा रहे हैं | मनुष्य
और प्रकृति में गहरा संबंध रहा है | मानव अपनी सभी अवस्थाओं की पूर्ति के लिए
पूर्णता प्रकृति पर ही निर्भर है | वन संपदा भी प्रकृति की एक अद्भुत और अत्यंत उपयोगी
है | वन तथा पेड़ पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  लेकर उसे प्राण दायिनी
ऑक्सीजन में बदल देते हैं | वृक्षों का प्रत्येक अंग – फल, फूल, पत्तियां, छाल यहां तक
की जड़ भी उपयोगी है | हमें स्वादिष्ट फलों के साथ साथ जीवन रक्षक औषधियां भी
मिलती हैं | वन बादलों को रोककर वर्षा कराने में भी सहायता करते हैं | पर्यावरण को
भी शुद्ध करते हैं वनों से प्राप्त लकड़ियां भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने का काम करती
हैं | वनों से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं | फिर भी मनुष्य ने अंधाधुंध वृक्षों की
कटाई की है | जिसके कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गए हैं | अचानक मौसम परिवर्तन
हो जाता है | जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं | पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
होने लग गई है | हिमनदो का पिघलना समुद्री जल- अति में वृद्धि अनेक समस्याओं को
उत्पन्न हो गई है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास के लिए वन संपदा
का प्रयोग करता है | इसलिए हमें यह बात समझनी होगी कि विकास और पर्यावरण
एक दूसरे के विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक हैं | यदि वृक्ष न रहे तो संपूर्ण मानव जगत
का अस्तित्व ही मिट जाएगा | यह भी सही है कि विकास के लिए वृक्ष काटना आवश्यक
है | इसके लिए हमें वृक्षारोपण को अपना कर्तव्य समझ इसका पालन करना चाहिए इसके
साथ ही हमें सतत पोषणीय विकास की विचारधारा को अपनाना चाहिए |

आरोह अध्याय चौथा काव्य भाग

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – वे आंखें (सुमित्रानंदन पंत)

प्रश्न –कविता भी आंखें में किसान की पीड़ा के लिए किसे जिम्मेदार बताया गया है?
उत्तर –
किसान की पीड़ा के लिए जमीदार और महाजन तथा क्रूर कोतवाल को जिम्मेदार ठहराया
गया है | महाजन ने अपना ब्याज और ऋण वसूलने के लिए उसके खेत, बैल और घरबार
बिकवा दिया | जमीदार के  कार् कूनो ने किसान के जवान बेटे को पीट-पीटकर मार दिया |
किसान इतना पैसों का मोहताज हो गया कीलाचार किसान अपनी पत्नी की दवा दारू ना
करा सका और वह भी चल बसी | और उसकी दूध मूही बच्ची का भी देहांत हो गया |
किसान की  पुत्रवधू पर भी कोतवाल ने कू दृष्टि डाली | वह भी कुएं में डूब कर मर गई |
समाज को अन् प्रदान करने वाले कृषक से सारा संसार किनारा कर तमाशा देखता रहा |
किसान अकेला ही पीड़ा को सहता रहा और भीतर ही भीतर घुटता रहा |

प्रश्न – पिछले सुख की स्मृति आंखों में क्षणभर एक चमक है लाती | इसमें किसान के
किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर –
वे आंखें कविता में सुमित्रानंदन पंत जी ने किसान के पिछले सुखों की ओर संकेत किया
है | किसान के कवि लहराते हरे भरे खेत  थे | जिन की हरियाली को देखकर उसका तन मन
प्रसन्न हो जाता था | तब वह स्वाधीनता उसी से उसका मस्तक ऊंचा उठता था | घर में बैलों
की जोड़ी थी | दूध देने वाली गाय थी |जो किसान से इतना प्रेम करती थी कि वह किसान
को ही अपना  दूध दोहने देती थी | किसान का भरा पूरा परिवार था | एक जवान बेटा और
बहू थी | किसान की देखभाल करने वाली उसकी अपनी पत्नी थी | वह सुख और समृद्धि से
सुख पूर्वक अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहा था | परंतु सब कुछ शोषक वर्ग
की भेंट चढ़ गया था | यह उपरोक्त खुशियां, सुख की स्मृतियां किसान की आंखों में क्षण
भर के लिए चमक ला देती थ |

प्रश्न – किसान की  विरान आंखें नॉक सदृश बन जाती हैं क्यों ?
उत्तर –
किसान बहुत खुश और धन-धान्य से भरपूर अपने परिवार में बहुत खुश था | लेकिन आज
उसकी दुर्दशा जो है उसे अपनी विवशता और असहायता पर रोना आता है | वह महाजन
का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता | यह सोच कर उसकी आंखें नम हो जाती है | कोतवाल
पर उसका जोर नहीं चलता |जमीदार के दुख वह सहता गया | यह सभी बातें उसकी आंखें
तीर के समान नुकीली हो जाती है औरऐसा लगता है मानो वह अत्याचारों की छाती को भेद
डालेगी |

प्रश्न – संदर्भ सहित आश्य स्पष्ट करें :
क – ऊजरी उसके सिवा किसे कब
       पास दुहाने आने देती?
ख – घर में विधवा रही पतोहू
       लक्ष्मी थी, यद्यपि पति घातिन
उत्तर –
क – आंखें कविता में किसान के पास एक श्वेत गाय थी | जिसका नाम ऊजरी था |
जिसे वह बहुत प्रेम करता था | महाजन ने ब्याज की कोड़ी कोड़ी वसूलने के लिए किसान
की बैलों की जोड़ी तथा गाय को नीलाम कर दिया | किसान को अपनी गाय की बहुत याद
आ रही थी कि दूध  दुहाने के लिए किसान  के अतिरिक्त किसी को पास नहीं आने देती थी |
आज सबकुछ उससे छीन गया |

ख- उपरोक्त  पंक्तियां  महाजन के कारकूनो  किसान के जवान पुत्र को मार डाला |
इसी कारण उसकी पुत्रवधू विधवा हो गई | उसकी इसी  स्थिति का चित्रण करते हुए कवि
कहता है की किसान का पुत्र नहीं रहा | उसके उसके पीछे उसकी विधवा पुत्रवधू रह गई जो
कहने का तो नाम से लक्ष्मी थी | परंतु वह पति को खाने वाली थी | कवि ने इन पंक्तियों में
समाज में विधवाओं के प्रति अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को व्यक्त किया है | कोई कसूर
ना होते हुए भी किसान की पुत्रवधू को पति घातिन होने का कलंक सहना पड़ रहा है |

आरोह अध्याय पांचवा काव्य भाग


आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)


प्रश्न – पानी के रात भर गिरने और प्राण मन के गिरने से परस्पर क्या संबंध है ?
उत्तर –
राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए कवि भवानी प्रसाद मिश्र को भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत
जेल यात्रा की यात्रा यातना सहनी पड़ी | यह कविता जब वह जेल में थे | तब उन्होंने लिखी
बहुत वर्षा हो रही है | रात भर वर्षा होने से कवि को अपने घर की याद आ गई घर के सदस्य
के साथ हंसी खेल करते हुए मनोरम दिन ज्यादा गए जिस प्रकार मेघा अकाश से गिरकर
वर्षा ला रहे हैं | उसी तरह कवि का मन यहां परिवार की स्मृतियों से गिरा हुआ है | जैसे जैसे
पानी रात भर लगातार गिरता जा रहा है वैसे-वैसे कवि के लिए में भी अपने परिजनों की
स्मृतियां चलचित्र बनकर निरंतर बढ़ती जा रही है |

प्रश्न – मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है ?
उत्तर –  
कवि सोच रहा है कि उसकी बहन मायके में अनंत खुशियां बांटने आई होगी | सोचा होगा
कि पिता के घर जाकर अपने भाइयों बहनों से मिलूंगी परंतु वहां जाकर उसे पता चला
होगा कि उसका एक भाई जेल में है | उसकी वही खुशियां दुख में बदल जाएंगी | वही
घर उसके लिए दुखों का घर बन गया होगा | इसी कारण बाप के घर को (परिताप का
घर) कहा है |

प्रश्न – पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?
उत्तर –
भवानी प्रसाद मिश्र के पिता की निम्नलिखित विशेषताओं को कार आ गया है –
i) बलिष्ठ शरीर और साहसी   कवि ने अपने पिता का विशालकाय और मजबूत
शरीर और साहसी व्यक्ति दर्शाया है | कभी कहते हैं कि उनके पिता पर बुढ़ापे का कोई
लक्षण दिखाई नहीं देता | वह अभी भी पूरी क्षमता के साथ दौड़ सकते हैं | खिल खिला
सकते हैं | साहस  तो उनमे इतना है कि वह अपने सामने शेर तो क्या मौत को देखकर
भी ना डरे | उनकी आवाज में बादलों जैसी गर्जन है | काम भी तूफान की तरह तेजी से
करते हैं |
ii) धार्मिक प्रवृत्ति – वह सुबह उठकर घर की छत पर जाकर व्यायाम करते हैं |
मुगलद भी जानते हैं | दंड बैठक निकालते हैं | और साथ में गीता का पाठ भी करते हैं |
यह उनकी एक धार्मिक प्रवृत्ति का उदाहरण है |
iii) कोमल हृदय – भवानी प्रसाद मिश्र के पिता मन से भी विशाल और उदार हैं | वह
अत्यंत सरल, भोले, सहृदय और  भावुक है | अपने परिवार जनों से वह गहरा लगाव
रखते हैं | उन के 5 पुत्र है वह सबसे गहरे जुड़े हुए हैं और कवि से उनका विशेष लगाव है |

प्रश्न – निम्नलिखित पंक्तियों में बस शब्द के प्रयोग की विशेषताएं बताइए?
मैं मजे में हूं सही है,
घर नहीं हूं बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब वीरस है |  
उत्तर –
यहां बस शब्द का प्रयोग विशिष्ट है बस शब्द तीन बार प्रयोग किया गया है |
परंतु तीनों बस का अर्थ अलग अलग है | एक बस का विविध प्रकार से अर्थ है | पहले
बस में कवि अपने पिता और परिवार जनों को सांत्वना दे रहा है | केवल मामूली सी बात
है कि मैं घर पर नहीं हूं बस यहां जेल में हूं | दूसरी बार बस शब्द में केवल कवि के मन
की व्याकुलता और पीड़ा का अनुभव होता है | वास्तविकता यही है कि वह घर से दूर है
कि उसकी सहनशक्ति कि मानो चरम सीमा हो गई है | अंतिम बस द्वारा कवि थोड़ा
आशावादी भी है कवि की विभिन्न स्थितियों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है | वैसे तो
जेल में मैं मजे से हूं लेकिन घर के लोग लोगों की खुशियों से मैं वंचित हूं यहां बस
निराशावादी चित्रण दे रहा है |

प्रश्न – कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कभी अपनी
किस स्थिति मन: स्थिति को अपने परिजनों से छुपाना चाहता है?
उत्तर –
कवि जेल में है | उसे घर की याद सताती है | बहुत तेज बारिश हो रही है तो वह सावन
को संबोधित करते हुए अपने आप से ही बातें कर रहा है | घर को याद कर रहा है | घर के
लोगों के वियोग से पीड़ित है |  दूसरे सभी लोगों से उसे डर लग रहा है | कहता है कि मैं
आदमी से भी डरने लग गया हूं जेल की यातनाएं सह रहा हूं | शरीर और मन ढलने लगा है |
रात रात भर जागता रहता हूं और चुप रहने लगा हूं | जेल में रहकर अपना अस्तित्व ही भूल
गया हूं | अपनी वास्तविकता छिपाकर सावन के माध्यम से अपने घर में खुशियों के संदेश
भिजवाता हूं | यहां कवि की मन की स्थिति दीवानों जैसी हो गई हैअर्थात उसे घर की याद
आ रही है |  

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का छटा अध्याय करेंगे – चंपा काले काले अक्षर नहीं चीनती

प्रश्न – कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर –
कवि ने चंपा की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है –
– भोलापन |
– अनपढ़ |
– शरारती स्वभाव |
– मुखर स्वभाव –  मन की बात को बिना छिपाए सीधे मुंह पर कहना |
– आत्मीयता  – परिवार के साथ मिलकर रहने की भावना |
– विद्रोही कष्ट देने वाले के प्रति खुला विद्रोह |

प्रश्न – चंपा कौन है उसे किस बात पर आश्चर्य होता है ?
उत्तर –
चंपा सुंदर नामक ग्वाले की बेटी है | बिल्कुल अनपढ़ है | मैं पढ़े-लिखे लोगों को अच्छा नहीं
मानती और पढ़ाई को भी अच्छा नहीं मानती | जब लेखक को काले काले अक्षर पढ़ते देखती है |
तो इस बात पर आश्चर्य होता है इन अक्षरों में कैसे-कैसे स्वर भरे हुए हैं | जिससे कुछ ना कुछ
पढ़ कर बोला जाता है | वह इस बात पर आश्चर्य करती है |

प्रश्न – चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कोलकाता पर बजर गिरे ?
उत्तर –
कवि चंपा को पढ़ने के लिए कहता है कि जब तेरी शादी हो जाएगी | तुम ससुराल जाओगी |
तब कुछ दिनों तक तो तुम्हारे पति तुम्हारे साथ रहेगा | फिर कमाने के लिए कोलकाता चला
जाएगा | तुम जानते हो कोलकाता बहुत दूर है तो तुम पति को संदेश कैसे भेजोगी | उसे पत्थर
कैसे लिखोगे इसलिए कभी उसे पढ़ने लिखने के लिए कहता है | तो तू कभी को वो बहुत अच्छे
से सीधा जवाब देती है | पहली बात तो मैं शादी नहीं करूंगी अगर करूंगी तो मेरे पति को मैं
कोलकाता नहीं जाने दूंगी | कोलकाता पर बजर गिरे अर्थात कोलकाता का  सत्यानाश हो |

प्रश्न – चंपा कोई पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा ने पढ़ने लिखने की बात कही
होगी ?
उत्तर –
चंपा ने दो बातें सुन रखी थी –
i) पढ़ना लिखना बुरी बात है |
ii) गांधी बाबा अच्छे मनुष्य है |
जब  कवि कहता है कि गांधी बाबा कहते हैं  सब पढ़ लिख जाए | तू भी पढ़ना शुरू कर दे |
तो उसको विश्वास नहीं हो पाता कि गांधी बाबा तो अच्छे मनुष्य थे | उन्होंने कैसे पढ़ने लिखने
जैसी बुरी बात कही होगी |

शुभकामनाएं सहित !

आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
उत्तर –
आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
सी सच्चाई उजागर होती है?
उत्तर –
इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
करिए?
उत्तर –
आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
उत्तर –
इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

पहली समस्या –
समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
दूसरी  समस्या –
सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
उत्तर –
‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
होता कल्पना करें और लिखें |
उत्तर –
बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
व्यतीत कर रही होती |

प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर – 
यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |

आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
उत्तर –
आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
सी सच्चाई उजागर होती है?
उत्तर –
इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
करिए?
उत्तर –
आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
उत्तर –
इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

पहली समस्या –
समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
दूसरी  समस्या –
सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
उत्तर –
‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
होता कल्पना करें और लिखें |
उत्तर –
बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
व्यतीत कर रही होती |

प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर – 
यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |