शहीदी जोड़ मेला – फतहगढ़ साहिब

चण्डीगढ़-सरहिंद सड़क पर स्थित फतहगढ़ साहिब सिखों के दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबज़ादों की अद्वितीय शहीदी और बलिदान के लिए जगत प्रसिद्ध स्थान है। यहां साहिबजादा जोरावर सिंह तथा साहिबज़ादा फतहसिंह अपनी बाल्यावस्था में ही मुगलों के साथ टक्कर लेते हुए।   देश और कौम के लिए शहीद हो गए थे। उस समय इन साहिबज़ादों की आयु क्रमशः मात्र नौ वर्ष तथा सात वर्ष की थी।   उनकी महान् शहादतों की स्मृति में यहां प्रत्येक वर्ष पौष माह की एकादशी से चतुर्दशी तिथि तक (दिसम्बर माह में) शहीदी जोड़ मेला आयोजित किया जाता है।  जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। इस पवित्र कस्बे का नाम फतहगढ़ साहिब, साहिबजादा फतहसिंह के नाम पर रखा गया है। फतहगढ़ साहिब सरहिंद से केवल पांच किलोमीटर तथा चण्डीगढ़ से 48 किलोमीटर दूर है।
सन् 1701 में मुगल सेना ने आनंदपुर साहिब की घेराबंदी कर ली थी। उस समय वहां स्वयं श्रीगुरु गोबिंद सिंह तथा उनका परिवार ठहरा हुआ।  था।जब मुगल सेना इस अविराम घेराबंदी से कोई लाभ न उठा सकी तो उन्होंने एक चाल चली मुगलों ने गुरुजी के समक्ष एक प्रस्ताव रखा कि यदि वह आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दें तो वे घेराबंदी समाप्त करके अपनी सेना वापिस ले जाएंगे तथा उन पर आक्रमण नहीं करेंगे गुरुजी ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया किन्तु जब गुरुजी किले से बाहर निकल आए तब मुगलों की नीयत बदल गई तथा उन्होंने सरसा नदी, जो उस समय बाढ़ के कारण लबालब भरी हुई थी।  के किनारे गुरुजी पर हमला बोल दिया।
इस हमले में माता गुजरी जी (गुरु जी की माता) तथा छोटे साहिबज़ादे जोरावर सिंह तथा फ़तह सिंह गुरुजी से बिछुड़ गएमाता गुजरी जी तथा दोनों साहिबज़ादे ‘खेड़ीगांव’ में अपने एक नौकर गंगू के घर ठहर गए पर गंगू एक सच्चा अनुचर न निकला उसने इनाम के लालच में, तथा मुगलों के भय से मोरिण्डा के शासक के पास खबर भिजवा दीउन तीनों को कैद करके सरहिंद के गवर्नर के पास भेज दिया गया।
यह घटना 9 पौष 1761 की है। अगले दिन 10 पौष को दोनों बालकों को गवर्नर के सामने पेश किया गया।   ।, जिसने उन्हें लालच दिया कि यदि वे इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें तो उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा, अन्यथा। उनकी हत्या कर दी जाएगी। जब साहिबजादों पर उसकी बात का कोई प्रभाव न पड़ा, तब इस निर्दयी ने उन दोनों को एक दीवार में जीवित चिनवा देने का आदेश दे दिया। जब यह दीवार साहिबज़ादों के गले तक पहुंची तो वे लगभग बेहोश हो चुके थे, तभी यह दीवार अचानक स्वयं ही चटककर धराशायी हो गई जब साहिबज़ादों को पुनः चेतना आई तो 12-13 पौष को उनको फिर वही इस्लाम धर्म को अपनाने के लिए बाध्य किया गया। परन्तु उन वीर बालकों ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया परिणामस्वरूप दोनों साहिबज़ादों को शहीद कर दिया गया। जब उनकी दादी, माता गुजरी जी को इस हृदय विदारक घटना के विषय में पता चला तो उन्होंने भी तत्काल अपने प्राण त्याग दिए। इन महान् शहादतों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने यहां पर सर्वप्रथम 1888 में शहीदी जोड़ मेला आयोजित किया गया। जो कि अब प्रत्येक वर्ष बड़ी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है

हाथी के साथी

हो जाने की वजह बन जाती है।
सहायक सामग्रीसी.डीदृश्य – जानवरों की लाश पर भी अत्याचार पशुपक्षियों पर होनेवाले अत्याचार पर आधारित कोई रपट ,स्लाइड । वर्तमानकालिक क्रियाओं का चार्ट या स्लाइड
हाथियों का झुंड
रपट के प्रस्तुतीकरण के साथ कक्षा शुरू करें 
बंदरों का खौफ: छत से कूदी महिला
फरीदाबाद: 10 मई : बंदर के भय से सेक्टर-21 सी. में महिला ने दो मंजिले मकान से छलाँग लगा दी। जिससे उसके चेहरे व नाक की हड्डियाँ टूट गईं । गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना से सेक्टरवासी बंदरों से खौफजदा है। इससे पहले भी यहाँ अनेक हादसे हो चुके हैं। बंदरों के आतंक से निजाद पाने के लिए स्थानीय लोग शिकायत करेंगे। बंदरों को पकड़ने में निगम को नाकाम बताते हुए लोगों ने अब निगमायुक्त से बंदरों को मारने की अनुमति लेने का फैसला किया है ताकि इस समस्या से खुद निपटा जा सके। (खौफ: भय, निजाद: रक्षा)

 ? महिला ने दुमंजिले मकान से क्यों छलाँग लगा दी?
नगर में बंदरों का आतंक क्यों हो रहा है?
स्थानीय लोगों ने किसकी अनुमति लेने का प्रयास किया हैक्या यह उचित है?
उत्तर बताने का अवसर दें।

  • भारी मात्रा में जंगल की कटाई से जानवरों के बेघर हो जानाप्रकृति का असंतुलन होना आदि समस्याएँ आ जाती हैं।

    इस ओर संकेत करते हुए मिलानी की घटना हाथी के साथी” पढ़ें।
पहला अंतर – (यह एक….मर गया)
 वाचन प्रक्रिया ।
 छात्र सस्वर वाचन। वाचन का आकलन।
 ? जंगल के हाथी कैसे बेघर हो गए?
 ? किसी के बेघर हो जाने पर क्या होता है?

गाँव में हाथी का आक्रमण

 ? जंगली जानवरों के बेघर हो जाने से क्या होता है?
 ? “रौंद डालना”, “गुस्सा उतारना” आदि से आप ने क्या समझा है?
 उदा: हाथी ने महावत को रौंद डाला।
इस प्रकार के अन्य उदाहरण देकर अर्थ और प्रसंग समझा दें। ऊपर के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
 ? पशु-पक्षियों को मारना कानूनी जुर्म है।
    क्या आप कानून से परिचित हैं? ( स्रोत पुस्तक के अधिनियम प्रस्तुत करें-स्लाइड शो ।)
 “ज़ोर से बिजली का झटका लगा और वह मर गया।” इसके समान कोई घटना मालूम है तो प्रस्तुत करें।

अगला अंतर – (खबर मिलते ही…..उसे सताना नहीं छोड़ा।)

हाथी के दाँत निकाले गए!

वाचन प्रक्रिया और उसका आकलन ।
? हाथी की लाश से गाँववालों का व्यवहार कैसा था?
? अपने साथी की लाश को हाथियों ने कैसे दफनाया?
? हाथी के मामले में नियमपालक उसके वंचक बन गए हैं। यह कहाँ तक सही है?
? अगर गाँववालों की जगह आप होते तो हाथी की लाश से कैसा व्यवहार करते?
हाथी के बेघर होने में मानव समाज का असंगतिपूर्ण विकास कहाँ तक जिम्मेदार है? टिप्पणी तैयार करें।
? मनुष्य जंगल की कटाई क्यों करते हैं?
? इससे जंगली जानवरों की कैसी हालत होती है?
? जंगली जानवरों के बेघर होने से मानव को क्या नुकसान होता है?
? इसपर मानव की जिम्मेदारी कहाँ तक है?

  • लेखन प्रक्रिया
रपट तैयार करें– (पाठ्यपुस्तक पृ. 21.)
छात्र चित्रवाचन करेंप्रसंग पहचानें।
चित्र में आप क्या देखते हैं?
इन जानवरों की हालत कैसी है?
क्या मानव का जानवरों से ऐसा व्यवहार उचित हैक्योंटिप्पणी तैयार करें।
पाठ्यपुस्तिका की मैंने क्या किया” शीर्षक पर दी गई जाँच सूची का इस्तेमाल करें।
भाषा की बात – विशेषण
प्रक्रिया
खंड का वाचन करें। (पाठ्यपुस्तक पृ. 21)
रेखांकित शब्द किसकी सूचना दे रहे हैं?
?यहाँ क्रिया का व्यापार किस काल में हो रहा है?
इन कालरूपों में क्या अंतर है?
किसकिस प्रसंगों में ऐसे क्रियारूपों का प्रयोग होता है?
वर्तमानकालिक क्रियाओं का चार्ट या स्लाइड दिखाएँ।
इस इकाई के पाठों से वर्तमानकालिक क्रियारूप छाँटें और उनका प्रयोग समझें।
भाषा की बात उद्घोषणा
उद्घोषणा का ध्यानपूर्वक वाचन करें।
उसका आशयग्रहण करें। संबोधनसमयस्थानतिथिकार्य आदि पर ध्यान रखें।
संक्षिप्त एवं स्पष्ट भाषा शैली से परिचय पाएँ।
उद्घोषणा प्रस्तुत करने का अवसर छात्रों को दें।
अध्यापक नमूना प्रस्तुत करें।
उद्घोषणा तैयार करें।
स्कूल के कई कार्यक्रमों से किसी एक का चयन करें।
कार्यक्रम पूर्ण रूप से तैयार करें।
समयस्थानतिथिकार्य जोड़ें।
संबोधन पर ध्यान दें।
संक्षिप्त एवं स्पष्ट भाषा शैली से उद्घोषणा तैयार करें।
भाषा की बात – विश्लेषण
दीप्ती की डायरी टी.बीपृ. 23 पढ़ें।
डायरी ध्यान से पढ़ेंरेखांकित क्रियारूपों पर ध्यान दें।
रेखांकित क्रियाएँ किस काल की सूचना देती हैं?
अन्य उदाहरण दें।
इकाई के पाठों से भविष्यत्कालीन क्रियारूप छाँटकर लिखें।
विश्लेषण– पोस्टर
पोस्टर का वाचन करें।
कार्यक्रम पहचानें।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्याक्या करेंगे?
इन बातों पर चर्चा करें।
प्रदर्शनी कैसे चलाएँगे?
किनकिन साहित्यकारों के चित्र इकट्ठा करेंगे?
कौनकौनसी प्रतियोगिताएँ चलाएँगे?
कवितापाठ का मूल्याँकन कौन करेंगे?
सार्वजनिक सम्मेलन में स्वागत भाषणअध्यक्षीय भाषणकृतज्ञता ज्ञापन आदि कौनकौन करेंगे?
उद्घाटन करने के लिए किसको आमंत्रित करेंगे?

पारिभाषिक शब्दावली टी.बीपृ. 25.
पारिभाषिक शब्दों से परिचय पाएँ।
ये पारिभाषिक शब्द किस विभाग से संबंधित हैं?
संचार संबंधी अन्य दो पारिभाषिक शब्द लिखें।

अतिरिक्त कार्य
पत्नी POSTMAN आया है।
डाकियाएक REGISTERED LETTER है।
पतिकहाँ से है?
डाकियातिरुवनंतपुरम से। यहाँ हस्ताक्षर कीजिए।
पतिइनमें नया STAMP लगाया गया है।
पत्नीएक INLAND LETTER CARD मिलेगा जी?
डाकियानहीं जीडाकघर में जाइए।

हमने क्या किया?
  • रपट द्वारा प्रवेश प्रक्रिया चलाई
  • समस्या निर्धारित की
  • अंकित वाचन कराया
  • टिप्पणी तैयार कराई
  • रपट लिखवाई
  • वर्तमानकालिक क्रियारूपों की अवधारणा बनाई
  • उद्घोषणा लिखवाई
  • पोस्टर तैयार कराया
  • पारिभाषिक शब्दों का परिचय दिया

एकल अभिनय अथवा एक-पात्रीय नाटक

रंगमंच अभिनेता का माध्यम है, किन्तु दुर्भाग्यवश रंगमंच में अभिनेता की अलग पहचान नहीं बन पायी | इस पहचान के बिना रंगमंचकी पहचान भी संभव नहीं है | ‘एकल अभिनय’ पूरी तरह अभिनेता का रंगमंच है | यह एक अभिनेता को उसके द्वारा अर्जित अनुभव, कार्यदक्षता और कल्पनाशीलता के प्रदर्शन का स्वतंत्र अवसर उपलब्ध करता है और उसे उसकी जादुई शक्ति के साथ रंगमंच पर प्रतिष्ठापित भी करता है | एकल नाट्य (या एकल अभिनय) किसी भी स्तर पर सामूहिकता का निषेध नहीं करता, बल्कि यह सामुदायिक जीवन का अंग है, क्योंकि यह व्यापक दर्शक समुदाय को सम्बोधित होता है |
ऊपरी तौर पर ‘एकल अभिनय’ भले ही सरल लगता हो; किन्तु वास्तव में, यह ‘समूह-अभिनय’ से ज्यादा जटिल है और कल्पनाशीलता तथा नाट्य-कौशल में सिद्धहस्त अभिनेता की माँग करता है | समूह अभिनय में, जहाँ अनेक अभिनेताओं की क्रिया-प्रतिक्रिया के संघर्ष से नाट्य प्रभाव की सृष्टि होती है; वहीं एकल अभिनय में, अभिनेता के भीतर यह नाट्य-व्यापार घटित होता है, जो उसकी शारीरिक क्रिया द्वारा मंच पर साकार होता है | एकल अभिनय,
मूल-धारा के समूह अभिनय के विरुद्ध नहीं है; बल्कि यह उसे सम्पुष्ट करता है, बल प्रदान करता है; सबसे अधिक यह रंगमंच की अनिवार्य इकाई अभिनेता को विशेष पहचान देता है, उसके प्रति दर्शकों की आस्था को शक्ति प्रदान करता है | इसप्रकार यह रंगमंच के नायक ‘अभिनेता’ को पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है | बांग्ला रंगमंच में, एकल अभिनय की परम्परा काफी वर्षों से है और तृप्ति मित्र-साँवली मित्र के प्रयोग का भारतीय रंगमंच में उच्च-मूल्यांकन किया जाता है | बाऊल एक तरह का एकल नाट्य ही है | महान बांग्ला अभिनेता शांति गोपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर चर्चित ‘लेनिन’, ‘कार्लमार्क्स’, ‘सुभाषचंद्र’, ‘राममोहन रॉय’ आदि पर मंचित जात्रा; एक हद तक, उनका एकल अभिनय ही था | इधर कुछ वर्षों से; हिन्दी, कन्नड़, मराठी और अन्य भारतीय भाषाओं में एकल अभिनय के अनेक अभिनव प्रयोग किये गए हैं | पटना में ‘नटमंडप’ द्वारा इस सिलसिले को पिछले कुछ वर्षों से गंभीरता से आगे बढाया गया है | बिहार के अन्य कतिपय रंगकर्मियों द्वारा भी एकल अभिनय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये गए हैं | रंगमंच के लिए किसी नाट्य प्रयोग की प्रासंगिकता, उसके द्वारा संपूर्ण नाट्य प्रभाव की सृष्टि और नाट्यकला का आस्वाद करा पाने की उसकी क्षमता में अन्तर्निहित है | इसलिए, एकल अभिनय एक सामान्य नाट्य मंचन जैसा ही है, जिसमें एक-अकेले अभिनेता के अतिरिक्त, किसी दूसरे अभिनेता की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होती और इसकी सफलता भी इसी में है कि दर्शक को किसी भी क्षण किसी अन्य अभिनेता के न होने का अहसास न हो | एकल अभिनय को, रंगमंच के एक ‘फॉर्म’ अथवा शैली के रूप में दर्शकों की स्वीकृति भी मिल रही है और यह रंगमंच के हित में है|

नोम चोमस्की एक अमेरिकी भाषाविद्, दार्शनिक, संज्ञानात्मक वैज्ञानिक, तार्किक, राजनीतिक आलोचक और कार्यकर्ता है

नोम चोमस्की 7 दिसंबर 1928 को फिलाडेल्फिया में पैदा हुआ था और कई वर्षों के लिए भाषा विज्ञान के एक प्रोफेसर की गई है. उन्होंने पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय से 1955 में एक डॉक्टर की डिग्री को सुरक्षित करने में सक्षम था. यह वह भाषा विज्ञान में majored कि कि विश्वविद्यालय में किया गया.

चोमस्की पहले भी भाषा विज्ञान के एक विद्वान था, जो उसकी हिब्रू पिता द्वारा भाषा के क्षेत्र के लिए शुरू की गई थी.

उन्होंने यह भी एक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, संज्ञानात्मक वैज्ञानिक, दार्शनिक और कई पुस्तकों के सम्मानित लेखक माना जाता है. यह लोगों को राजनीतिक क्षेत्र में एक उदारवादी समाजवादी के रूप में उसे वर्णन करने के लिए शुरू किया है कि 1960 के आसपास थी.

उन्होंने कहा कि भाषाई दुनिया पर एक बड़ा प्रभाव है और वह लोगों को एक नई भाषा सीखने के लिए पर जोर डालने में निभाई भूमिका होने के लिए, तथापि, जमा किया गया है.

वे वृद्धि के रूप में अच्छी तरह से चोमस्की पदानुक्रम के रूप में जाना जाता है जो उनके सिद्धांत, और अधिक शक्ति के साथ अलग अलग वर्गों में निर्धारित व्याकरण बिताते हैं. उत्पादक व्याकरण और सार्वभौमिक व्याकरण का उनका विचार भी चोम्स्की और अन्य भाषाविद् के बीच विभाजनकारी का हिस्सा था.

उनका काम भी ऐसे इम्यूनोलॉजी, विकासवादी मनोविज्ञान, और कृत्रिम बुद्धि के अनुसंधान के साथ ही कम्प्यूटरीकृत है कि भाषा के अनुवाद के रूप में विशेषज्ञता के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है.

चोमस्की अपने अन्य समकक्षों की तुलना में एक अलग तरह के प्रकाश में भाषा के अध्ययन का दरवाजा खटखटाया. उनके सार्वभौमिक व्याकरण सिद्धांत है कि सभी मनुष्यों शेयर भाषाई नियमों की एक आंतरिक सेट है कि प्राथमिक सिद्धांत पर बल दिया. यह वह एक भाषा सीखने की शुरुआत चरणों बुलाया.

यह कुछ विशिष्ट नियम, दी जब किसी भी भाषा के उत्पादक व्याकरण, उचित व्याकरण की दृष्टि से एक वाक्य फार्म का गठबंधन होगा कि शब्दों की गणना करेगा कि तथ्य यह है कि पहचान की Naom चोमस्की था. सही ढंग से संपर्क किया जब वे एक ही नियम वाक्य की आकारिकी पर जोर देना होगा.

चोमस्की के उत्पादक व्याकरण के इस सिद्धांत के पहले संस्करण परिवर्तनकारी व्याकरण था. बेशक, उत्पादक व्याकरण संज्ञानात्मक व्याकरण और कार्यात्मक सिद्धांतों के समर्थकों से कुछ आलोचनाओं प्राप्त करता है.

समापन

चोमस्की मन दूसरों को यह ऋण देने से भाषा विज्ञान के साथ क्या करना था कि लगा. वह एक भाषाई वातावरण में रखा जाता है जब एक बच्चे का उदाहरण देकर प्रेफसस इस बोली जाती हैं कि शब्दों के लिए अनुकूल करने के लिए एक सहज क्षमता है करने में सक्षम है.

ब्लॉग में contact पेज कैसे जोडे

हर Blog और Website के लिए Contact, About, Privacy policy Pages बहुत important होते हैं ।
इनकी मदद से Audience आपसे अच्छी तरह से connect रहती है और आपके बारे में और भी ज्यादा जानकारी प्राप्त करती है ।
अगर कोई व्यक्ति आपसे contact करना चाहता है तो वो आपकी site पर contact Us page की मदद से आपसे संपर्क कर सकता है ।
About us page की help से readers को post Author और Admin के बारे में अधिक जानने में मदद मिलती है ।
इस तरह के pages हर website के जरूरी है
अगर आप अपनी site को professional look देना चाहते हो तो आपको site पर इस तरह के pages जरूर add करने होगें ।
Google भी इन pages को पसंद करता है इससे site trustable हो जाती है ।
Contact Page हर Website के लिए important होता है इससे site के visitors आपसे contact कर सकते हैं, कोई कंपनी advertising के लिए आपसे संपर्क करना सकती है ।
यह एक Brand के लिए बहुत जरूरी है ।
अगर आप Contact page पर ज्यादा जानकरी देना नहीं चाहते तो आप एक Callable Contact page बना सकते हैं ।


Callable Link क्या है ?

Normally जब हम किसी web url पर click करते है तो किसी site का कोई पेज open है ।
लेकिन जब हम किसी callable link पर क्लिक करते हैं तो Direct Email Send, Call या Massage Editor Open हो जाता है
जिसमें Receiver person का email या phone पहले से लिखा रहता है हमें केवल वहां अपना message type करके send पर क्लिक करना होता है ।
Example :- Click Here

आप अपने blog में भी इस तरह का Page Add कर सकते हैं इससे जब भी कोई व्यक्ति इस पर क्लिक करेगा वह direct email send पर पहुंच जाएगा ।
अपनी इस पोस्ट में मैं आपको बताउंगा कि blogspot में Callable contact page कैसे add करें ।

माय आईडिया अप्प डाउनलोड फ्री डेटा ऑफर

आजकल लोगों Internet pack हर स्मार्टफोन यूजर्स की जरूरत बन चुका है क्योंकि इंटरनेट से हम काफी काम आसानी से कर सकते हैं ।
आज मैं आपको एक ऐसी ट्रिक के बारे में बताने वाला हूं जिससे आप फ्री में 512 MB 2G/3G/4G data प्राप्त कर सकते हैं ये ट्रिक केवल आईडिया यूजर्स के लिए है ।
Free Idea 512 Mb Data trick
Free 512 MB Idea Internet कैसे प्राप्त करें 100% Working Trick

आईडिया कंपनी ने अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए एक Mobile App बनाया है – My Idea App
इस app से आप अपने Idea account की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, आप अपने talktime, Data pack, VAS, Offers आदि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं आप इससे ऑनलाइन recharge भी कर सकते है इसमे आपको की तरह के आकर्षक ऑफर्स भी मिलेगे ।


Idea अपने users को पहली बार इस App को download करने पर Free 512 MB 2G/3G/4G data दे रही है ।
Free 512 MB idea data प्राप्त करने के लिए नीचे दिए simple steps follow करें –
Step.1 – सबसे पहले नीचे क्लिक करके My Idea app Download और Install करें ।



Step.2 – अब My Idea app open करें ।
Step.3 – अब इसमें अपना Idea no. डालें ।
Step.4 – अब आपके नंबर पर एक OTP आएगा वैसे तो ये Automatic Verify हो जाएगा लेकिन अगर ऐसा न हो तो आप इसे idea app में enter करें और Next पर क्लिक करें ।
अब आपका Idea Account open हो जाएगा और आपके नंबर पर 512 Mb 2G/3G/4G data प्राप्त हो जाएगा जिसकी Validity 5 Days होगी ।
आप My Idea App पर अपने अन्य नंबरों से भी sigh up करके उन पर भी Free 512 Mb data प्राप्त कर सकते हैं 
इस एप्प की मदद से आप अपने Account information, Recharge history, Recharge, Data packs, offers etc. की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।
अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी तो इसे social media पर भी शेयर करें 

साइट का रेफरल लिंक कैसे बनाए

आजकल इन्टरनेट पर कई तरह के Refer and earn और affiliate programs चल रहे है हर बेवसाइट एडमिन चाहता है कि उसकी साइट पर अधिक से अधिक यूजर्स जुड़े ।
इसके लिए कई लोग अपनी साइट पर रेफर एंड अर्न सर्विस चालू कर रहे हैं ताकि उनकी site अधिक famous हो सके ।
आप भी अपनी site के लिए refer and earn program start कर सकते हैं इसमे अगर कोई व्यक्ति अपने referral link को शेयर करे और इससे जो traffic आपको प्राप्त होगा उसके बदले आपको व्यक्ति को pay करना होगा ।
इससे आपकी site अधिक famous होगी और traffic, earning भी increase होगी ।
Refer and earn start करने के लिए आपको जरूरत होगी site के referral links की, जिसका उपयोग प्रोग्राम यूजर्स कर सके और आप traffic को track कर सकें ।
आज मैं आपको एक ऐसी सिम्पल ट्रिक बताने वाला हूं जिससे आप अपनी साइट के free unlimited referral links create कर पाएंगे ।

व्हाट्सएप्प डाउनलोड और इंस्टाॅल कैसे करे ?

Internet पर सबसे अधिक use होने वाली sites मे Social media sites का बहुत बड़ा हिस्सा शामिल है ।
दुनियाभर मे करोड़ो लोग अपने रोजमर्रा का काफी समय Social media पर व्यतीत करते हैं ।
Social media की list में WhatsApp बहुत popular social media मे से एक है WhatsApp पर लगभग 1 अरब यूजर्स मौजूद है और इनकी संख्या तेजी से बढती ही जा रही है ।
यह अपने end to end encryption की security के कारण बहुत ही popular हो चुका है ।
कुछ समय पहले फेसबुक ने इसे 19 बिलियन डॉलर मे खरीद लिया है 
आज अपनी इस पोस्ट मे मैं आपको बताउंगा कि व्हाट्सएप का नया वर्जन कैसे डाउनलोड करें और इस पर अकाउंट कैसे बनायें ?

WhatsApp kaiser banaye


Latest WhatsApp version kaise download kare ?

WhatsApp पर नए नए फीचर्स लांच होते रहते है जिनका उपयोग करने के लिए हमे WhatsApp का Latest version download करना होता है ।
नया वर्जन डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए स्टेप्स फाॅलो करें –
Step.1 – अपने मोबाइल में Google play store open करें ।
अगर आपने यहा login नही किया है तो सबसे पहले अपने Gmail id से login करें ।
Step.2 – अब यहां WhatsApp को search करें ।
Step.3 – इसके बाद आप install पर click करके WhatsApp install कर सकते है ।
अगर आपके मोबाइल मे पहले से यह डाउनलोड है तो यहा open या update का option दिखाई देगा ।
अगर WhatsApp का new version officially launch हो गया होगा तो आपको यहां Update का option दिखेगा ।
इसपर क्लिक करके आप अपना WhatsApp अपडेट कर सकते हैं ।
Step.3 – अगर आपने WhatsApp update किया है तो आपको दोबारा account बनाने की कोई जरूरत नही ।
लेकिन अगर आपने इसे पहली बार install किया है तो आपको इस पर account बनाना होगा ।

इसके लिए WhatsApp open करें ।
Step.4 – अब Agree and Continue पर क्लिक करें ।
Step.5 – अब अपनी country select करें और अपना Mobile No. डालें फिर Next पर क्लिक करें ।
Step.6 – अब आपके No. पर एक OTP आएगा वैसे ये Automatically Enter हो जाता है लेकिन अगर न हो तो आप ये 6 digit का OTP enter करें ।
Step.7 – अब अपना Profile Photo Select करें और Name डालें ।
Step.8 – अब बैकअप का option आएगा
अगर आप अपने WhatsApp chats का back अपनी Google drive में सेव करना चाहते हैं तो Week, Month या year में से चुने ।
और अगर आप बैकअप लेना नही चाहते तो NEVER चुनें ।
अब आपका WhatsApp Ready हो चुका है आपके मोबाइल Contact no. में से जिन नंबरों पर WhatsApp ID बनी होगी वे show होने लगेंगे ।
आप उनपर क्लिक करके उन्हे मैसेज भेज सकते है और चैटिंग कर सकते हैं ।
अगर आप किसी व्यक्ति को अपने WhatsApp पर जोडना चाहते हैं तो आपको बस उनका WhatsApp no. अपने मोबाइल में सेव करना होगा और WhatsApp को refresh करना होगा ।
इस तरह आप WhatsApp पर अपने family members, Friends और Relatives से जुड़ सकते हैं ।

रिसेट कैसे करें ?

आजकल android mobiles का use बहुत बढ गया है करोड़ो लोगो इसका उपयोग कर रहे हैं और लगातार यह संख्या बढती ही जा रही है ।
कई बार हम मोबाइल में कई तरह के features और app install कर लेते हैं जिससे Phone के system पर bad effect पड़ता है और मोबाइल की स्पीड slow हो जाती है और ये hang भी होने लगता है ।
फिर हम इसका उपाय ढूंढने लगते हैं कि मोबाइल को सही स्थिति में कैसे लाएं ।
इसका उपाय है कि मोबाइल के unusable apps को uninstall कर दिया जाए ।
लेकिन इसके बाद भी कुछ वायरस और फाइल मोबाइल मे रह जाते है ।
जिससे मोबाइल पूरी तरह से ठीक नही होता और कुछ प्रोब्लम रह जाती है ।
ऐसे में केवल एक रास्ता बचता है कि मोबाइल को रिसेट कर दिया जाए ।
यहां मैं आपको बताउंगा कि Android Mobile को कैसे Reset/Format करते हैं ?

Mobile Reset kaise kare


Android phone को Reset करने से कई फायदे होते हैं –
● मोबाइल पूरी तरह से फ्रेश हो जाएगा ।
● मोबाइल बिल्कुल अपनी नयी स्थिति में आ जाएगा ।
● मोबाइल से Virus हट जाएगा ।
● मोबाइल Hang नहीं होगा ।
इसके अलावा अगर आप मोबाइल किसी को बेच रहे हैं तो अपना मोबाइल Reset करने के बाद ही उसे बेचे ।
क्योंकि इसमे आपका जरूरी डाटा सेव होता है जिसका उपयोग करके कोई भी आपकी जानकारी का गलत उपयोग कर सकता है ।
इसलिए इसे बेचने से पहले अपना डाटा बेकअप लेकर किसी अन्य जगह सेव कर लें और इसे mobile Format कर दें जिससे मोबाइल से सारा डाटा delete हो जाए ।
(मोबाइल Reset करने पर आपका पूरा डाटा delete हो जाता है जैसे – Mobile memory, Music, Photos, Apps, Settings, No. & Messeges
इसलिए अपने जरूरी data का backup ले लें)
अपने मोबाइल को Reset करने के लिए नीचे दिए simple steps follow करें –
Step.1 – सबसे पहले मोबाइल ऑन करें और Settings में जाएं ।
Step.2 – इसके बाद मोबाइल Backup and Reset में जाएं ।
Step.3 – अब यहां Automatic Backup को Tick ✔ करें और Factory Data Reset पर click करें ।
Step.4 – अब Reset Device पर click करें दें ।
इसके बाद आपका Mobile Reset (Format) हो जाएगा ।
Reset होने के बाद मोबाइल बिल्कुल नयी स्थिति में आ जाएगा, पूरी तरह fresh
अब आप अपने मोबाइल को आसानी से Use कर सकते हैं और अब इसमे Hang होने की problem भी नहीं आयेगी ।

आईडिया सिम को आधार से वेरिफाई कैसे करें (Step by Step)

मोबाइल नंबर को अपने आधार कार्ड से लिंक कराना बहुत ही जरूरी हो गया है ।
अगर आप 31 मार्च 2018 से पहले अपना नंबर आधार कार्ड से लिंक और वेरिफिकेशन नही करवाते हैं तो आपका मोबाइल नंबर बंद हो जाएगा ।
इसलिए अगर आप अपने नंबर को चालू रखना चाहते हैं तो जल्दी से जल्दी अपना सिम को आधार कार्ड से वेरिफाई और लिंक करवाये ।


यहां मैं आपको बताउंगा कि आईडिया मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक कैसे करें ?

Verify SIM with Aadhaar


आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि मोबाइल को आधार से जोड़ने से क्या होगा ?
सरकार ने यह नियम सोच समझ के निकाला है इसे करने से कई फायदे होगें –
● कोई भी व्यक्ति आपकी जानकारी का गलत उपयोग करके सिम नहीं निकाल पाएगा क्योंकि इसमें आपका Biometric Finger लगेगा ।
● अगर कोई गलत दस्तावेज का उपयोग कर फर्जी मोबाइल नंबर उपयोग कर रहा है तो 31 मार्च के बाद वह सिम बंद हो जाएगी ।
● इससे फर्जी नंबर से होने वाले गलत उपयोग पर रोक लगेगी ।
इसलिए मोबाइल नंबर को वेरिफाई कराना बहुत जरूरी है ।


Idea Mobile Number Aadhaar Card se kaise link kare ?

यहाँ मैं आपको आधार वेरिफाई कराने के 2 तरीके बताउंगा ।
(1) Method :-

आवश्यक चीजें –
● आधार कार्ड
● वह नंबर जिसे वेरिफाई करना है ।
● वह मोबाइल नंबर जो आधार कार्ड बनाते समय लिंक हुआ था और जो आधार में Registered है ।
Steps –
● सबसे पहले जिस मोबाइल नंबर को वेरिफाई करना है उससे 14546 पर काॅल करें ।
● अब अपनी भाषा चुनें ।
● अब अपना 12 अंक का आधार नंबर डालें ।
● अब जो नंबर आपके आधार को बनाते समय लिंक हुआ था उस पर OTP प्राप्त होगा ।
● यह ओटीपी डालें ।
[ काॅल के समय पुष्टि करने के लिए 1 दबाएं ]
इसके बाद 24 घंटे बाद आपके नंबर पर एक Conformation SMS आएगा जिसका reply आपको 3 घंटे के अंदर करना होगा ।
Reply देकर Verification Confirm करने के लिए 12345 पर RV Y भेजें ।
अब आपका मोबाइल नंबर आधार कार्ड से Verify हो जाएगा ।
(2) Method :-
जरूरी चीजें –
● आधार कार्ड
● मोबाइल नंबर जिसे वेरिफाई करना है ।
● इसके अलावा वह व्यक्ति जिसका आधार कार्ड है ।

The Benefits of the Copy Stage of Making

In Learning in the Making: How to Plan, Execute, and Assess Powerful Makerspace Lessons, I propose a model for the stages of making.

I believe that the heart of making is creating new and unique things. I also realize that in order for this type of making to occur, there needs to be some scaffolding so that maker learners can develop a foundation of knowledge and skills. This post focuses on the Copy Stage of this model.

  • Copy – make something almost exactly as someone else has done.

In this age of information abundance, there really is an unlimited number of DIY resources, tutorials, Youtube videos, online instructors and instructions on making all kind of things. These resources provide a good beginning for acquiring some solid foundational skills and knowledge for learning how a make something one has never made before.

For a recent classroom activity, I wanted students to learn about and use Adafruit’s Circuit Playground. Some students made a Circuit Playground Dreidel (they learned about dreidels from an Orthodox Jewish student who was in my class and they loved it!) using the directions found at https://learn.adafruit.com/CPX-Mystery-Dreidel, and others made the Circuit Playground Scratch game with the directions found at https://learn.adafruit.com/adabot-operation-game/overview. I provided them with these directions and the expectation that the learners follow them pretty much on their own with me acting as an explainer and coach when they ran into difficulties. Here is a video of my learners enjoying their newly made dreidels.

The benefits of beginning maker activities with the Copy Stage includes:

  • Basic Skill Development and Acquisition
  • Foundational Skills for More Advanced and Creative Projects
  • Following Step-By-Step Directions
  • Positive Problem-Solving When Obstacles Occur
  • Asking for Help From Peers
  • A Sense of Accomplishment About Finishing a Project
  • Enjoying the Use of Finished Products They Made

There has been a fair amount of criticism leveraged against “paint-by-numbers” types of STEM and maker kits. This criticism revolves around the stifling of the creativity of learners. I contend that learners need foundational skills so that they can be freed up to be creative. Think about learning how to cook or play an instrument. The basic and foundational skills need to be there in order for the makers to go in directions that are new and creative for them. For example, I spent several decades as a ceramic artist, making wheel thrown and altered pottery. I needed to know how to throw a decent bowl before I could go in that direction (and yes, my pottery in this image began as wheel thrown cylinders).

कुमार गंधर्व द्वारा लिखित भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर

प्रश्न – लता जी की गायकी की क्या विशेषताएं है ?
उत्तर –
1 सुरीला पन
2 कोमलता और निर्मलता
3 मधुरता का संगम और शास्त्र शुद्धता
जो लता जी के  स्वर में पवित्रता तल्लीनता है किसी भी अन्य में ऐसी तल्लीनता नहीं है |
प्रश्न – कुमार गंधर्व ने लता को बेजोड़ गायिका क्यों कहा ?
उत्तर –
कुमार गंधर्व के अनुसार लता मंगेशकर भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ है | उनके मुकाबले खड़ी होने
वाली एक भी गायिका नजर नहीं आती उनसे पहले नूरजहां का सिक्का चलता था | परंतु लता ने
उन्हें बहुत पीछे छोड़ दिया | पिछले 50 वर्षों से वे गायिका के क्षेत्र में पूरी तरह छाई हुई है यद्यपि
इस लंबी अवधि में अनेक गायिकाएं उभरी किंतु लता का स्थान सदैव उनके ऊपर बना रहा 50
साल के बाद भी आज उनका स्वर पहले की तरह कोमल सुरीला मनभावन बना हुआ है | लता
बेजोड़ इसलिए भी है कि उनके गान में गानपन  पूरी तरह मौजूद है | शास्त्रीय संगीत से परिचित
होती हुई भी सुगम संगीत में गाती हैं | अपनेतथा अपने सुरीले पन और गूंज से सभी श्रोताओं को
सीधे प्रभावित करती हैं उनके गानों को सुनकर देश के आम गायकों और श्रोताओं की संगीत
अभिरुचि परिष्कृत हुई है |
प्रश्न – नाद में उच्चारण का क्या अर्थ है यह लता के गायन में किस प्रकार प्रकट हुआ है ?
उत्तर –
नाद में उपचार का अर्थ है उच्चारण में गूंज का होना |  लता के गायन में यह विशेषता है कि
उनकी एक शब्द की गूंज दूसरे शब्द की गूंज में इस तरह मिल जाती है कि दोनों एक दूसरे
में लीन हो जाते हैं | यह विशेषता केवल लता के स्वर में ही है |


प्रश्न – शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत में क्या अंतर है ?
उत्तर –
शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत दोनों का लक्ष्य आनंद प्रदान करना है |
फिर भी दोनों में बहुत अंतर है शास्त्रीय संगीत मे ताल का पूरा ध्यान रखा जाता है,
जबकि चित्रपट संगीत में आधे ताल का उपयोग होता है चित्रपट संगीत में गीत और
आघात को ज्यादा महत्व दिया जाता है | सुलभता तथा लोच को आद्र स्थान सुलभता
तथा लोच को अग्र स्थान दिया जाता है उसे शास्त्रीय संगीत की भी उत्तम जानकारी होना
आवश्यक है क्योंकि 3:30 मिनट के गाए हुए चित्रपट संगीत और खानदानी शास्त्रीय
संगीत की तीन-साढ़े 3 घंटे की महफिल का कलात्मक आनंद मूल्य एक ही है |

प्रश्न – कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर को बेजोड़ गायिका माना है क्यों ?
उत्तर –
क्योंकि लता मंगेशकर के मुकाबले में कोई भी गायिका नहीं है | नूरजहां अपने समय
की प्रसिद्ध चित्रपट संगीत की गायिका थी परंतु  लता की गायकी ने उसे पीछे छोड़
दिया लता जी पिछले 50 वर्षों से एक छत्र राज कायम किया हुआ इतने लंबे समय
के बावजूद उनके स्वर पहले की तरह कोमल सुरीला में मनभावन है |
इसके कई कारण है –
i) गायन में जो गान पन है वह किसी गायिका में नहीं मिलता |
ii) उच्चारण में शुद्धता वह नाद का संगम और भावों में जो निर्मलता
है अन्य गायिकाओं में नहीं है |
iii) एक तो लता जी की सुरीली आवाज ईश्वर की देन थी ऊपर से उन्होंने मेहनत
से उसे और निखार दिया |
iv) लता जी शास्त्रीय संगीत से परिचित है परंतु फिर भी सुगम संगीत में गाती
थी उनके गानों को सुनकर देश-विदेश में लोग दीवाने होते हैं उन्होंने आम व्यक्ति
की संगीत के प्रति अभिरुचि को परिष्कृत किया

– कुंई निर्माण से संबंधित निम्न शब्दों के बारे में जानकारी दें?

i) पालर पानी
यह पानी का एक रुप है यह पानी सीधे बरसात से मिलता है यह पानी नदियों तालाबों
कृत्रिम जिलों बड़े-बड़े गड्ढों में रुक जाता है | इस पानी को प्रयोग में नहीं लाया जा
सकता इस पानी का वाष्पीकरण जल्दी होता है काफी पानी जमीन के अंदर चला जाता
है और अधिकांश पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है |

ii) पाताल पानी
जो पानी भूमि में जाकर  भूजल में मिल जाता है उसे पताल पानी कहते हैं | इसे को पंप
ट्यूबवेलों आदि के द्वारा निकाला जाता है |

iii) रेजानी पानी
यह पानी धरातल से नीचे उतरता है परंतु धरातल में नहीं मिलता है | यह पार्लर पानी
और पताल पानी के बीच का है वर्षा की मात्रा नापने में इंच या सेंटीमीटर नहीं बल्कि
रेजा शब्द का उपयोग होता है | रेज का माप धरातल में समाई वर्षा को ना पता है |
रेजानी पानी खड़िया पट्टी के कारण पताली पानी से अलग बना रहता है तथा इसे कुइयो
के माध्यम से इकट्ठा किया जाता है |

निजी होते हुए भी सार्वजनिक क्षेत्र में कुइयो पर ग्राम समाज का अंकुश लगा रहता है लेखक ने ऐसा क्यों कहा ?

राजस्थान में खड़िया पत्थर की पट्टी पर ही कुइयो  का निर्माण किया जाता है | कुंई का
निर्माण गांव समाज की सार्वजनिक जमीन पर होता है | परंतु उसे बनाने और उसमें पानी
लाने का हक उसका अपना हक है | सार्वजनिक जमीन पर बरसने वाला पानी ही बाद में
वर्ष भर नमी की तरह सुरक्षित रहता है | इसी नमी से साल भर कुइयो में पानी भरता है
नमी की मात्रा वहां हो चुकी वर्षा से तय हो जाती है |

अतः उस क्षेत्र में हर  नई कुंई का अर्थ है पहले से तय नमी का बंटवारा इस कारण निजी
होते हुए भी सार्वजनिक क्षेत्र से में बनी कुइयो पर ग्राम समाज का अंकुश लगा रहता है |
यदि वह अंकुश ना हो तो लोग घर घर कई-कई कुईया बना ले और सब को पानी नहीं
मिलेगा बहुत जरूरत पड़ने पर समाज अपनी स्वीकृति देता है |


चेजारा के साथ गांव – समाज के व्यवहार मैं पहले की तुलना में आ ज क्या फर्क है पाठ के आधार पर बताइए ?

चेजारा अर्थात चिनाई करने वाला | कुंई  के निर्माण में यह लोग दक्ष होते हैं | इनका उस
समय विशेष ध्यान रखा जाता था | कुंई खोदने पर इन विदाई के समय तरह-तरह की भेंट
दी जाती थी इसके बाद भी उनका संबंध गांव से जुड़ा रहता था और पूरा वर्ष उन को
सम्मानित किया जाता था | फसल की कटाई के समय इन्हें अलग से फसल का हिस्सा
दिया जाता था तीज त्यौहार विवाह जैसे अवसरों पर उनका सम्मान किया जाता था |
इस प्रकार इनको भीग्रामीण समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलता था और
उनके कार्य को सराहा भी जाता था | वर्तमान समय में इनका सम्मान उतना नहीं रहा जितना
कि पहले था | उनको काम की मजदूरी देकर संबंध खत्म कर दिए जाते हैं | अब सिर्फ
मजदूरी देकर काम करवा लिया जाता है अब स्थिति पूर्णता बदल गई है |

राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं ? इसकी गहराई और व्यास तथा सामान्य कुओं की गहराई और व्यास में क्या अंतर है ?

राजस्थान में   रेत बहुत होती है | वर्षा का पानी रेत में समा जाता है जिस से नीचे की सतह
पर नमी फैल जाती है | यह नमी खड़िया मिट्टी की परत के ऊपर तक रहती है | इस नमी
क्यों पानी के रूप में बदलने के लिए 4 या 5 हाथ के व्यास की जगह को 30 से 60 हाथ
की गहराई तक खोदा जाता है | खुदाई के साथ-साथ चिनाई भी की जाती है | इस चिनाई
के बाद खड़िया की पट्टी पर रिस रिस कर कर पानी  इकट्ठा हो जाता है | इसी तंग गहरी
जगह को कई कहा जाता है यह कुएं का स्त्रीलिंग रूप है | यह कुएं से केवल व्यास में छोटी
होती है परंतु गहराई में लगभग समान ही होती है | आम कुए का व्यास 15 से 20 साल का
होता है हाथ का होता है , परंतु कुंई का व्यास चार या पांच हाथ का होता है | क्षेत्र के
आधार पर कुइयां की गहराई में अंतर आ जाता है |

आरोह प्रथम अध्याय गद्य भाग

प्रश्न – कहानी का कौन सा पात्र आपको सर्वाधिक प्रभावित करता है और क्यों?
उत्तर –
कहानी का नायक वंशीधर हमें सर्वाधिक प्रभावित करता है | वह इमानदार कर्तव्यपरायण
धर्मनिष्ठ व्यक्ति है | सके पिता उसे बेईमानी का पाठ पढ़ाते हैं घर की दयनीय दशा का
हवाला भी देते हैं परंतु वह इन सब के विपरीत ईमानदारी का व्यवहार करता है वह स्वाभिमानी
है | अदालत में उसके खिलाफ गलत फैसला लिया गया परंतु उसने स्वाभिमान नहीं खोया
उसकी नौकरी भी छीन ली गई परंतु उसकी चारित्रिक दृढ़ता हमें प्रभावित करती हैं |
आखिरकार पंडित अलोपीदीन भी उसकी इस दृढ़ता पर मुग्ध हो जाते हैं | उसे वह अपनी
सारी जायदाद का आजीवन मैनेजर बना देते हैं |


कहानी का दूसरा पात्र अलोपीदीन भी हमें प्रभावित करता है | पंडित अलोपीदीन मृदुभाषी
वाक्पटु और दूरदृष्टि का स्वामी है साधन संपन्न और समाज में प्रतिष्ठित है | जो गुण वंशीधर
में है वह पंडित अलोपीदीन में नहीं है | कहानी के अंत में अलोपीदीन सभी पाठकों के मन पर
अपनी एक अनूठी छाप छोड़ता है कि वह दरोगा मुंशी दर को अपने यहां पूरी जायदाद का
मैनेजर बनाकर और अलोपीदीन एक निपुण व्यवसाई भी है | भलीभांति समझने वाला अति
कुशल व्यापारी था मैं अपने सभी कार्य को येन केन प्रकारेण करवा लेता था| पकड़े जाने पर
भी उसने अदालत के माध्यम से अपनी रक्षा कर ली थी | रक्षा ही नहीं किया अपितु वंशीधर
को नौकरी से भी निकलवा दिया| लक्ष्मी का उपासक का और ईमानदारी का कायल था |
हमें कहानी में दो ही पात्र प्रभावित करते है |

प्रश्न – सत्यवादी होते हुए भी वंशीधर अकेले क्यों पड़ गए थे ?
उत्तर –
सत्यवादी होते हुए भी वंशीधर अदालत में बिल्कुल अकेले पड़ गए थे क्योंकि वह सत्यवादी
और कर्तव्यपरायण व्यक्ति थे | अदालत में सभी व्यक्ति किसी न किसी कारण अलोपीदीन के
एहसानों के तले दबे हुए थे | इन सभी ने उससे किसी न किसी प्रकार की कृपा दया अवश्य
प्राप्त की हुई थी | वह सब अलोपीदीन को बचाने में लगे हुए थे | अदालत में सत्य की शक्ति
रिश्वत के बोझ के तले दब के रह गई |

प्रश्न – नमक का दरोगा पाठ का प्रतिपाद्य बताइए ?
उत्तर –
नमक का दरोगा प्रेमचंद की बहुचर्चित कहानी है | जिसमें यथार्थवाद का एक मुकम्मल उदाहरण
है | यह कहानी धन के ऊपर धर्म की जीत है धन और धर्म को कर्म क्षेत्र सद्वृत्ति और असद
वृत्ति  बुराई और अच्छाई असत्य और सत्य कहा जा सकता है | कहानी में इन का प्रतिनिधित्व
क्रमशा पंडित अलोपीदीन और मुंशी वंशीधर नामक पात्रों ने किया है | ईमानदार कर्म योगी
मुंशी वंशीधर को खरीदने में असफल रहने के बाद पंडित अलोपीदीन अपने धन की महिमा
का उपयोग कर उन्हें नौकरी से हटवा देते हैं | लेकिन अंत में सत्य के आगे उनका सिर झुक
जाता है | अंत में सरकारी विभाग से बर्खास्त वंशीधर को बहुत उनके वेतन और भत्ते के साथ
अपनी सारी जायदाद का स्थाई मैनेजर नियुक्त करते हैं और गहरे अपराध से भरी हुई वाणी
से निवेदन करते हैं परमात्मा से यही प्रार्थना करता हूं कि आप को सदैव वही नदी के किनारे
वाला बेमुरौवत उद्दंड किंतु धर्मनिष्ठ दरोगा बनाए रखें |

कहानी के अंत में प्रसंग से पहले तक सभी घटनाएं प्रशासनिक  और न्यायिक व्यवस्था में
व्यापक भ्रष्टाचार तथा उस भ्रष्टाचार की व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता को अत्यंत  साहसिक
तरीके से उजागर करती है | ईमानदार व्यक्ति के अभिमन्यु के साथ निहत्थे और अकेले पड़ जाने
के यथार्थ तस्वीर भी मिलती है | प्रेमचंद इस संदेश पर कहानी को खत्म नहीं करना चाहते थे
क्योंकि उस दौर में भी मानते थे कि ऐसा यथार्थवाद  हमको निराशावादी बना देता है | मानव
चरित्र पर से हमारा विश्वास उठ जाता है हमको चारों तरफ बुराई ही बुराई नजर आने लगती
है इसलिए कहानी का अंत सत्य की जीत के साथ खत्म होता है | अंत में सच्चाई की जीत होती है |

मुख्य पात्र की विशेषताए
1 – वंशीधर                                                                                                             

– कर्तव्यनिष्                         
लालच नहीं करने वाला
कठोर तथा दृढ़ चरित्र
स्वाभिमानी
संवेदनशील
विचारवान
धर्म परायण
ईमानदार  


2 – अलोपीदीन
भ्रष्ट आचरण

धन का उपासक
प्रभावशाली व्यक्तित्व
व्यवहार कुशल तथा वाक्पटुता  
मानवीय गुणों का सम्मान करने वाला  


    Going On A STEM-Maker Journey WITH My Students

    Last semester, I worked with a few high school students to create a project for the New Mexico Governor’s STEM Challenge. Being a learner-centric, process-oriented educator (hence, the name of my blog – User Generated Education), I embraced the following practices during this project.

    • Learners selected and developed their problem statement and guiding question.
    • Learners naturally tapped into one another’s strengths, managing their strengths without any intervention from me. Some were good at problem conception, others at envisioning solutions, others at research, and still others at creating the graphics.
    • My role was that of resource provider and feedback provider. I shared and explained the challenge requirements, reviewed the qualities of valid websites, gave feedback on their research and written work, and provided them with materials and tools such as Arduinos.
    • Community resources were used reinforcing that communities contain experts – that teachers don’t have to be experts at everything. We visited the local makerspace so the learners could learn and use their 3d printers and laser cutter.
    • Given the nature of this project-based, problem-based format, grading was based strictly on class participation using the criteria of, “Worked on the project during class time.”

    Although, I often approach my classroom instruction using the practices as specified above, this one took me even farther from a place of knowing. They selected CO2 emissions and a chemistry-based solution of which I knew very little, so I was not a content expert. We learned about this together. I had a little experience with Arduinos but not lots so I was not a technology expert. We learned a lot more about how these worked together. We went on this journey together and I loved being a co-learner with my students.

    Here is a highlight video of their project:

    Much to my chagrin, they did not win an award (19 awards were given to the 43 entries). Their rewards, though, cannot be overstated:

    1. They learned some concrete and practical skills from going to the local makerspace, and getting instruction on their 3D printers and laser cutter. They also helped them work out some difficulties they had troubleshooting problems with the Arduino part of the project.
    2. They experienced the rewards and frustrations of working on a months long project including persistence, having a growth mindset, dealing with failure, and following through with a project through its completion.
    3. One of the students has pretty much checked out of school. She was mostly fully engaged throughout the duration of this project.

    Even though their excitement about attending and presenting their project was obvious during the hour long ride home as they spent that time brainstorming ideas for projects for next year’s Governor’s STEM Challenge.

    व्याकरण पत्र लेखन

    पत्र दो प्रकार के होते हैं – अनौपचारिक पत्र और औपचारिक पत्र |

    _________________________________________________________

    अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
    में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
    वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
    वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    – सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
    पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
    – बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
    जाता है |

    अभिवादन :
    – सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
    – अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
    होता है |

    समाप्ति :
    – मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
    होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
    – पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
    साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

    उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र – अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
    हुए पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय भाई !

    शुभ आशीर्वाद |
    कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
    में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
    के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
    प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
    सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
    खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

    इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
    मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
    जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
    बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
    है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
    आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
    जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
    करोगे |

    शुभकामनाओं सहित |

    तुम्हारी बहन,
    ममता

    _________________________________________________________

    सामाजिक पत्र – सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
    होता है |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
    दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
    अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे – संबंधियों
    आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
    प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

    प्रारंभ :
    निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
    प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

    समाप्ति :
    अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

    उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र – अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
    पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय अतुल,

    सस्नेह नमस्कार |

    अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
    प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

    ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
    वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
    तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
    और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
    और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
    पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
    रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
    लिए सबल देंगी |

    चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

    तुम्हारा अभिन्न मित्र
    सहदेव

    __________________________________________________________

    कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
    प्रारंभ :   
    – सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
    – जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
    पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

    पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
    – इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |
    प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
    – शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
    जाता है|
    विषय और शीर्षक :
    – पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
    और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
    – संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |
    संबोधन :
    – विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
    शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
    की विशेषता नहीं पड़ती |
    पत्र की मुख्य सामग्री :
    – संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
    – संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
    सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
    – दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
    के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि ……….. आदि |
    – एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
    – पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |
    पत्र का समापन :
    – विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
    कि आशा है |
    – आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
    – सधन्यवाद |
    अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

    पुनश्च :
    – यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
    उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
    पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

    उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र – हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
    ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
    चंडीगढ़ |
    पत्र संख्या – हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
    दिनांक – 15  जुलाई 2018

    प्रति,
    उपायुक्त,
    करनाल |
    विषय – करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    महोदय,

    हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
    कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

    राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
    लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
    उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
    क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
    आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
    की धनराशि भी दी जाए |

    इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
    बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
    टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
    आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
    सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
    अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
    ₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

    आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

    भवदीय,
    सचिव
    कृषि मंत्रालय,
    हरियाणा सरकार |

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    but it is too much for my strength — I sink under the weight of the splendour of these visions!

    I am alone, and feel the charm of existence in this spot, which was created for the bliss of souls like mine. I am so happy, my dear friend, so absorbed in the exquisite sense of mere tranquil existence, that I neglect my talents.

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    आरोह अध्याय दो काव्य भाग

    प्रश्न – मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती है यह रूप कैसा है ?
    उत्तर –   

    हम भक्ति को दो रूपों में देखते हैं सगुण भक्ति और निर्गुण भक्ति मीरा कृष्ण के सगुण

    रूप के उपासक थी | बचपन से ही कृष्ण भक्ति की भावना उनके अंदर जन्म ले चुकी थी
    वह श्री कृष्ण को ही अपना आराध्य मानती थी | मीरा के कृष्ण का रूप मन को मोहने
    वाला गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाला सिर के ऊपर मोर मुकट विराजमान श्री कृष्ण
    है | मीरा उन्हें अपने पति के रुप में देखती थी वह मीरा के लिए सर्वस्व है कृष्ण के
    अतिरिक्त मीरा संसार में किसी को भी अपना नहीं मानती वह स्वयं को उनकी दासी
    मानती हैं |

    प्रश्न – लोग मीरा को बावरी क्यों कहते हैं ?
    उत्तर –
    मीरा श्री कृष्ण  की भक्ति में अपनी सुध-बुध खो बैठी है | उसे किसी परंपरा या मर्यादा
    का कोई ध्यान नहीं है | कृष्ण भक्ति के लिए उसने अपना राजपरिवार भी छोड़ दिया
    विवाहिता होते हुए भी पांव में घुंघरू बांध कर कृष्ण की भक्ति में नाचती है | लोकलाज की
    चिंता किए बिना संतों के पास बैठी रहती है | भक्ति कि यह पराकाष्ठा बावले पन को
    दर्शाती है इसलिए लोग मीरा को बावरी कहते |


    प्रश्न – मीरा जगत को देखकर रोती क्यों है ?
    उत्तर –
    मीरा जगत  के स्वार्थी रूप को देखकर रो पड़ती है यह देखती है कि जीवन व्यर्थ ही
    जा रहा है | लोग संसारिक सुख दुख को असार मानते हैं जबकि उन्हें सच्चाई नहीं
    मालूम हु इस संसार में ही उलझे हुए हैं | लोग मीरा को बावरी कहते हैं मीरा संसार के
    लोगों को बावरा समझती है |


    प्रश्न – मीरा ने सहज मिले अविनाशी क्यों कहा है ?
    उत्तर –

    मीरा के अनुसार प्रभु अविनाशी हैं अर्थात अनश्वर हैं | उन्हें पाने के लिए मन में सहज

    भक्तिभाव की आवश्यकता है उन्हें पाने के लिए सच्चे मन से भक्ति करनी पड़ती है |
    इस भक्ति से प्रभु प्रसन्न होकर भक्तों को आसानी से मिल जाते है |

    व्याकरण पत्र लेखन

    अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
    में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
    वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
    वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    – सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
    पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
    – बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
    जाता है |

    अभिवादन :
    – सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
    – अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
    होता है |

    समाप्ति :
    – मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
    होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
    – पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
    साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

    उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र – अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
    हुए पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय भाई !

    शुभ आशीर्वाद |
    कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
    में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
    के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
    प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
    सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
    खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

    इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
    मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
    जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
    बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
    है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
    आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
    जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
    करोगे |

    शुभकामनाओं सहित |

    तुम्हारी बहन,
    ममता

    _________________________________________________________

    सामाजिक पत्र – सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
    होता है |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
    दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
    अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे – संबंधियों
    आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
    प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

    प्रारंभ :
    निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
    प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

    समाप्ति :
    अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

    उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र – अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
    पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय अतुल,

    सस्नेह नमस्कार |

    अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
    प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

    ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
    वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
    तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
    और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
    और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
    पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
    रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
    लिए सबल देंगी |

    चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

    तुम्हारा अभिन्न मित्र
    सहदेव

    __________________________________________________________

    कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
    प्रारंभ :   
    – सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
    – जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
    पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

    पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
    – इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |
    प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
    – शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
    जाता है|
    विषय और शीर्षक :
    – पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
    और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
    – संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |
    संबोधन :
    – विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
    शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
    की विशेषता नहीं पड़ती |
    पत्र की मुख्य सामग्री :
    – संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
    – संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
    सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
    – दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
    के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि ……….. आदि |
    – एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
    – पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |
    पत्र का समापन :
    – विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
    कि आशा है |
    – आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
    – सधन्यवाद |
    अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

    पुनश्च :
    – यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
    उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
    पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

    उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र – हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
    ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
    चंडीगढ़ |
    पत्र संख्या – हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
    दिनांक – 15  जुलाई 2018

    प्रति,
    उपायुक्त,
    करनाल |
    विषय – करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    महोदय,

    हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
    कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

    राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
    लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
    उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
    क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
    आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
    की धनराशि भी दी जाए |

    इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
    बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
    टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
    आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
    सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
    अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
    ₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

    आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

    भवदीय,
    सचिव
    कृषि मंत्रालय,

    व्याकरण रिपोर्ट / प्रतिवेदन

    रिपोर्ट शब्द अंग्रेजी से हिंदी में लिया गया है | यह पत्रकारिता से संबंधित है रिपोर्ट शब्द का अर्थ
    है | घटना की ठीक-ठीक सूचना सूचना देने या संवाद भेजने के कार्य को रिपोर्टिंग भी कहा जाता है |

    प्रतिवेदन को अंग्रेजी में रिपोर्ट या रिपोर्टिंग कहते हैं | यह एक प्रकार का लिखित विवरण होता है |
    जिसमें किसी संस्था सभा वन विभाग या विशेष आयोजन की तथ्यात्मक जानकारी दी जाती है |
    प्रतिवेदन कई प्रकार के होते हैं | अर्थात इन्हें कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
    – सभा, गोष्ठी या किसी सम्मेलन का प्रतिवेदन
    – संस्था का वार्षिक / मासिक प्रतिवेदन
    – व्यवसाय की प्रगति या स्थिति का प्रतिवेदन
    – जांच समिति द्वारा प्रतिवेदन

    प्रतिवेदन अर्थात रिपोर्ट लेखन के तत्व :
    1. तथ्यपरकता : रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित होती है यह किसीछोटी  घटना पर भी हो सकती है
    या बड़ी घटना पर भी |  जब तक रिपोर्टर तथ्यों को पाठकों के सामने नहीं लगता वह रिपोर्ट नहीं
    होती | इस में आंकड़ों तथा तथ्यों की जरूरत होती है |

    2. प्रत्यक्ष अनुभव : रिपोर्ट लेखन प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होता है| रिपोर्टर घटनास्थल पर
    पहुंच कर घटना का जायजा लेता है | वह तथ्य एकत्रित करता है | तथा आसपास के माहौल की
    जांच करता है | प्रत्यक्ष अनुभव के बिना रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती |

    3. संक्षिप्तता : रिपोर्ट में संक्षिप्तता का गुण आवश्यक है यदि किसी घटना का विवरण बढ़ा
    चढ़ाकर किया जाता है तो वह निराश हो जाती है | पाठक को सिर्फ वोट को पड़ता है | जिसमें
    कम शपथ और अधिक जानकारी हो बड़ी रिपोर्ट जो उबाऊ हो जाती है |

    4. रोचकता क्रमबद्धता : रिपोर्ट में रोचकता और क्रमबद्धता जरूरी है यदि घटना को सिलसिलेवार
    वर्णन प्रस्तुत किया जाए सुविचारों की तारतम्यता टूटती है | इससे तथ्य  गड़बड़हो जाते हैं |
    इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में रोचकता होनी चाहिए | रिपोर्ट की शैली रोचक होनी चाहिए |

    रिपोर्ट के गुण :
    – रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट और पूर्ण होनी चाहिए |
    – भाषा में अलंकार और मुहावरेदार नहीं होनी चाहिए| किसी भी वाक्य का एक से अधिक अर्थ
    नहीं निकलना चाहिए |
    – केवल महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश होना चाहिए |
    – प्रतिवेदन का एक शीर्षक भी होना चाहिए |
    – सभी तथ्य सत्य प्रमाणित और विश्वसनीय होने चाहिए |
    – प्रतिवेदन के अंत पर अर्थात रिपोर्ट के अंतर पर सभा दल संस्था के अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी
    होने चाहिए |

    रिपोर्ट के 2 उदाहरण देखिए :

    1. बस स्टैंड पर हुए बम विस्फोट के आप प्रत्यक्षदर्शी हैं इसकी एक रिपोर्ट तैयार कीजिए |
                               बस स्टैंड में बम विस्फोट
    आज 5 अगस्त को प्रातः सुबह 8:00 बजे भीड़-भाड़ से भरे अति व्यस्त बस स्टैंड में बम विस्फोट
    हुआ | विस्फोट का जोरदार धमाका दूर दूर तक सुनाई दिया | उसके कारण उत्पन्न काला धुआं
    आकाश में देर तक छाया रहा | इससे 4 लोग घायल हो गए लेकिन किसी के जीवन की क्षति
    नहीं हुई विस्फोट के कारण कुछ खिड़कियों के शीशे टूट गए | उपस्थित सभी लोगों में भगदड़ मच
    गई और उससे हल्की चोटें भी आई पुलिस ने तत्काल विस्फोट स्थल को घेर लिया | वह कारणों
    की जानकारी प्राप्त कर रही है | विस्फोटक साइकिल के पीछे रखे थैले में विस्फोटक सामग्री के
    कारण हुआ | इस फोटो के पीछे आंतकवादियों का हाथ हो सकता है |  

    2.
                        सिलेंडर बदलने के दिन खत्म, सीधे रसोई में पहुंचेगी गैस पाइप
    अमेरिका जापान और ब्रिटेन जैसे विकसित राष्ट्रों को छोड़ दीजिए | पाकिस्तान तक की गृहिणियां
    कम से कम एक मामले में भारतीय गृहिणियों के सामने इतरा सकती हैं | उक्त देशों सहित विश्व
    के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में अब पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस सीधे
    रसोईघर पहुंचाई जा  रही हैं | अब भारत सरकार ने भी भारतीयों  गृहिणियों को सिलेंडर बदलने
    के झंझट से मुक्ति देने के लिए सीधा रसोई घर तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय नीति लागू करने
    का फैसला किया है | पहले चरण में लगभग दो दर्जन शहरों में लागू किया जाएगा| उनमें उत्तर
    प्रदेश के भी पांच शहर है लखनऊ,  कानपुर, बरेली, आगरा, नोएडा |


    इसके अलावा महाराष्ट्र  के मुंबई के आसपास के शहर में नवी मुंबई | गुजरात में सूरत,
    अहमदाबाद, बड़ौदा को शामिल  किया जा सकता जा रहा है | कीमत निर्धारण पेट्रोलियम
    नियामक बोर्ड ही करेगा | योग्यता के आधार पर प्रवेश की अनुमति मिलेगी | बहुत संभव है कि
    जिस तरह से आधारित सिटी परिवहन व्यवस्था लागू की जा रही है उसी तर्ज पर घरों तक रसोई
    गैस पहुंचाने की  भी व्यवस्था की जाए | इस समय दिल्ली और उसके आसपास के कुछ इलाकों
    में इस तरह की योजना लागू की गई है | लेकिन पहली बार सरकार इस बारे में एक नीति बनाकर
    आगे का रास्ता खोलना चाहती हैं | पहले चरण की सफलता के बाद इसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू
    किया जाएगा | सबसे पहले तो उन्हें सिलेंडर में गैस का सिर दर्द खत्म होगा बेवक्त बेवक्त गैस
    खत्म होने की टेंशन भी नहीं रहेगी |

    यदि मैं पुलिस अधिकारी होता

    प्रस्तावना : वह क्या बनना चाहता है ? यह प्रश्न शैशवकाल से ही हर व्यक्ति के मन में उभर आता  है। मेरे मन रूपी आकाश में भी ऐसे ही प्रश्नों ने खूब चक्कर काटे हैं। मैंने तभी से पुलिस अधिकारी बनने का निश्चय कर लिया था। उसका रौबदार चेहरा और शानदार वर्दी हमेशा आकर्षित करती रहती थी; पर इंसान की सभी इच्छाएँ तो कभी पूर्ण नहीं हो पाती है। उनकी पूर्ति में कोई न कोई बाधा अवश्य आ जाती है। फिर मैं ठहरा एक व्यापारी का बेटा । मेरे भाग्य में तो पैतृकं व्यवसाय ही लिखा है। परिवार के हर सदस्य ने बार-बार यही मंत्र फूका है। मैं भी यही सोचता हूँ कि यदि उन सब की बात को ठुकरा कर यदि मैं पुलिस अधिकारी बन भी गया, तो समाज की सेवा में मेरा क्या योगदान रहेगा।
    वर्तमान समाज की दृष्टि में : आज के समाज में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को हेय दृष्टि से देखा जाता है। इन लोगों को समाज के रक्षक के स्थान पर भक्षक माना जाता है। प्रायः देखा गया है कि भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अपनी जेबें गरम करके असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देते पाए गए हैं। चोरी करना और डकैती डलवाना ही मानो इनका काम रह गया है। निर्दोष इनकी हवालात की सैर करते हैं और गुण्डे बेधड़क घूमते हैं। पैसे के आगे माँ बेटी की इज्जत भी तुच्छ समझी जाती है। इसीलिए अधिकांश लोग इन्हें वर्दीधारी गुंडों की संज्ञा देते हैं।
    यदि पुलिस अधिकारी बनता : यदि मेरी इच्छा पूर्ण हो जाती। और मुझे पुलिस अधिकारी की वर्दी मिल जाती, तो मैं समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाता। मैं अपने क्षेत्र से गुण्डों का सफाया कर देता। इस अभियान में मैं अपनी जान की भी प्रवाह नहीं करता। असामाजिक तत्त्व मुझसे सदा ही भयभीत रहते। मैं अपराधियों को कभी भी माफ नहीं करता और उनके कुकृत्यों का दंड दिलवा कर ही पीछा छोड़ता।
    यदि मैं पुलिस अधिकारी बनता, तो कदापि घूस नहीं लेता। जबकि आजकल पुलिस स्टेशन में बापू के चित्र के नीचे ही उनके आदर्शों को भुलाकर जेबें गरम की जाती हैं। निर्धन और दु:खी लोगों को बेवकूफ समझा जाता है तथा पलिस अधिकारी उनकी बात नहीं। सुनते। मैं सबसे पहले असहाय और निर्धन लोगों की शिकायतें सुनता तथा उन्हें दूर करने का भरसक प्रयास करता।
    पुलिस का आतंक : उत्तर प्रदेश तथा बिहार जैसे राज्यों में पुलिस का आतंक दिन-दिन बढ़ता जा रहा है। मेरठ का माया त्यागी कापट पलिस की पाशविकता की अमिट गाथा बन गया है। बिहार की ग्रामीण महिलाओं का सामूहिक रूप से शील भंग करना पुलिस का जन्मसिद्ध अधिकार बन गया है। हाल ही में बनारस में निर्दोषों की तोड़ी गईं अस्थियाँ और उनके हथकरघे पुलिस की पाशविकता की कहानी कह रहे हैं। इतना ही नहीं, इनकी माँग की पूर्ति न करने पर निर्दोषों को पीट-पीट कर यमलोक पहुँचा दिया जाता है। घरों को लुटवाकर आग लगवा दी जाती है।
    उपसंहार : आज के युग में जनता भी उन्हें पसंद नहीं करती। उनकी गिद्ध दृष्टि के आगे अपने को असहाय समझती है; लेकिन मैं । पुलिस अधिकारी बनकर ऐसा नहीं होने देता। मैं महिला समाज को पूरा सम्मान दिलाता। अभद्र व्यवहार करने वालों को दण्डित करता। बनावटी मुठभेड़ों में निर्दोषों की हत्या नहीं करने देता। अपराधियों के लिए साक्षात् यमदूत बन जाता। इस तरह मैं स्वयं अन्य पुलिस अधिकारियों के लिए आदर्श बन जाता।

    कहां और कब करना चाहिए ?

    वर्तमान समय में कई लोगो ने blogging को अपना career बना लिया है और पूरी तरह से ब्लॉगिंग पर फोकस कर रहे हैं ।
    काम चाहे कुछ भी हो लेकिन चीज में कहीं न कहीं कुछ Investment करना पड़ता है ।
    Blogging में भी कुछ चीजों मे निवेश जरूरी है जो आपको और आपके ब्लॉग को successful बना देगा ।
    यहां मैं आपको बताऊंगा की Blog में कहां और कब invest करना चाहिए और कहां नहीं ।
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    Blogging Me Kha invest Kare

    1. Domain & Hosting – सबसे पहले हमें Domain और Hosting में ही invest करना होता है ।
    आपका डोमेन ही आपका ब्रांड नेम है, यही आपकी पहचान बनेगा
    इसलिए अपने ब्लॉग के हिसाब से परफेक्ट डोमेन सिलेक्ट करें ।
    आप अपने ब्लॉग के niche के according domain name select करे ।
    अपने ब्लॉग के लिए सही Hosting भी select करें जहां आपको सभी important features मिल जाएं ।
    जिससे बाद में कोई problem न हो ।
    2. Design – हर Blog के लिए एक Perfect Design बहुत important होता है क्योंकि यही आपके ब्लॉग को Professional look देता है ।
    Blog के लिए सही Theme का चयन कर लें Theme select करते समय हर चीज पर ध्यान करें और Perfect Theme में invest करें ।
    क्योंकि अगर बाद में Design में किसी तरह की कमी आये तो आप दोबारा कोई दूसरी Theme select करेगे
    इससे आपके कुछ पैसे भी वेस्ट हो जाएगे और बार बार Theme change करने से blog पर भी bad SEO effect पड़ सकता है ।
    आप अपनी पसंद अनुसार best Theme बनवाने के लिए Developer से भी Contact कर सकते हैं ।
    3. Tutorials – आप Blogging, SEO, Marketing आदि सीखने के लिए Online Tutorials, Videos, ebooks में भी invest कर सकते हैं ।
    इससे आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा और आप सही तरीके से Blogging कर पाएगे ।
    4. SEO tools – आप Keywords Research, SEO analyse आदि के लिए SEO tools में भी invest कर सकते हैं ।
    Invest करने से पहले एक बार Free trial भी ले सकते हैं जिससे आपको Tool की Working और Quality के बारे मे भी पता चलेगा ।
    अगर आपकी Brand Website है तो आप SEO Expert की मदद ले सकते है लेकिन अगर आपका Blog है तो आपको खुद ही SEO करना चाहिए ।
    क्योंकि इससे आप खुद भी SEO techniques को सीख लेगे जो हर ब्लॉगर के लिए जरूरी है ।
    इसलिए शुरुआत मे चाहे तो आप किसी Expert की help ले सकते हैं लेकिन आपको खुद भी SEO पर ध्यान देना होगा ।
    आप इसके लिए SEO tools और Tutorials की मदद ले सकते हैं ।

    Other post : How to Stay Calm During Exam 

    5. Giveways – आजकल बहुत सी sites Giveways करके यूजर्स को attract करती हैं ।
    Giveways की मदद से आप कम बजट में ही अधिक Audience तक अपनी पहुंच बना सकते हैं।
    जैसे अगर आपका blog SEO से related है तो आप Giveways price में winner को SEO pdf, SEO tools या premium theme दे सकते हैं ।
    आपको Giveways का अधिक से अधिक promotion करना होगा जिससे इसे ज्यादा Audience join करे और आपका Blog अधिक famous हो ।
    लेकिन एक बात याद रखे जब आपका ब्लॉग audience के सामने लाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो तभी Giveways का use करें ।
    Because “First impressions is the last impression”

    6. Perfect Team – जब ब्लॉग अधिक famous हो जाता है तो इसे manage करना भी थोड़ा कठिन हो जाता है और इसमे अधिक समय भी लगता है ।
    ऐसे में आप अपनी Team create कर सकते है जिसके साथ मिलकर आप अपने ब्लॉग को एक नई दिशा दे सकते हैं ।
    इससे आप blog को आसानी से manage कर पाएगे ।
    आप अपनी Team में Content Creators, SEO experts, Developer, Marketing manager आदि लोगो को जोड़ सकते हैं ।
    Content creators का मतलब यहां केवल content Writers से नहीं बल्कि हर तरह के content से है
    Images, Videos आदि भी कंटेंट का ही हिस्सा है ।
    इनमे Videos creators & editors, Infographics maker भी आते हैं ।
    एक Perfect team के साथ मिलकर काम करने से आपकी कई मुश्किलें कम हो जाती है और बडे बडे काम भी आसन हो जाते हैं ।
    Final words : मैं आपसे यही कहूंगा कि कही भी Investment करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर ले ।
    बिना किसी जानकारी किसी भी चीज मे Invest न करें
    हर चीज मे जरूरत और बजट के हिसाब से ही Invest करें ।

    चेजारा के साथ गांव – समाज के व्यवहार मैं पहले की तुलना में आ ज क्या फर्क है पाठ के आधार पर बताइए ?

    चेजारा अर्थात चिनाई करने वाला | कुंई  के निर्माण में यह लोग दक्ष होते हैं | इनका उस
    समय विशेष ध्यान रखा जाता था | कुंई खोदने पर इन विदाई के समय तरह-तरह की भेंट
    दी जाती थी इसके बाद भी उनका संबंध गांव से जुड़ा रहता था और पूरा वर्ष उन को
    सम्मानित किया जाता था | फसल की कटाई के समय इन्हें अलग से फसल का हिस्सा
    दिया जाता था तीज त्यौहार विवाह जैसे अवसरों पर उनका सम्मान किया जाता था |
    इस प्रकार इनको भीग्रामीण समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलता था और
    उनके कार्य को सराहा भी जाता था | वर्तमान समय में इनका सम्मान उतना नहीं रहा जितना
    कि पहले था | उनको काम की मजदूरी देकर संबंध खत्म कर दिए जाते हैं | अब सिर्फ
    मजदूरी देकर काम करवा लिया जाता है अब स्थिति पूर्णता बदल गई है |

    व्याकरण पत्र लेखन

    अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
    में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
    वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
    वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    – सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
    पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
    – बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
    जाता है |

    अभिवादन :
    – सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
    – अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
    होता है |

    समाप्ति :
    – मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
    होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
    – पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
    साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

    उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र – अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
    हुए पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय भाई !

    शुभ आशीर्वाद |
    कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
    में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
    के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
    प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
    सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
    खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

    इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
    मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
    जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
    बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
    है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
    आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
    जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
    करोगे |

    शुभकामनाओं सहित |

    तुम्हारी बहन,
    ममता

    _________________________________________________________

    सामाजिक पत्र – सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
    होता है |

    लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
    घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
    दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
    अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे – संबंधियों
    आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
    प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

    प्रारंभ :
    निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
    प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

    समाप्ति :
    अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

    उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र – अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
    पत्र लिखिए |

    परीक्षा भवन
    क ख ग
    10 सितंबर 2018

    प्रिय अतुल,

    सस्नेह नमस्कार |

    अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
    प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

    ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
    वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
    तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
    और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
    और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
    पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
    रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
    लिए सबल देंगी |

    चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

    तुम्हारा अभिन्न मित्र
    सहदेव

    __________________________________________________________

    कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
    प्रारंभ :   
    – सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
    – जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
    पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

    पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
    – इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |
    प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
    – शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
    जाता है|
    विषय और शीर्षक :
    – पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
    और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
    – संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |
    संबोधन :
    – विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
    शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
    की विशेषता नहीं पड़ती |
    पत्र की मुख्य सामग्री :
    – संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
    – संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
    सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
    – दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
    के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि ……….. आदि |
    – एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
    – पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |
    पत्र का समापन :
    – विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
    कि आशा है |
    – आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
    – सधन्यवाद |
    अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

    पुनश्च :
    – यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
    उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
    पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

    उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र – हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
    ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
    चंडीगढ़ |
    पत्र संख्या – हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
    दिनांक – 15  जुलाई 2018

    प्रति,
    उपायुक्त,
    करनाल |
    विषय – करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

    महोदय,

    हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
    कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

    राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
    लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
    उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
    क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
    आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
    की धनराशि भी दी जाए |

    इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
    बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
    टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
    आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
    सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
    अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
    ₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

    आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

    भवदीय,
    सचिव
    कृषि मंत्रालय,

    आरोह अध्याय दो गद्य भाग

    प्रश्न – मियां नसीरुद्दीन नानबाईयों  का मसीहा क्यों कहा जाता था?
    उत्तर –
    मियां नसीरुद्दीन कोई साधारण नानबाई नहींहै | वह खानदानी नानबाई हैं | उनके पास 56
    प्रकार की रोटियां बनाने का हुनर है | तुनकी और रुमाली जैसी महीन रोटियां बनाना जानते
    हैं | वह रोटी बनाने  को एक कला मानते हैं | वह अन्य नानबाईयों के मुकाबले में स्वयं को
    श्रेष्ठ इसलिए मानते हैं क्योंकि नानबाई का प्रशिक्षण अपने परिवार की परंपरा से प्राप्त
    किया | उनके पिता बरकत शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से प्रसिद्ध थे|और उनके बुजुर्ग
    दादा भी यही काम करते थे|वह बादशाह को नई-नई चीजें बनाकर खिलाते थे और उनकी
    प्रशंसा प्राप्त करते थे  मियां नसीरुद्दीन स्वयं 56 प्रकार की रोटियां बनाने के लिए प्रसिद्ध
    थे | इसलिए उन्हें नानबाई का मसीहा कहा जाता था |
    प्रश्न – लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास क्यों गई थी ?
    उत्तर –
    लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास इसलिए गई थी ताकि वे रोटी बनाने की कारीगरी को
    जानने तथा उसेप्रकाशित करने के उद्देश्य से उनके पास गई थी | पत्रकार की हैसियत से
    वहां गई थी उसने पूछा तो पता चला की यह खानदानी नानबाई मियां नसरुद्दीन की दुकान
    है | जो कि 56 प्रकार की रोटियां बना लेते हैं | उनकी कारीगरी के रहस्य को जानने के
    लिए उनके पास जाती हैं और उनको अलग-अलग तरह की रोटियां बनाने का प्रशिक्षण
    कहां से मिला यह सारे सवालात पूछती हैं |
    प्रश्न – बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों से मियां नसरुद्दीन की
    दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
    उत्तर –
    लेखिका ने जब मियां नसीरुद्दीन से उनके खानदानी नानबाई होने का रहस्य पूछा तो उन्होंने
    बताया कि उनके पिता शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से और दादा आला नानबाई के
    नाम से प्रसिद्ध थे|उनके बुजुर्ग बादशाह के लिए भी रोटियां बनाते थे | एक बार बादशाह ने
    उनके बुजुर्गों को ऐसी चीज बनाना बनाकर खिलाने के लिए कहा जो नाग से पक्के न पानी
    से बने उन्होंने ऐसी चीज बादशाह को बनाकर खिलाई और बादशाह भी कि जब लेखिका
    ने बादशाह का नाम पूछा तो वह नाराज हो गए | क्योंकि उन्हें बादशाह का नाम स्मरण ही
    नहीं था | बादशाह का  बावर्ची होने की बात उन्होंने अपने परिवार की बड़ाई करने के लिए
    गई थी | बादशाह का प्रसंग आती है बेरुखी दिखाने लग गए |
    प्रश्न – पाठ में मियां नसरुद्दीन का शब्द चित्र लेखिका ने कैसे खींचा
    उत्तर –
    लेखिका के अनुसार मियां नसरुद्दीन 70 वर्ष के हैं| वह चारपाई पर बैठे हुए बीड़ी का मजा
    ले रहे थे | मौसम की मार से उनका चेहरा  पक गया है | उनकी आंखों में काइयां भोलापन
    परेशानी पर मंजू हुए कारीगर के तेवर थे | अखबार वाले उन्हें निठल्ले लगते हैं और वह 56
    प्रकार की रोटियां बनाने में प्रसिद्ध भी हैं उन्होंने नाम भाइयों का परीक्षा प्रशिक्षण उन्होंने
    अपने पिता से लिया था जब बात उनके हाथ से निकल जाए तो वह खीज भी जाते थे |
    और पलट कर जवाब नहीं देते थे बात को पलट भी देते थे |

    आरोह अध्याय तीसरा गद्य भाग

    प्रश्न – पथेर पांचाली फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला ?
    उत्तर –
    पथेर पांचाली फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक इसलिए चला इसके कई कारण थे |
    1. इस फिल्म के फिल्मकार  सत्यजीत राय के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे | पैसे खत्म होने के
    बाद फिर से पैसे जमा होने तक  शूटिंग स्थगित रखनी पड़ती थी |
    2. फिल्मकार स्वयं एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करते थे और उसे नौकरी के काम से जब
    फुर्सत मिलती थी तब शूटिंग होती थी |
    3. बीचों-बीच पात्रों स्थानों दृश्य आदि की भी समस्याएं आ जाती थी |
    4. बारिश धूप अंधेरा प्रकाश उसकी भी समस्या आ जाती थी |
    5. आसपास  भीड़ वाले लोगों के कारण उत्पन्न समस्याएं | जैसे सुबोध दा, धोबी की समस्या,
    कुत्ते का मर जाना और एक पात्र मिठाई वाला मर जाता है | उसकी जगह पर वैसा ही मिलते
    जुलते आदमी की तलाश करने के कारण भी शूटिंग कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी |
    6. स्थान से संबंधित समस्याएं जैसे काश के फूल का नष्ट हो जाना कमरे में सांप निकल
    आना फिर से फूलों के लिए पूरा साल इंतजार करना |

    प्रश्न – किन दो  दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब
    अपनाई गई है ?
    उत्तर –
    प्रथम दृश्य इस दृश्य में भूलो नामक कुत्ते को  अप्पू की मां द्वारा गमले में भात खाते हुए
    चित्रित करना था | परंतु पैसे खत्म होने के कारण यह दृश्य चित्रित ना हो सका 6 महीने
    के बाद लेखक पुनः उस स्थान पर गया तब तक कुत्ते की मौत हो चुकी थी | काफी प्रयास
    के बाद उसे मिलता जुलता कुत्ता मिला और उसे भात खाते हुए उस दृश्य को पूरा किया गया |
    यह दृश्य इतना स्वभाविक था कि कोई भी दर्शक उसे पहचान नहीं पाया कि कुत्ता बदला हुआ
    है |
    दूसरा दृश्य  इस दृश्य में श्रीनिवास नामक व्यक्ति मिठाई वाले की भूमिका निभा रहा था |
    बीच में शूटिंग रोकनी पड़ी दोबारा उस स्थान पर जाने से पता चला कि उस व्यक्ति का देहांत
    हो चुका है  | लेखक ने मिलते-जुलते व्यक्ति को लेकर बाकी दृश्य फिल्म आया | पहला
    श्रीनिवास आसमान से बाहर आता है और दूसरा श्रीनिवास कमरे की ओर पीठ करके मुखर्जी
    के घर के गेट के अंदर जाता है |  इस प्रकार इस दृश्य में भी दर्शक अलग-अलग कलाकार
    को पहचान नहीं पाए |

    फिल्मकार ने बताया कि पथेर पांचाली फिल्म का निर्माण करते समय अनेक समस्याओं का
    सामना करना पड़ा | उदाहरणस्वरूप तीसरा दृश्य फिल्म की शूटिंग में रेलगाड़ी पर अनेक 
    दृश्य दर्शाए गए किंतु जहां शूटिंग हो रही थी | गांव में रेलगाड़ी इतनी देर तक नहीं रूकती थी
    सभी दृश्य नहीं फिल्माए जाते | नई तरकीब अपनाई गई वहां से निकलने वाली अलग-अलग
    तीन रेलगाड़ियों पर दृश्य फिल्माए गए और फिर उन्हें आपस में जोड़ दिया गया | इस प्रकार
    तीन रेलगाड़ियों का दृश्य फिल्म आने पर भी दर्शक रेलगाड़ी को नहीं पहचान पाए |


    प्रश्न – भूलो की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया उसने फिल्म के किस दृश्य को पूरा
    किया ?
    उत्तर –
    भूलो कुत्ते की मृत्यु हो जाने के कारण दूसरा कुत्ता लाया गया | फिल्म में दृश्य इस प्रकार था
    कि अप्पू की मां सर्व जया पप्पू को भात खिला रही थी और वह अपने तीर कमान से खेलने के
    लिए उतावला है | पप्पू   भात खाते-खाते कमान से तीर छोड़ता है और उसे लाने के लिए भाग
    जाता है | उसकी मां सर्व जया उसे भात खिलाने के लिए उसके पीछे दौड़ती है | भूलो कुत्ता
    वहीं खड़ा सब कुछ देख रहा है | उसका सारा ध्यान भात की थाली की ओर है और यह सारा
    दृश्य भूलो कुत्ते पर ही दर्शाया गया है |  इसके बाद दृश्य में अप्पू की मां बचा हुआ भात गमले
    में डाल देती है और यह बात भूलो कुत्ता का जाता है | यह दृश्य दूसरे कुत्ते से पूरा किया गया
    क्योंकि भूलो कुत्ता मर चुका था |

    प्रश्न – बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल है और उसका समाधान किस
    प्रकार हुआ ?
    उत्तर –
    फिल्मकार के पास पैसे का भाव था | अतः बारिश के दिनों में शूटिंग नहीं कर सके | जब
    उनके पास पैसा आया तो अक्टूबर का महीना शुरु हो चुका था | बरसात के दिन समाप्त
    हो चुके थे | शरद ऋतु में बारिश होना भाग्य पर निर्भर था | लेखक हर रोज अपनी टीम
    लेकर गांव में जाकर बैठ जाते थे | बादलों की ओर टकटकी लगाकर देखते रहते थे कि
    आज बारिश आएगी लेकिन बारिश नहीं आती | परंतु अचानक बदल छा  जाते थे और
    धुआंधार बारिश होने लगती थी इस तरह जो बारिश का दृश्य फिल्माया गया | इतना
    अवश्य हुआ कि बेमौसमी बरसात में भीगने के कारण अप्पू और दुर्गा दोनों बच्चों को
    ठंड लग गई |

    प्रश्न – किसी फिल्म की शूटिंग करते समय फिल्मकार को जिन समस्याओं का सामना
    करना पड़ता है उन्हें सूचीबद्ध कीजिए ?
    उत्तर –
    1. फिल्म बनाने के लिए बहुत सारे धन की आवश्यकता पड़ती है कई बार फिल्म पर
    अनुमान से भी अधिक खर्च हो जाता है |
    2. कलाकारों के कलाकारों का चयन करते समय बहुत सी बातो का ध्यान रखना
    पड़ता है |
    3. कई बार फिल्मकार को फिल्म की कहानी के अनुसार पात्र ही नहीं मिल पाते |
    4. फिल्म में काम करने वाले कलाकारों में से किसी एक की अचानक मृत्यु भी
    फिल्म की शूटिंग के लिए समस्या बन जाती है |
    5. स्थानीय लोगों का हस्तक्षेप व सहयोग भी कई बार फिल्मकार को अपनी फिल्म
    की शूटिंग किसी पिछड़े गांव में जाकर करनी होती है | जहां उन्हें गांव वालों का सहयोग
    प्राप्त नहीं हो पाता कई समस्याएं खड़ी हो
    जाती है |
    6. प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी मौसम पर निर्भर होना पड़ता है |

    आरोह अध्याय 4 गद्य भाग

    प्रश्न – लार्ड कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ गया?
    उत्तर –
    लॉर्ड कर्जन भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के वायसराय बन कर आया | उसमें भारत में अंग्रेजी
    साम्राज्य की जड़े मजबूत करने और उनका वर्चस्व स्थापित करने का हर संभव प्रयास किया |
    भारत के लोगों पर भी उसने अनेक दमनकारी नीतियां बनाकर अधिकार जमा लिया था | लार्ड
    कर्जन के इस्तीफे के दो कारण थे |
    1. बंग भंग की योजना को मनमाने ढंग से लागू करने के कारण सारे भारतवासी उसके विरुद्ध
    उठ खड़े हुए | इस से कर्जन की जड़े हिल गई | वह इंग्लैंड वापस जाने के बहाने ढूंढने लगा |
    2. कर्जन ने फौजी अफसर को अपनी इच्छा से  नियुक्त करना चाहा | दबाव बनाने के लिए
    उसने इस्तीफा देने की बात कही  उसने सोचा नहीं था कि उनके रुतबे को देखते हुए अंग्रेजी
    सरकार उनकी बात मान लेगी | लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसके विपरीत अंग्रेजी सरकार ने उनका
    इस्तीफा ही मंजूर कर दिया और इंग्लैंड वापिस जाना पड़ा |
    प्रश्न – शिव शंभू की दो गायों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
    उत्तर –
    शिव शंभू की दो गायों  के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि भारत के पशु हो या
    मनुष्य अपने संगी-साथियों के साथ गहरा लगाव रखते हैं | चाहे वह आपस में लड़ते झगड़ते
    भी हो तो भी उनका परस्पर प्रेम अटूट होता है | एक दूसरे से विदा होते समय वह दुख का
    अनुभव करते हैं | लेखक यह बताना चाहता कि भारत देश में भावनाएं प्रदान है | इसी प्रकार
    लॉर्ड कर्जन ने भारत में रहते हुए भारत वासियों को बहुत दुख पहुंचाया है | भारत वासियों को
    पतन की ओर धकेला है | फिर भी भारतवासियों को उसकी विदाई पर गहरा दुख अनुभव हो रहा है |

    प्रश्न – नादिरशाह से भी बढ़कर जिद्दी है लॉर्ड कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही
    लगती है पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए ?
    उत्तर –  
    जी हां, कर्जन के संदर्भ में ही हमें यह बात सही लगती है | क्योंकि नादिरशाह एक बड़ा ही क्रूर
    राजा था | उसने दिल्ली में कत्लेआम करवाया था | परंतु आसिफजहा ने तलवार गले में डाल
    कर उसके आगे समर्पण कर के कत्लेआम रोकने की प्रार्थना की तो तुरंत नादिरशाह ने कत्लेआम
    रोक दिया गया | परंतु जब लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया 8 करोड़ भारत वासियों
    की ओर से विनती बार-बार हो रही थी | परंतु उसने अपनी जिद नहीं छोड़ी इस संदर्भ में कर्जन
    की जिद्द नादिरशाह से भी बड़ी है लॉर्ड कर्जन नादिरशाह से भीअधिक क्रूर था | उसने जनहित
    की अपेक्षा की है |

    प्रश्न – 8 करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद ना करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान
    नहीं दिया यह किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
    उत्तर –
    लेखक बाबू बालमुकुंद जी यहां बंगाल के विभाजन की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत करते
    हैं | लार्ड कर्जन दो बार भारत का वायसराय बनकर आया |उसने भारत पर अंग्रेजी का प्रभुत्व
    स्थाई करने के लिए अनेक काम किए | भारत में राष्ट्रवादी भावनाओं को कुचलने के लिए
    उन्होंने बंगाल का विभाजन की योजना बनाई | देश की जनता कर्जन की ओर इस चाल को
    समझ गई | उन्होंने इस योजना का विरोध भी किया | परंतु भारतीय लोग पूरी तरह असहाय
    और लाचार थे | भारत के लोग बंगाल का विभाजन नहीं चाहते थे | किंतु उसने अपनी मनमानी
    करते हुए बंगाल को दो टुकड़ों में बांट दिया | पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल लेकिन भारत
    से जाते-जाते उन्होंने बंगाल का विभाजन कर दिया | यद्यपि उनका भारत में वायसराय बनने का
    कार्यकाल भी समाप्त हो चुका था |

    प्रश्न –  क्या  शान आप की देश में थी अब क्या हो गई कितने ऊंचे   होकर आप कितने
    नीचे गिरे पाठ के आधार पर आशय स्पष्ट कीजिए  ?
    उत्तर –
    लॉर्ड कर्जन को संबोधित करते हुए लेखक कहते हैं कि कुछ समय पहले तक भारत और
    ब्रिटिश साम्राज्य में आपकी जड़े बहुत मजबूत थी | लेकिन अब आप ने अपना मान सम्मान
    खो दिया | भारत में आपका बड़ा रुतबा था | दिल्ली दरबार में उनका वैभव चरम सीमा पर था |
    पति-पत्नी की कुर्सी सोने की थी | उनका हाथी सबसे ऊंचा और सबसे आगे रहता था | सम्राट
    के भाई का स्थान भी उनसे कम था | उनके  इशारे पर प्रशासक ,राजा, धनीआदमी नाचते थे |
    उनके संकेत पर बड़े-बड़े राजाओं को मिट्टी में मिला दिया गया और बहुत से निकम्मों को बड़े
    पदों पर रखा गया | परंतु बाद में यह स्थिति थी कि एक फौजी अफसर को भी आपके कहने
    के अनुसार ब्रिटिश सरकार ने नहीं रखा | इससे भारत और ब्रिटिश साम्राज्य दोनों जगह पर
    आप का अपमान हुआ | आप बहुत ऊंचे उठकर भी बहुत नीचे गिर गए |

    व्याकरण जनसंचार की विधाएं

    जनसंचार को समझने के लिए संचार के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है |

    प्रश्न –  संचार क्या है?

    उत्तर –
    मनुष्य सामाजिक प्राणी है सामाजिक प्राणी होने के कारण वह संचार करता है | संचार का मतलब
    विचरण करना | दैनिक जीवन में संचार के बिना हम जीवित नहीं रह सकते | क्योंकि मनुष्य जब
    तक जीवित है | संचार अर्थात विचरण करता रहेगा | हम यह भी कह सकते हैं कि समाचार जीवन
    की निशानी है | हम जिस संचार की बात कर रहे हैं | उसका अर्थ है मानव के संदेशों को पहुंचाना
    अर्थात संदेश भेजना प्राप्त करना इसके दो अनिवार्य लक्षण है |
    1. दो या दो से अधिक व्यक्ति
    2. उनके बीच किसी संदेश का ग्रहण होना या संप्रेषण होना |
    संचार जो है अनुभवों की साझेदारी है | संचार की परिभाषा इस प्रकार हम कह सकते हैं | सूचनाओं
    विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य- श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक एक
    जगह से दूसरी जगह पहुंचाना ही संचार है |

    प्रश्न – संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
    उत्तर –
    वह साधन हमारे संदेश को पहुंचाते हैं  जैसे समाचार पत्र, फिल्म, टेलीफोन रेडियो, दूरदर्शन,
    इंटरनेट, सिनेमा और फक्स आदि |


    प्रश्न – संचार की प्रक्रिया के तत्व कौन कौन से हैं ?
    उत्तर –
    संचार की प्रक्रिया के निम्नलिखित तत्व है |
    – संचारक या स्त्रोत
    – संदेश का कुटीकरण
    – संदेश का  कूटवाचन
    – प्राप्तकर्ता

    प्रश्न – संचार के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए ?
    उत्तर –
    संचार के निम्न प्रकार है |
    – सांकेतिक संचार
    – मौखिक संचार
    – समूह संचार
    – अंत: र्वैयक्तिक  संचार
    – जनसंचार

    प्रश्न – फीडबैक से आप क्या समझते हैं ?
    उत्तर –
    कुट्टी कृत संदेश के पहुंचने पर प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया करता है |
    इससे पता चलता कि संचारक का संदेश प्राप्त करता तक पहुंच गया |

    प्रश्न – एनकोडिंग या कुटीकरण का क्या तात्पर्य है ?
    उत्तर –
    संदेश को भेजने के लिए शब्दों संकेतों या ध्वनि चित्रों का उपयोग किया जाता है | भाषा भी
    एक प्रकार का कोट चिन्ह या कोड  होता है | अतः प्राप्तकर्ता को समझाने योग्य कुटों में
    संदेश को बांधना एनकोडिंग या कुटीकरण कहलाता है |

    प्रश्न – कूट वाचन या डिकोडिंग से आप क्या समझते हैं ?
    उत्तर –
    कुटीकरण की उल्टी प्रक्रिया कूट वाचन कहलाती है | इसके माध्यम से संदेश को प्राप्त करता
    कूट चिन्हों में बंधे संदेश समझाता है | इसके लिए आवश्यक है कि प्राप्तकर्ता भी कोड का
    वही अर्थ समझता हूं | जो उसे संचारक समझाना चाहता है |

    प्रश्न – सांकेतिक संचार से आप क्या समझते हैं?
    उत्तर – सांकेतिक संचार का आर्थिक संकेतों द्वारा संदेश पहुंचाना | मनुष्य का हाथजोड़ना, पांव
    छूना, हाथ मिलाना, मुट्ठी कसना, सिग्नल देना, लाल बत्ती होना, हरी बत्ती होना आदि सांकेतिक
    संचार है |

    प्रश्न – समूह संचार का क्या आशय है?
    उत्तर –
    एक से अधिक व्यक्तियों से बात करता है  | किसी समूह के सदस्य आपस में विचार विमर्श करते हैं
    तो उसे समूह संचार कहते हैं | अध्यापक का कक्षा में पढ़ाना किसी संस्था की बैठक होना, जलसा
    या जुलूस  मैं वार्तालाप कोई एक व्यक्ति बात करता है और वह सबके लिए करता है | वह सामूहिक
    मुद्दों पर की गई वार्ता समूह संचार के अंतर्गत ही आती है |

    प्रश्न – जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
    उत्तर –
    जनसंचार नहीं सभ्यता का शब्द है जब संचार किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज
    के विशाल वर्ग से संवाद करने की कोशिश की जाती है तो उसे जनसंचार कहते हैं | इसमें एक संदेश
    को यांत्रिक माध्यम के जरिए बहुगुणित किया जाता है | ताकि उसे अधिक से अधिक लोगों तक
    पहुंचाया जा सके |

    जनसंचार की प्रमुख विशेषताएं –
    – जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या  प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है |
    – इसमें संचालक और प्राप्तकर्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता |
    – इस माध्यम में अनेक द्वार पाल होते हैं जो इन माध्यमों  से प्रकाशित /प्रसारित होने वाली सामग्री
    को नियंत्रण तथा निर्धारित करते हैं |

    प्रश्न – जनसंचार माध्यमों में द्वारपालों की भूमिका क्या है ?
    उत्तर –
    जनसंचार  माध्यमिक में द्वारपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है | यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह
    सार्वजनिक हित, पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों और आचार संहिता के अनुसार सामग्री को संपादित
    करें तथा इसके बाद ही उनके प्रसारण या प्रकाशन को इजाजत दे |

    प्रश्न – जनसंचार के कौन-कौन से कार्य हैं स्पष्ट करें?
    उत्तर –
    जनसंचार के निम्नलिखित कार्य हैं  |
    1. सूचना देना – जनसंचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है यह दुनिया भर से सूचनाएं
    प्रसारित करते हैं |
    2. मनोरंजन – जनसंचार माध्यम सिनेमा रेडियो-टीवी आदि मनोरंजन के भी प्रमुख साधन है |
    3. जागरूकता – यह जनता को शिक्षित करते हैं जनसंचार माध्यम लोगों को जागरूक बनाते हैं |
    4. निगरानी – जनसंचार माध्यम सरकार और संस्थाओं के कामकाज पर निगरानी भी रखते हैं |
    5. विचार विमर्श के मंच – यह माध्यम लोकतंत्र में विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति का मंच
    उपलब्ध कराते हैं इसके जरिए विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुँचाते हैं |

    प्रश्न – जनसंचार के माध्यमों को आम जीवन पर क्या प्रभाव है ?
    उत्तर –
    जनसंचार माध्यमों का आम जीवन पर बहुत प्रभाव है इनसे सेहत, अध्यात्मक, दैनिक जीवन
    की जरूरतें हैं आदि पूरी होने लगी है | यह हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं |

    प्रश्न – लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों का प्रभाव बताइए ?
    उत्तर –
    लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों में जीवन को गतिशील व पारदर्शी बनाया है | इससे माध्यम में
    विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श व  बहस होती है | सूचनाओं में जानकारियों का आदान प्रदान
    होता है | जो सरकार की कार्यशैली पर अंकुश रखती है | लोकतंत्र को सशक्त बनाती है |

    प्रश्न – जनसंचार के दुष्प्रभाव बताइए?
    उत्तर –
    1. जनसंचार के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को कम महत्व दिया जाता है |
    2.  समाज में अश्लीलता व सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं |
    3.  जनसंचार के माध्यम खास तौर पर TV वेब सिनेमा ने लोगों को काल्पनिक दुनिया की
    सैर कराई है | यह आम जनजीवन से दूर हो जाते हैं | यह पलायनवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं |
    4. अनावश्यक मुद्दों को उछाला जाता है |
    5. कई बार बहुत छोटी बात को बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है |


    आरोह अध्याय तीसरा काव्य भाग


    आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – पथिक (कवि रामनरेश त्रिपाठी)


    प्रश्न- पथिक का मन कहां विचरना चाहता है ?
    उत्तर –  
    पथिक प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत है | प्रतिक्षण नूतन  वेश धारण करने वाली बादलों की
    पंक्ति को तथा नीले समंदर की लहरों को देखकर वह  मुग्ध हो रहा है | पथिक का मन
    नीले अकाश और नीले समुद्र के बीच विचार ना चाहता है | उसका मन चाहता है कि वह
    बादलों पर बैठकर आकाश के बीच विचरण करें और प्रकृति के समस्त सौंदर्य का अनुभव
    करें |

    प्रश्न- सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के  बिंबो का प्रयोग हुआ है ?
    उत्तर –  
    सुबह के सूरज की लालिमा जब समुद्र तल पर पड़ती है | तो चारों तरफ लालिमा बिखरती
    हैं | कवि ने कल्पना की है कि मानो लक्ष्मी का मंदिर है और लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई
    गई सुनहरी सड़क है | कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उसमंदिर का उज्जवल कअंगूरा
    है और लक्ष्मी की सवारी को इस पुण्य धरती पर उतारने के लिए स्वयं समुद्र देव ने बहुत
    सुंदर स्वर्णिम मार्ग बना दिया हो | कवि की कल्पना  बहुत ही सुंदर तरीके से बिंबो के रूप
    में उभरकर आई है |

    प्रश्न- पथिक कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है ऐसे
    उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें?
    उत्तर –  
    श्री राम नरेश त्रिपाठी आधुनिक युग के कवियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | त्रिपाठी
    जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार थे | प्राकृतिक प्रेम और नवीनता के प्रति आग्रह भी उनके
    काव्य की प्रमुख विशेषता रही है | पथिक कविता में भी प्रकृति  के उपादान ओं को मानव
    की भांति करते हुए दिखाया है | जिससे कविता के सौंदर्य अभिवृद्धि हुई है | सूर्य के सामने
    बादलों का नाचना कभी श्वेत श्याम नील वर्ण को धारण करना गहरे अंधेरे का मानवीकरण
    किया है आधी रात को सारे संसार को जो ढक लेता है | अकाश रूपी छत पर तारों को
    बिखरा देता है तब इस जगत का स्वामी मंद गति से चलकर आता है | सागर ओं को अपने
    मीठे गीत सुनाता है | आधी रात को जब सूर्य निकलने की तैयारी करता है और धीमी धीमी
    गति से चलता हुआ सागर के किनारे अपनी लालिमा भी बिखेरता है | और चांद उसके रूप
    को देखकर हंस कर वापसी की तैयारी करता है | पेड़ पत्ते फूल मुस्कुराने लगते हैं पक्षी
    चहचाहने लगते हैं | वृक्षों को भी सजे धजे प्रसन्न मनुष्य के रूप में दर्शाया है | फूलों को
    सुख की सास लेते हुए  प्राणी की भांति दिखाया गया है | इस तरह इस कविता में कई
    स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है |


    व्याकरण फीचर लेखन

    फीचर लेखन के गुण:
    1 – विश्वसनीयता
    2 – सरसता एवं सहजता
    3 – रोचकता एवं संक्षिप्त ता
    4 – प्रसंगिकता


    5 – प्रचलित शब्दावली का प्रयोग

    फीचर लेखन का क्रम:
    1 शीर्षक
    2 भूमिका  
    3 विषय का विस्तार  
    4 निष्कर्ष या समापन

    फीचर  लेखन कोनी मलिक श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
    – सामाजिक सांस्कृतिक
    – साहित्यिक  फीचर
    – प्राकृतिक फीचर
    – घटनापरक फीचर
    – राजनीतिक फीचर

    कुछ महत्वपूर्ण फीचर के उदाहरण –

    1. स्वच्छता अभियान पर एक फीचर लिखिए | 
                         
    स्वच्छता अभियान
    भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर
    आरंभ किया गया स्वच्छ भारत अभियान अब तक सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है |
    गांधी जी के आवाहन को पूरा करने वाले देश अब उनके लिए क्लीन इंडिया के आह्वान
    को पूरा करने निकल पड़ा | देश को स्वच्छ बनाना सिर्फ किसी सरकार या संगठन की
    जिम्मेदारी नहीं हो सकती हो नहीं संभव भी नहीं है | जब तक देश के नागरिक इसके
    प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक इस महान लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है |
    स्वच्छता की भावना हमारे अंदर होनी चाहिए बल्कि हमें स्वयं ही इसके प्रति आंतरिक
    स्तर पर सचेत होना होगा | ना तो गंदगी फैलाएं और ना ही किसी को गंदगी फैलाने
    दे यही भावना स्वस्थ अभियान को सफल एवं सार्थक बना सकती है | हमें स्वच्छता
    के महत्व को समझना चाहिए इसके अभाव में यानी गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों को
    भी जाना होगा विश्व पटल पर अपनी गंदगी की छवि को मिटाकर अपनी स्वच्छता
    प्रिया छवि को स्थापित करना होगा और इस स्वच्छता अभियान को सफल बनाना होगा |

    2. वन रहेंगे- हम रहेंगे पर एक फीचर लिखिए |

    वन रहेंगे : हम रहेंगे
    पिछले सैकड़ों वर्षों से वृक्ष कट रहे हैं जंगलों का सफाया हो रहा है | मनुष्य ने ठान
    लिया कि हम ही रहेंगे चाहे जंगल रहे या ना रहे यदि जंगल रहे तो हम कहां रहेंगे |
    जंगल सिकुड़ कर छोटे होते जा रहे हैं | नगर फल-फूल कर बड़े होते जा रहे हैं | मनुष्य
    और प्रकृति में गहरा संबंध रहा है | मानव अपनी सभी अवस्थाओं की पूर्ति के लिए
    पूर्णता प्रकृति पर ही निर्भर है | वन संपदा भी प्रकृति की एक अद्भुत और अत्यंत उपयोगी
    है | वन तथा पेड़ पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  लेकर उसे प्राण दायिनी
    ऑक्सीजन में बदल देते हैं | वृक्षों का प्रत्येक अंग – फल, फूल, पत्तियां, छाल यहां तक
    की जड़ भी उपयोगी है | हमें स्वादिष्ट फलों के साथ साथ जीवन रक्षक औषधियां भी
    मिलती हैं | वन बादलों को रोककर वर्षा कराने में भी सहायता करते हैं | पर्यावरण को
    भी शुद्ध करते हैं वनों से प्राप्त लकड़ियां भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने का काम करती
    हैं | वनों से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं | फिर भी मनुष्य ने अंधाधुंध वृक्षों की
    कटाई की है | जिसके कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गए हैं | अचानक मौसम परिवर्तन
    हो जाता है | जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं | पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
    होने लग गई है | हिमनदो का पिघलना समुद्री जल- अति में वृद्धि अनेक समस्याओं को
    उत्पन्न हो गई है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास के लिए वन संपदा
    का प्रयोग करता है | इसलिए हमें यह बात समझनी होगी कि विकास और पर्यावरण
    एक दूसरे के विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक हैं | यदि वृक्ष न रहे तो संपूर्ण मानव जगत
    का अस्तित्व ही मिट जाएगा | यह भी सही है कि विकास के लिए वृक्ष काटना आवश्यक
    है | इसके लिए हमें वृक्षारोपण को अपना कर्तव्य समझ इसका पालन करना चाहिए इसके
    साथ ही हमें सतत पोषणीय विकास की विचारधारा को अपनाना चाहिए |

    आरोह अध्याय चौथा काव्य भाग

    आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – वे आंखें (सुमित्रानंदन पंत)

    प्रश्न –कविता भी आंखें में किसान की पीड़ा के लिए किसे जिम्मेदार बताया गया है?
    उत्तर –
    किसान की पीड़ा के लिए जमीदार और महाजन तथा क्रूर कोतवाल को जिम्मेदार ठहराया
    गया है | महाजन ने अपना ब्याज और ऋण वसूलने के लिए उसके खेत, बैल और घरबार
    बिकवा दिया | जमीदार के  कार् कूनो ने किसान के जवान बेटे को पीट-पीटकर मार दिया |
    किसान इतना पैसों का मोहताज हो गया कीलाचार किसान अपनी पत्नी की दवा दारू ना
    करा सका और वह भी चल बसी | और उसकी दूध मूही बच्ची का भी देहांत हो गया |
    किसान की  पुत्रवधू पर भी कोतवाल ने कू दृष्टि डाली | वह भी कुएं में डूब कर मर गई |
    समाज को अन् प्रदान करने वाले कृषक से सारा संसार किनारा कर तमाशा देखता रहा |
    किसान अकेला ही पीड़ा को सहता रहा और भीतर ही भीतर घुटता रहा |

    प्रश्न – पिछले सुख की स्मृति आंखों में क्षणभर एक चमक है लाती | इसमें किसान के
    किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है?
    उत्तर –
    वे आंखें कविता में सुमित्रानंदन पंत जी ने किसान के पिछले सुखों की ओर संकेत किया
    है | किसान के कवि लहराते हरे भरे खेत  थे | जिन की हरियाली को देखकर उसका तन मन
    प्रसन्न हो जाता था | तब वह स्वाधीनता उसी से उसका मस्तक ऊंचा उठता था | घर में बैलों
    की जोड़ी थी | दूध देने वाली गाय थी |जो किसान से इतना प्रेम करती थी कि वह किसान
    को ही अपना  दूध दोहने देती थी | किसान का भरा पूरा परिवार था | एक जवान बेटा और
    बहू थी | किसान की देखभाल करने वाली उसकी अपनी पत्नी थी | वह सुख और समृद्धि से
    सुख पूर्वक अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहा था | परंतु सब कुछ शोषक वर्ग
    की भेंट चढ़ गया था | यह उपरोक्त खुशियां, सुख की स्मृतियां किसान की आंखों में क्षण
    भर के लिए चमक ला देती थ |

    प्रश्न – किसान की  विरान आंखें नॉक सदृश बन जाती हैं क्यों ?
    उत्तर –
    किसान बहुत खुश और धन-धान्य से भरपूर अपने परिवार में बहुत खुश था | लेकिन आज
    उसकी दुर्दशा जो है उसे अपनी विवशता और असहायता पर रोना आता है | वह महाजन
    का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता | यह सोच कर उसकी आंखें नम हो जाती है | कोतवाल
    पर उसका जोर नहीं चलता |जमीदार के दुख वह सहता गया | यह सभी बातें उसकी आंखें
    तीर के समान नुकीली हो जाती है औरऐसा लगता है मानो वह अत्याचारों की छाती को भेद
    डालेगी |

    प्रश्न – संदर्भ सहित आश्य स्पष्ट करें :
    क – ऊजरी उसके सिवा किसे कब
           पास दुहाने आने देती?
    ख – घर में विधवा रही पतोहू
           लक्ष्मी थी, यद्यपि पति घातिन
    उत्तर –
    क – आंखें कविता में किसान के पास एक श्वेत गाय थी | जिसका नाम ऊजरी था |
    जिसे वह बहुत प्रेम करता था | महाजन ने ब्याज की कोड़ी कोड़ी वसूलने के लिए किसान
    की बैलों की जोड़ी तथा गाय को नीलाम कर दिया | किसान को अपनी गाय की बहुत याद
    आ रही थी कि दूध  दुहाने के लिए किसान  के अतिरिक्त किसी को पास नहीं आने देती थी |
    आज सबकुछ उससे छीन गया |

    ख- उपरोक्त  पंक्तियां  महाजन के कारकूनो  किसान के जवान पुत्र को मार डाला |
    इसी कारण उसकी पुत्रवधू विधवा हो गई | उसकी इसी  स्थिति का चित्रण करते हुए कवि
    कहता है की किसान का पुत्र नहीं रहा | उसके उसके पीछे उसकी विधवा पुत्रवधू रह गई जो
    कहने का तो नाम से लक्ष्मी थी | परंतु वह पति को खाने वाली थी | कवि ने इन पंक्तियों में
    समाज में विधवाओं के प्रति अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को व्यक्त किया है | कोई कसूर
    ना होते हुए भी किसान की पुत्रवधू को पति घातिन होने का कलंक सहना पड़ रहा है |

    आरोह अध्याय पांचवा काव्य भाग


    आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे – घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)


    प्रश्न – पानी के रात भर गिरने और प्राण मन के गिरने से परस्पर क्या संबंध है ?
    उत्तर –
    राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए कवि भवानी प्रसाद मिश्र को भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत
    जेल यात्रा की यात्रा यातना सहनी पड़ी | यह कविता जब वह जेल में थे | तब उन्होंने लिखी
    बहुत वर्षा हो रही है | रात भर वर्षा होने से कवि को अपने घर की याद आ गई घर के सदस्य
    के साथ हंसी खेल करते हुए मनोरम दिन ज्यादा गए जिस प्रकार मेघा अकाश से गिरकर
    वर्षा ला रहे हैं | उसी तरह कवि का मन यहां परिवार की स्मृतियों से गिरा हुआ है | जैसे जैसे
    पानी रात भर लगातार गिरता जा रहा है वैसे-वैसे कवि के लिए में भी अपने परिजनों की
    स्मृतियां चलचित्र बनकर निरंतर बढ़ती जा रही है |

    प्रश्न – मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है ?
    उत्तर –  
    कवि सोच रहा है कि उसकी बहन मायके में अनंत खुशियां बांटने आई होगी | सोचा होगा
    कि पिता के घर जाकर अपने भाइयों बहनों से मिलूंगी परंतु वहां जाकर उसे पता चला
    होगा कि उसका एक भाई जेल में है | उसकी वही खुशियां दुख में बदल जाएंगी | वही
    घर उसके लिए दुखों का घर बन गया होगा | इसी कारण बाप के घर को (परिताप का
    घर) कहा है |

    प्रश्न – पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?
    उत्तर –
    भवानी प्रसाद मिश्र के पिता की निम्नलिखित विशेषताओं को कार आ गया है –
    i) बलिष्ठ शरीर और साहसी   कवि ने अपने पिता का विशालकाय और मजबूत
    शरीर और साहसी व्यक्ति दर्शाया है | कभी कहते हैं कि उनके पिता पर बुढ़ापे का कोई
    लक्षण दिखाई नहीं देता | वह अभी भी पूरी क्षमता के साथ दौड़ सकते हैं | खिल खिला
    सकते हैं | साहस  तो उनमे इतना है कि वह अपने सामने शेर तो क्या मौत को देखकर
    भी ना डरे | उनकी आवाज में बादलों जैसी गर्जन है | काम भी तूफान की तरह तेजी से
    करते हैं |
    ii) धार्मिक प्रवृत्ति – वह सुबह उठकर घर की छत पर जाकर व्यायाम करते हैं |
    मुगलद भी जानते हैं | दंड बैठक निकालते हैं | और साथ में गीता का पाठ भी करते हैं |
    यह उनकी एक धार्मिक प्रवृत्ति का उदाहरण है |
    iii) कोमल हृदय – भवानी प्रसाद मिश्र के पिता मन से भी विशाल और उदार हैं | वह
    अत्यंत सरल, भोले, सहृदय और  भावुक है | अपने परिवार जनों से वह गहरा लगाव
    रखते हैं | उन के 5 पुत्र है वह सबसे गहरे जुड़े हुए हैं और कवि से उनका विशेष लगाव है |

    प्रश्न – निम्नलिखित पंक्तियों में बस शब्द के प्रयोग की विशेषताएं बताइए?
    मैं मजे में हूं सही है,
    घर नहीं हूं बस यही है,
    किंतु यह बस बड़ा बस है,
    इसी बस से सब वीरस है |  
    उत्तर –
    यहां बस शब्द का प्रयोग विशिष्ट है बस शब्द तीन बार प्रयोग किया गया है |
    परंतु तीनों बस का अर्थ अलग अलग है | एक बस का विविध प्रकार से अर्थ है | पहले
    बस में कवि अपने पिता और परिवार जनों को सांत्वना दे रहा है | केवल मामूली सी बात
    है कि मैं घर पर नहीं हूं बस यहां जेल में हूं | दूसरी बार बस शब्द में केवल कवि के मन
    की व्याकुलता और पीड़ा का अनुभव होता है | वास्तविकता यही है कि वह घर से दूर है
    कि उसकी सहनशक्ति कि मानो चरम सीमा हो गई है | अंतिम बस द्वारा कवि थोड़ा
    आशावादी भी है कवि की विभिन्न स्थितियों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है | वैसे तो
    जेल में मैं मजे से हूं लेकिन घर के लोग लोगों की खुशियों से मैं वंचित हूं यहां बस
    निराशावादी चित्रण दे रहा है |

    प्रश्न – कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कभी अपनी
    किस स्थिति मन: स्थिति को अपने परिजनों से छुपाना चाहता है?
    उत्तर –
    कवि जेल में है | उसे घर की याद सताती है | बहुत तेज बारिश हो रही है तो वह सावन
    को संबोधित करते हुए अपने आप से ही बातें कर रहा है | घर को याद कर रहा है | घर के
    लोगों के वियोग से पीड़ित है |  दूसरे सभी लोगों से उसे डर लग रहा है | कहता है कि मैं
    आदमी से भी डरने लग गया हूं जेल की यातनाएं सह रहा हूं | शरीर और मन ढलने लगा है |
    रात रात भर जागता रहता हूं और चुप रहने लगा हूं | जेल में रहकर अपना अस्तित्व ही भूल
    गया हूं | अपनी वास्तविकता छिपाकर सावन के माध्यम से अपने घर में खुशियों के संदेश
    भिजवाता हूं | यहां कवि की मन की स्थिति दीवानों जैसी हो गई हैअर्थात उसे घर की याद
    आ रही है |  

    आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का छटा अध्याय करेंगे – चंपा काले काले अक्षर नहीं चीनती

    प्रश्न – कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
    उत्तर –
    कवि ने चंपा की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है –
    – भोलापन |
    – अनपढ़ |
    – शरारती स्वभाव |
    – मुखर स्वभाव –  मन की बात को बिना छिपाए सीधे मुंह पर कहना |
    – आत्मीयता  – परिवार के साथ मिलकर रहने की भावना |
    – विद्रोही कष्ट देने वाले के प्रति खुला विद्रोह |

    प्रश्न – चंपा कौन है उसे किस बात पर आश्चर्य होता है ?
    उत्तर –
    चंपा सुंदर नामक ग्वाले की बेटी है | बिल्कुल अनपढ़ है | मैं पढ़े-लिखे लोगों को अच्छा नहीं
    मानती और पढ़ाई को भी अच्छा नहीं मानती | जब लेखक को काले काले अक्षर पढ़ते देखती है |
    तो इस बात पर आश्चर्य होता है इन अक्षरों में कैसे-कैसे स्वर भरे हुए हैं | जिससे कुछ ना कुछ
    पढ़ कर बोला जाता है | वह इस बात पर आश्चर्य करती है |

    प्रश्न – चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कोलकाता पर बजर गिरे ?
    उत्तर –
    कवि चंपा को पढ़ने के लिए कहता है कि जब तेरी शादी हो जाएगी | तुम ससुराल जाओगी |
    तब कुछ दिनों तक तो तुम्हारे पति तुम्हारे साथ रहेगा | फिर कमाने के लिए कोलकाता चला
    जाएगा | तुम जानते हो कोलकाता बहुत दूर है तो तुम पति को संदेश कैसे भेजोगी | उसे पत्थर
    कैसे लिखोगे इसलिए कभी उसे पढ़ने लिखने के लिए कहता है | तो तू कभी को वो बहुत अच्छे
    से सीधा जवाब देती है | पहली बात तो मैं शादी नहीं करूंगी अगर करूंगी तो मेरे पति को मैं
    कोलकाता नहीं जाने दूंगी | कोलकाता पर बजर गिरे अर्थात कोलकाता का  सत्यानाश हो |

    प्रश्न – चंपा कोई पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा ने पढ़ने लिखने की बात कही
    होगी ?
    उत्तर –
    चंपा ने दो बातें सुन रखी थी –
    i) पढ़ना लिखना बुरी बात है |
    ii) गांधी बाबा अच्छे मनुष्य है |
    जब  कवि कहता है कि गांधी बाबा कहते हैं  सब पढ़ लिख जाए | तू भी पढ़ना शुरू कर दे |
    तो उसको विश्वास नहीं हो पाता कि गांधी बाबा तो अच्छे मनुष्य थे | उन्होंने कैसे पढ़ने लिखने
    जैसी बुरी बात कही होगी |

    शुभकामनाएं सहित !

    आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

    प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
    स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
    कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
    उत्तर –
    आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
    के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
    अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
    और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
    में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
    कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

    किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
    रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
    वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
    या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
    कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
    ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
    हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
    और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
    का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

    प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
    सी सच्चाई उजागर होती है?
    उत्तर –
    इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
    उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
    पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
    सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
    भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
    भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
    खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
    थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
    गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
    तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
    मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

    प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
    है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
    करिए?
    उत्तर –
    आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
    को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
    जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
    गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
    कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
    तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
    साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
    है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
    गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

    प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
    मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
    उत्तर –
    इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
    समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
    की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

    पहली समस्या –
    समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
    पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
    हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
    अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
    काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
    दूसरी  समस्या –
    सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
    में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
    है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
    सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

    प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
    के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
    उत्तर –
    ‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
    का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
    आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
    रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
    कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
    था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
    थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

    प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
    होता कल्पना करें और लिखें |
    उत्तर –
    बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
    की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
    उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
    में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
    पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
    व्यतीत कर रही होती |

    प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
    उत्तर – 
    यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

    i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
    वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
    घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
    नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
    परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
    ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
    कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

    iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
    साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
    उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
    उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

    iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
    उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
    को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
    नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
    पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
    परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |

    आज हम वितान पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे – आलो आधारि |

    प्रश्न पाठ् के किन अंशओ से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना
    स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में
    कोई परिवर्तन आया है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए |
    उत्तर –
    आलो आधार पाठ में कई स्थलों पर इस ओर संकेत किया गया है कि भारतीय समाज में पुरुष
    के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है | लेखिका बेबी हालदार को पुरुष के सहारे के बिना
    अपना जीवन यापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा काम ढूंढना मकान की तलाश करना
    और लोगों की गंदी नजरों का सामना करना ऐसे ही संघर्ष है | पुरुष के बिना स्त्री के जीवन
    में अनेक समस्याएं आती हैं | आसपास के लोग उनसे पूछते हैं तुम्हारा स्वामी कहां है | तुम
    कितने दिन से यहां रहा हो |तुम अपने स्वामी के पास क्यों नहीं जाती हो |

    किसी दिन घर पहुंचते वक्त देरी हो जाए तो मकान मालिक स्त्री पूछती है | इतनी देर कहां
    रह गई | कहां जाती है रोज-रोज | तू अकेली है | तुझे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
    वगैरा-वगैरा वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है | स्त्री
    या पुरुष के बिना स्वतंत्र रूप से रह रही है | अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन यापन
    कर रहे हैं | हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी कर रहे हैं | उन्हें समाज में भी सम्मान की दृष्टि से
    ही देखा जाता है | कुछ असामाजिक तत्व स्त्री के अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाना चाहते
    हैं | इसलिए सरकार को अकेली रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला आश्रम
    और महिला आवास  घरों का निर्माण करना चाहिए | वह राजनीति का क्षेत्र हो या खेल
    का मैदान हो स्त्रियों ने हर जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली है |

    प्रश्न –  अपने परिवार से तातुश के घर तक के  सफ़र मैं बेबी के सामने रिश्तों की कौन
    सी सच्चाई उजागर होती है?
    उत्तर –
    इस सफर में बेबी ने जान लिया कि रिश्ते दिलों से बनते हैं | तातुश उसे दिल से चाहते थे |
    उन्होंने उसे बेटी बनाकर रखा था |किसी चीज की कमी नहीं होने दी | इस घर में आने से
    पहले उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | उसके माता पिता भाई बंधु आदि
    सबको पता था कि वह पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है | कोई
    भी उसकी सहायता और हालचाल पूछने नहीं आया | उसे अपनी मां की मृत्यु का समाचार
    भी 7 महीने के बाद पता चला उसका घर तोड़ दिया गया | वह रात भर बच्चों के साथ
    खुले आसमान में एक परिचित भोला दा के साथ बैठी रही | पास ही उसके दो भाई रहते
    थे | परंतु उन्होंने उसकी खबर खोज नहीं ली | उसके सामने सभी रिश्तों की पोल खुलती
    गई सभी संबंध व्यर्थ ही लगते गए उसकी सहायता अनजान लोगों में से सुनील ड्राइवर,
    तातुश और भोला  दा ने की औरतों ने भी उसका दर्द कम ही समझा | हर आदमी उसकी
    मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था |

    प्रश्न – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता
    है घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है इस पर विचार
    करिए?
    उत्तर –
    आलो आधारि  पाठ से हमें पता चलता है कि लोगों के घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों
    को किस प्रकार  से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | रहने के लिए अच्छी
    जगह नहीं होती | बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं होता | जहां वो रहते हैं आसपास
    गंदगी होती है उन्हें अपनी तरह का जीवन जीने का कोई हक नहीं होता | मालिक ने जो
    कहा उन्हें वही करना पड़ता है | सारा दिन काम करके भी उन्हें डांट ही मिलती है | कई बार
    तो वह भूखे प्यासे ही अपना काम करते रहते हैं | किसी किसी घर में तो घरेलू नौकरों के
    साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है | छोटी सी गलती पर उन्हें पशुओं की तरह मारा जाता
    है | बीमार होने पर दवा भी नहीं करवाई जाती | कई बार तो उन्हें मजदूरी के लिए भी
    गिड़गिड़ाना पड़ता है | घरेलू नौकरों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

    प्रश्न – आलो आधारि  रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक
    मुद्दों को समेटे हुए हैं किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करें ?
    उत्तर –
    इस पाठ के अनुसार बहुत सी समस्याएं हैं | जैसे कि परित्यक्ता स्त्री की दशा, आवाज की
    समस्या, बच्चों की शिक्षा की समस्या, सार्वजनिक शौचालय की समस्या, घरेलू नौकरों
    की समस्या, गंदगी की समस्या और स्त्रियों की दशा आदि |

    पहली समस्या –
    समाज में स्त्री की दशा को लेते हैं | एक अकेली रह रही स्त्री को समाज में ताने क्यों सुनने
    पड़ते हैं ? क्या उसे अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं है ? लोग उसे गंदी नजरों से देखते
    हैं अकेली मजबूर स्त्री की मदद करने की बजाय उसे परेशान किया जाता है | उसके
    अकेलेपन का कुछ लोग नाजायज लाभ उठाना चाहते हैं | कुछ ताने कसते हैं | वह अपने
    काम से काम रखते हुए भी लोगों की कु दृष्टि का शिकार बनती रहती है |
    दूसरी  समस्या –
    सार्वजनिक शौचालयों का भाव कई क्षेत्रों में घरों में भी शौचालय बाथरूम नहीं होते | ऐसे
    में पुरुषों का काम तो चल जाता है | मगर स्त्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता
    है | इन समस्याओं को समाज ही दूर कर सकता है | आपसी भेदभाव भुलाकर हम जाति का
    सम्मान करें व असहाय लोगों की सहायता करें तभी इन समस्याओं का समाधान हो सकेगा |

    प्रश्न – ‘ तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो ’ – जेठू का यह कथन रचना- संसार
    के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
    उत्तर –
    ‘तुम दूसरी अन्नपूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू का यह कथन लेखिका बेबी में नया उत्साह
    का संचार करता है | इस कथन का आशय था कि लेखिका के जीवन की जटिलताएं उसके
    आगे नहीं आ सकती | आशापूर्णा देवी ने भी अभावों – भरे  जीवन में अपना लेखन जारी
    रखा और नई ऊंचाइयों को छू लिया | जिस किसी में लेखन प्रतिभा है | उसे जरा सा उत्साहित
    कर दे तो मैं अच्छा लेखन लिखने लग जाता है | जेठू ने लेखिका की लेखन प्रतिभा को पहचाना
    था | चाहते थे कि लेखिका बेबी लिखना जारी रखें | व पत्रों के माध्यम से उनका उत्साह बढ़ाते
    थे | प्रोत्साहन मिलने पर मनुष्य में काम भी कर जाता है | जिसे सोचने से भी डरता है |

    प्रश्न – बेबी की जिंदगी में साथ उसका परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा
    होता कल्पना करें और लिखें |
    उत्तर –
    बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार  ना आया होता तो निश्चय ही उसका जीवन एक नरक
    की तरह होता | उसे पेट भर खाना भी ना मिलता | बच्चों का पालन पोषण भी ठीक ना होता |
    उसके परिवार को भीख मांगने की पड़ती | उसके बच्चे दूसरों का जूठन खा रहे होते बुरी संगत
    में पड़ गए होते बेबी को भी बस्ती के गुंडों से अपनी इज्जत बचाने मुश्किल हो जाती | उसे
    पढ़ने लिखने का तो अफसर ही ना मिलता | झोपड़पट्टी में असुविधाओं के साथ अपना जीवन
    व्यतीत कर रही होती |

    प्रश्न – बेबी के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए?
    उत्तर – 
    यह पाठ बेबी की आत्मकथा है बेबी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –

    i) साहसी – बेबी का चरित्र एक साहसी महिला के रूप में उभर कर सामने आता है |
    वह पति के साथ अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती हैं | लोगों के
    घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं | काम छूट जाने पर भी घबराते
    नहीं रात भर खुले में अपने बच्चों के सामान के साथ रहती हैं | यह जीवन  मैं आने वाली प्रत्येक
    परिस्थिति का मुकाबला साहस पूर्वक करती है |
    ii) परिश्रमी – बेबी बहुत परिश्रमी महिला है | रात उसके घर का सारा कामकाज निपटा
    कर समय निकालकर पढ़ भी लेती है |

    iii) अध्ययन शील बेबी को इस बात का दुख है कि मैं बचपन में पढ़ लिख नहीं सकती थी |
    साथ उसके घर अलमारियां साफ करते हुए उसकी नजर उसको पर पड़ती है | सोचती थी कि
    उन्हें कौन पढ़ता होगा वैसे में छठी कक्षा में थी जब उसने पढ़ाई छोड़ दी थी | जब तक उसने
    उसे पूछा तो उसने रविंद्र नाथ ठाकुर नज़रुल इस्लाम शरद चंद्र आदि के नाम  गिनवा दिए |

    iv) ममता से भरी हुई – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है |
    उन्होंने पढ़ा लिखा कर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है | रात उसकी सहायता से वह दो बच्चों
    को स्कूल में प्रवेश दिला देती है | उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था | उसका उसे पता
    नहीं चलता था | तो वह व्याकुल लौटती थी | रात उसने उसे उसके बेटे से मिलवा दिया | वह
    पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी घर ले आती है | इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक
    परिश्रमी, साहसी, स्वाभिमानी एव अध्ययन शीलता वाली महिला थी |

    2020: A Clear Vision for Our Learners

    20/20 vision is a term for visual acuity in which the numerator refers to distance and the denominator refers to size. Visual acuity (VA) commonly refers to the clarity of vision. Vision is all about clarity. 20/20 vision is perfect, high-definition clarity. The question is: How clear is your vision? Specifically, how clear is your vision [for your learners’] futures? (How to Have 20/20 Vision in 2020)

    The year 2020 can act as metaphor for us, as educators, to have an overreaching vision for what we do. I really love the idea of approaching 2020 with a clear, well-articulated vision of our learners’ futures.

    Grant Wiggins in Why Do You Teach had this to say about the importance of educators developing their vision-mission statements.

    I am interested in [teachers being able to answer]:  Having taught, what should they have learned? What do you aim to accomplish as a teacher? What is your goal for the year, for all the years? What kind of a difference in their thinking and acting are you committed to?

    Many teachers do not have good answers; most have no such personal Mission Statement; most have not even written a long-term syllabus in which they lay out the key goals for learners (and parents) and how those goals will best be achieved. But then – I say this with no malice –  you really have no goals. You are just marching through content and activities, hoping some of it will stick or somehow cause some learning.

     If you have no long-term accomplishments that you work daily to cause – regardless of or even in spite of the BS you encounter – then you are acting unprofessionally. What a professional educator does, in my view, is to stay utterly focused on a few long-term learning-related goals, no matter what happens in the way of administrative mandates, snow days, early dismissals for sports, or fire drills.

    I have a vision – mission statement that I developed years ago but still holds true today:

    To help learners developing the knowledge, skills, and passion to be self-directed, lifelong learners.

    From my vision-mission statement I developed some guiding principles.

    My vision-mission was not just a mental exercise I completed. It, along with my guiding principles, was developed to inform everything I do in my classrooms. I frequently revisit them as a form of self-assessment. Which principles are currently guiding my instructional strategies? Which ones are not being integrated into my classroom activities? What changes do I need to make to do so?

    Here are some resources for developing your own vision-mission statement:

    My 2019 Highlights

    The post describes my 2019 Highlights. I did this for four main reasons:

    1. We, especially as teachers, should spend more time reflecting on what we are doing well – our accomplishments. Often, we don’t get the recognition we deserve. Too often educators feel too timid or undeserving to publicly acknowledge their accomplishments believing that others will perceive them as braggarts. (Self-disclosure: I actually spend way too much time being critical of myself so this is actually really healthy for me to do.)
    2. I believe and include in the bio I share for conference presentations and PD consults that one of the major responsibilities of the modern day educator is to share resources, learning activities, thoughts, and insights with other educators. I do so through this blog and my Twitter account.
    3. I have a “nice box” which, for me, is actually a basket. It is where I put cards and gifts I have received from my students over the years. I tell my pre-service teachers to start one so that when they are feeling ineffective, challenged, or disillusioned, they can go to it for a boost. This post will act as a type of “nice box.”
    4. Finally, I am a strong proponent of being a reflective practitioner. For more about this, see Stephen Brookfield’s book, Becoming a Critically Reflective Teacher. Blogging, such as this post, is part of my reflective practice.

    Here is my list.

    I had a book on maker education published by ASCD.

    I really love the maker movement. I have always had my students make things. As such, I was often seen as an outlier by the other teachers and principals at my schools. Now that it has become more mainstream, there is a much greater acceptance by my colleagues (and it helps that I now have an amazing and supportive principal). Words cannot describe how exciting I find this movement and hope it stands the test of time in our schools.

    Writing this book took about two years but it fits with my mission of sharing resources, learning activities, and ideas with other educators. Given the amount of work it took, I am proud of this accomplishment. The description of the book is:

    Transferring this innovative, collaborative, and creative mindset to the classroom is the goal of maker education. A makerspace isn’t about the latest tools and equipment. Rather, it’s about the learning experiences and opportunities provided to students. Maker education spaces can be as large as a school workshop with high-tech tools (e.g., 3D printers and laser cutters) or as small and low-tech as the corner of a classroom with bins of craft supplies. Ultimately, it’s about the mindset—not the “stuff.”

    In Learning in the Making, Jackie Gerstein helps you plan, execute, facilitate, and reflect on maker experiences so both you and your students understand how the knowledge, skills, and attitudes of maker education transfer to real-world settings. She also shows how to seamlessly integrate these activities into your curriculum with intention and a clearly defined purpose (http://www.ascd.org/publications/books/119025.aspx).


    I keynoted and presented a workshop at Edutech Asia in Singapore.

    Sketchnote Made During My Keynote

    I did a keynote in front of 1000+ people. Due to this anticipated audience size, I was worried about it for months. Because I focus on active participation, I asked them to make a one page book and then answer some reflection questions. It didn’t go over as well as I would have liked (yes, being self-critical) but I did something I feared. I also (re)learned I am a facilitator of experiences rather than a public speaker.

    Slides from my keynote:



    The final day I did a full day workshop. I was excited about having teachers and other professionals from Singapore, Thailand, Philippines, Cambodia, India, Malaysia, and New Zealand attend. This was way more successful – the participants being very engaged and excited. Here are the slides:




    I did some very cool activities with my gifted students.

    I love designing and implementing cross-curricular project-based learning with my gifted students, grades 3rd through 6th. Below are blog post links to some of my favorites from the 2018-19 school year.

    Social Entrepreneurship

    This is one of my favorites . . . ever. I am now in the process of doing it for a 3rd time with a current group of students. For more about this project, visit https://usergeneratededucation.wordpress.com/2018/05/13/elementary-social-entrepreneurship-a-perfect-steam-lesson/. Here is a video of a few of my students delivering raised monies to a local charity.

    Design a Shoe

    https://usergeneratededucation.wordpress.com/2018/05/13/elementary-social-entrepreneurship-a-perfect-steam-lesson/

    Game Jam: Designing a Video Game

    https://usergeneratededucation.wordpress.com/2019/05/24/game-jam-creating-a-video-game/

    I passed my ISTE Certification

    ISTE Certification is a competency-based, vendor-neutral teacher certification based on the ISTE Standards for Educators. It recognizes educators who use edtech for learning in meaningful and transformative ways (https://www.iste.org/learn/iste-certification)

    Doing the portfolio for the ISTE certification was a bear of a task. I worked on it for weeks for several hours a day during this past summer. I did enjoy the process of aggregating and discussing some of the edtech projects I have done.

    My List of Best Education Videos – 2019

    Here is my annual list of best education videos.

    Youth Voice

    As you’ll notice the first several are youth voices.

    “The power of youth is the common wealth of the entire world… No segment in society can match the power, idealism, enthusiasm and courage of young people.” Kailash Satyarthi, Nobel Peace Prize laureate


    Swedish climate activist Greta Thunberg chastised world leaders Monday, Sep. 23, for failing younger generations by not taking sufficient steps to stop climate change. “You have stolen my childhood and my dreams with your empty words,” Thunberg said at the United Nations Climate Action Summit in New York. “You’re failing us, but young people are starting to understand your betrayal. The eyes of all future generations are upon you. And if you choose to fail us, I say we will never forgive you,” she added.



    “Change will happen when we put the flourishing neighbor above our own hero status. Even though we don’t always get to be the hero, we always have the chance to be a world changer. “How should we respond to the current wave of activism? Megan calls us to treat this political moment as a time for both celebration and self-examination. See how she recommends we share power and resources and prioritize others above ourselves.



    Jahkini Bisselink is the Dutch Youth Ambassador of the United Nations representing all young people in The Netherlands. Jakhini is auspiciously bridging the gap between young people and politics, fighting to let their voices be heard in national and international decision-making.



    Education Thought Leaders

    “Are we helping children find solutions to their own challenges? This will become their strengths.” Leading thinker, best selling author and friend of Big Change, Simon Sinek shares his thoughts on the future of education – the change that’s needed and the change that is possible.



    Catlin Tucker’s keynote at Fall CUE 2019. Grade better, make your life less stressful and be more effective. 



    In her SXSW EDU keynote, Jennifer Gonzalez explores the Aerodynamics of Exceptional Schools. In any school, just as in air travel, different forces impact our progress: some of these forces push us forward and lift us up, while others pull us back and drag us down. The success of our schools depends largely on how well we manage these forces. By applying wisdom from change management theory, instructional coaching, the tech industry, and even the fitness world, we can learn how to fight weight and drag, increase lift and thrust, and make our schools truly exceptional.



    Pedro Noguera shares his insights on educational equity, Project Based Learning, and more at PBL World 2019. Pedro Noguera is a Distinguished Professor of Education at the Graduate School of Education and Information Studies at UCLA. His research focuses on the ways in which schools are influenced by social and economic conditions, as well as by demographic trends in local, regional and global contexts.



    Here’s an overview of the benefits of PBL. To read more, check out: http://www.spencerauthor.com/10-things-happen-students-engage-project-based-learning/



    The Future of Social Media?

    Social media has become our new home. Can we build it better? Taking design cues from urban planners and social scientists, technologist Eli Pariser shows how the problems we’re encountering on digital platforms aren’t all that new — and shares how, by following the model of thriving towns and cities, we can create trustworthy online communities.



    Feel Good Videos



    Released at the end of 2018 and received a 2019 Oscar nomination for best animated short. Luna is a vibrant young Chinese American girl who dreams of becoming an astronaut. From the day she witnesses a rocket launching into space on TV, Luna is driven to reach for the stars. In the big city, Luna lives with her loving father Chu, who supports her with a humble shoe repair business he runs out of his garage. As Luna grows up, she enters college, facing adversity of all kinds in pursuit of her dreams.



    Anna Hopson, 5, was born with a rare neurodegenerative disorder. But that hasn’t dampened her spirit. As Steve Hartman explains, her good mood has even rubbed off on her school bus driver.



    First Lady Michelle Obama brings gifts and surprises to Randle Highlands Elementary School in Washington, D.C. (Videos like this make me cry – not so much due to the students’ and teachers’ joy, although that does touch my heart, but because they are so happy about receiving resources that all schools should have – an up-to-date computer lab and a basketball court.)



    . . . and because this feels so good. Michael Clark Jr. had crowd of supporters at his adoption hearing this week, which included his kindergarten classmates from Wealthy Elementary in East Grand Rapids.

    A STE(A)M Professional Development Course

    I had the privilege of teaching a STE(A)M graduate course for Antioch University [New England]. I thought other teachers might benefit from access to a few of my project assignments and resources as well as example projects that teachers in the course produced.

    Course Description

    What does it mean to teach and engage our students in our modern world? How might we use principles of STE(A)M to engage all students? How can we design and implement STEM education and design thinking strategies building on our professional priorities (ie., the Critical Skills Classroom, nature based education, arts integration, etc) as well as developmentally appropriate pedagogy? How cam we use technology to support student learning? What’s the difference between STEM, STEAM, and STREAM? These questions will be explored in this online course designed to deepen understanding and inspire teachers to a new level of practice. Students will work both on their own and collaboratively to explore learn about these various topics for practical classroom implementation. Focus will also be given to modern tools to support STE(A)M and learning both face-to-face and virtual environments. Participants will design powerful learning experiences for these classrooms as well as formative and summative assessments. Online course.




    STE(A)M Elevator Pitch

    Using the resources https://www.pearltrees.com/jackiegerstein/stem-steam-stream-resources/id25727284 as reference, post an “elevator pitch” recording that defines these concepts on Flipgrid – https://flipgrid.com/5ab9c3cb

    https://flipgrid.com/5ab9c3cb?embed=true




    Collaboratively Curated Resources

    Assignment Description

    For the first part of this assignment. individually you are going to do a search for STEM/STEAM related resources from social media such as Twitter, Pinterest, Facebook, Instagram using hashtags (#STEM, #MakerEd, #STEAM, #edtech) to help identify them.

    As a group, using a collaborative curation tool and collaborative process, create a curated list of resources that you discovered in the first part of this assignment and may prove useful to the beginning practitioner. Here is a resource to learn more about content curation: http://www.spencerauthor.com/content-curation/.

    Here is a list of tools that can be used to collaborative curate your group’s resources. Your group will decide which one to use:

    Student Examples




    STE(A)M Lesson Plan

    Assignment Description

    Design a Lesson Plan or Unit that incorporates elements of STEAM. Review the following resources:

    Make sure to include the following elements plus any others you would like to include:

    • Topic
    • Vision for the Lesson
    • Essential Questions 
    • Cross Curricular Standards Addressed
    • Prerequisite Knowledge and Skills
    • Vocabulary
    • Needed Materials
    • Instructional Activities
    • Any resources used. 

    Student Examples







    STE(A)M Assessment

    Assignment Description

    Create a list possible strategies to assess students STEM/STEAM projects. It should be tailored to the (expected) age level of your learners, the focus of your learning activities (STEM, STEAM, or STREAM). Discuss several forms of formative and summative assessments that you can draw upon when you teach STEAM-based lessons.

    Review the following:

    In developing your strategies and ideas include at least one strategy from each of the following:

    • Documenting Learning Strategies (formative)
    • Reflecting on Learning (formative)
    • Strategies that Leverage Technology, e.g., blogs, podcasts, videos, online tools (formative and summative) 
    • Assessing the Cross-Curricular Standards and Goals Associated with STEAM Education (formative and summative)
    • Going Beyond the Rubric (formative and summative)

    You can share it in written form or create your version of assessment ideas using one of the following EdTech tools (they have free versions):

    Student Examples




    Assessing STREAM

    Final Course Reflection

    Description

    The goal of this reflective piece is the documentation of your understanding of the standards for this course, based in both your learning in class and in your experiences.  The format of this piece is up to you but it must demonstrate that you understand the following:

    • How do you define STE(A)M education within your context? (Please include specific examples of experiential learning: project, problem, place, and design challenge learning and any other relevant methodologies.)
    • What are the key ideas that should guide you in making good choices about the selection, acquisition, organization, evaluation, and reconsideration of resources and activities related to STE(A)M?
    • What are your next steps to support yourself and others in implementation of STE(A)M curriculum?
    • What skills and knowledge do you need to further develop in order to develop your expertise in STE(A)M instruction?

    Student Example

    Assessing STE(A)M Learning

    In Learning in the Making, I discuss assessment as follows:

    Educators should be clear about how and why they include assessment in their instruction. They need to be strategic and intentional in its use. Assessment should be about informing learners about their performance so increased learning and future improvements can result. “Assessment is the process of gathering and discussing information from multiple and diverse sources in order to develop a deep understanding of what students know, understand, and can do with their knowledge as a result of their educational experiences; the process culminates when assessment results are used to improve subsequent learning” (Huba & Freed, 2000, p. 8). 

    During Fall, 2019, I taught a graduate level STE(A)M [Science, Technology, Engineering, (Arts), Math] course for Antioch University. Their last major assignment was to create methods for assessing STE(AM) learning. My goal was for the students, who are classroom teachers, to develop assessment strategies based on above. The description of the assignment follows:

    Create a list possible strategies to assess students STEM/STEAM projects. It should be tailored to the (expected) age level of your learners, the focus of your learning activities (STEM, STEAM, or STREAM). Discuss several forms of formative and summative assessments that you can draw upon when you teach STEAM-based lessons. Review the following:

    In developing your strategies and ideas include at least one strategy from each of the following:

    • Documenting Learning Strategies (formative)
    • Reflecting on Learning (formative)
    • Strategies that Leverage Technology, e.g., blogs, podcasts, videos, online tools (formative and summative) 
    • Assessing the Cross-Curricular Standards and Goals Associated with STEAM Education (formative and summative)
    • Going Beyond the Rubric (formative and summative)

    You can share it in written form or create your version of assessment ideas using one of the following EdTech tools (they have free versions):

    Student Examples

    Two example student projects follow. One chose to use Book Creator while the other selected Piktochart. What was impressive to me was the professionalism of their work – both in their content and presentation, and that they created work that has the potential to be beneficial and useful for a wide audience of educators.

    STE(A)M Assessments via Book Creator

    Assessing STREAM

    STE(A)M Assessments via Piktochart

    micro:bits for good

    At the beginning of November, 2019, I had the opportunity to travel to Singapore to attend and present at Edutech Asia 2019. During that time, I had the opportunity to hear about their initiative to use micro:bits to help students learn technology in authentic ways. An article from 2017, Micro:bit launch: What you need to know about the coding gadget Singapore plans to introduce, explained it as:

    School-going children in Singapore will soon be using a pocket-sized, codeable computer, called the micro:bit, to pick up coding skills. The move is aimed at instilling passion for technology among young Singaporeans. The Infocomm Media Development Authority (IMDA) will work with the Ministry of Education (MOE) to roll out micro:bit as part of its new Digital Maker Programme over the next two years.

    In the exhibit hall at the conference, IMDA showcased the micro:bit-for-good projects that groups of Singapore students created. The following video provides a sampling of students explaining their projects.

    micro:bit Global Challenge

    The Micro:bit Education is sponsoring a challenge to use micro:bits to address two of the UN’s Global Goals: Life Below Water and Life on Land. They provide lots of resources on their website:

    Previous micro:bit Global Challenge

    In 2015, world leaders came together to decide on a series of “global goals” to build a better world. We challenged students aged 8-12 across the globe to consider how these goals could change the lives of themselves and others, and to design solutions to these goals using the micro:bit (https://microbit.org/global-challenge/)

    Although this contest/initiative has officially ended, it could still be used by groups of students as a reference to create micro:bit-for-good projects. Some resources from this challenge follow:

    The following is a guide developed by Canada Learn Code to help students prototype their micro:bit global challenge idea.

    A Maker Education PD Workshop

    I had the privilege of presenting a day long maker education workshop at Edutech Asia on November 7, 2019. I was excited about having teachers and other professionals from Singapore, Thailand, Philippines, Cambodia, India, Malaysia, and New Zealand attend. What follows are some details and highlights.

    As they arrived in the morning, I asked them to access the workshop slides and create a name card lit up with an LED.

    They then used these name cards to introduce themselves.

    Next, they were provided with copper tape, coin batteries, LEDs, and Chibitronics’ circuit stickers along with instructions about how to make series and parallel circuits; and asked to create pictures from their circuits. Here is a video of some of the participants sharing their processes:

    Then, they were asked to further reflect on their learning by playing my Maker Reflection Game.

    They were then introduced to their next making segment in which they could pick to do one or more of the following projects:

    • Bristlebots
    • Gami-bots
    • More advanced paper circuits
    • micro:bit books
    • Makey-Makey Characters

    I repeatedly encouraged them to take pictures throughout their making processes in order to document their learning.

    To reflect on this making segment, they were introduced to several types of online educational technology creation tools to use for their reflective piece. I believe that reflection and assessment should be as fun, exciting, valuable, and informative as the making process itself. Here are some examples from the workshop:



    Finally, they were instructed to create a poster using visuals and LEDs in their small groups about their day and how they can apply their learnings when they return to their work environments.

    . . . and here are the slides provided to the participants:

    Language Arts Lesson Using a micro:book

    In Learning in the Making I discuss the importance of and strategies for integrating technology into the curriculum.

    Maker education needs to be intentional. It follows, then, that if we want to bring maker education into more formal and traditional classrooms—as well as more informal environments such as afterschool and community programs—it needs to be integrated into the curriculum using lesson plans. This chapter begins with a discussion of the characteristics of an effective maker education curriculum and then suggests a lesson plan framework for maker education– enhanced lesson plans.  A powerful maker education curriculum includes the following elements: 

    • Instructional challenges are hands-on, experiential, and naturally engaging for learners. 
    • Learning tasks are authentic and relevant, and they promote life skills outside of the formal classroom. 
    • Challenges are designed to be novel and create excitement and joy for learners. 
    • Learner choice and voice are valued. 
    • Lessons address cross-curricular standards and are interdisciplinary (like life).
    • Learning activities get learners interested in and excited about a broad array of topics, especially in the areas of science, engineering, math, language arts, and fine arts. 
    • Communication, collaboration, and problem solving are built into the learning process. 
    • Reading and writing are integrated into learning activities in the form of fun, interesting books and stories and through writing original stories, narratives, and journalistic reports. 
    • Educational technology is incorporated in authentic ways; the emphasis is not to learn technology just for the sake of learning it. 

    Educators need to approach their curriculum and lessons with a maker mindset. With this mindset, they can figure out creative ways to integrate maker activities into existing lessons and instructional activities. Educators in these situations start with the standards and objectives of their lessons, as they typically do with “regular” lessons, and then design or identify maker activities that meet the standards and the lesson. It simply becomes a matter of “How can I add a making element to my lessons to reinforce concepts being learned?” 

    The micro:book Lesson

    After showing the micro:book activity (see https://make.techwillsaveus.com/microbit/activities/animated-microbook) to a bi-lingual co-teacher, Natalia, she took off with it to develop a lesson to teach her Spanish-speaking students types of sentences. See the video below for her explanation of this lesson and a student example.

    A Brain Science Hyperdoc Activity

    Judy Willis, a neuroscientist turned teacher, in How to Teach Students About the Brain writes:

    If we want to empower students, we must show them how they can control their own cognitive and emotional health and their own learning. Teaching students how the brain operates is a huge step. Teaching students the mechanism behind how the brain operates and teaching them approaches they can use to work that mechanism more effectively helps students believe they can create a more intelligent, creative, and powerful brain. It also shows them that striving for emotional awareness and physical health is part of keeping an optimally functioning brain. Thus, instruction in brain function will lead to healthier learners as well as wiser ones.

    I teach a unit on the brain each year. This year I am teaching a 9th grade freshman seminar and decided to do a brain science unit with them. For this unit , I created a brain science hyperdoc for them. A hyperdoc is:

    A HyperDoc is a digital document—such as a Google Doc—where all components of a learning cycle have been pulled together into one central hub. Within a single document, students are provided with hyperlinks to all of the resources they need to complete that learning cycle (https://www.cultofpedagogy.com/hyperdocs/).

    The Brain Science Hyperdoc

    Here is a completed brain science hyperdoc so you can see what was required and how one student completed it.

    Making Models of the Brain

    One of the hands-on activities was to work in a small group to create a model of the brain lobes + cerebellum out of playdoh, and then add post-it note “flags” for each part that indicates its name, function, and how to promote its health.

    Creating Neuron Models

    As a treat and to reinforce the parts of the neuron, students used candy to make a neuron, label its parts on a paper below, and then show as a group how one neuron would communicate with the next neuron and then to the next and so on.

    Creative Writing Activity

    One of the final projects of their brain science activities was to pick two activities from the list of creative writing activities about the brain found at https://faculty.washington.edu/chudler/writing.html. One of my students went all out to create a newspaper called The Brainiac News which follows. Using her own initiative, she started a Google Site to post a series of tongue-in-cheek stories. So impressive!

    Creating a New Makerspace at Our School

    I am beyond elated – our PreK-6 elementary school received monies, through our district’s Computer Science Resolution 2025, to create a STEAM (science, technology, arts, math) makerspace. I never thought our Title 1 school would get the opportunity to create such a space. I never thought I would get the opportunity to help create a fully equipped makerspace. A few of use spent the past few weeks rearranging our library so that one side contains our books and the other our STEAM materials.

    We received the following items. Some were put out in the STEAM makerspace and some items the teachers will check out for use in their classrooms:

    • Dremel Laser Cutter (in makerspace)
    • Makedo Kits (in makerspace)
    • Strawbees (in makerspace)
    • Dash and Dot (in makerspace and can be checked out)
    • OSMO Coding (in makerspace)
    • Makerspace Kit (in makerspace)
    • BeeBot Robots (in makerspace)
    • Squishy Circuits (in makerspace)
    • Makey-Makeys (can be checked out)
    • littleBits Base Invent Kit (in makerspace)
    • micro:bits (3rd-6th grade teachers received their own sets)
    • Circuit Playground (can be checked out)
    • SAM Lab (can be checked out)
    • Green Screen (in makerspace)

    Integrating Maker Education Activities Into the Curriculum

    As we (the steering committee) envisioned adding a STEAM – Makerspace at our school, we realized that its success will be dependent on the teachers integrating these activities into their curriculum rather than an extra “recreational” activity.

    Maker education needs to be intentional. It follows, then, for maker education to be brought into more formal and traditional classrooms as well as more informal ones such as with afterschool and community programs, it needs to be integrated into the curriculum using lesson plans to assist with this integration (Learning in the Making).


    To assist our teachers with integrating maker education activities into the curriculum, I created the following Pearltrees aggregate of possible classroom lessons and activities for each of the materials – products we purchased for our school:

    https://www.pearltrees.com/jackiegerstein/curriculum-integration/id27094864

    In this post, I am also including the following lesson plan template from my book, Learning in the Making that can help with integrating maker education activities into the curriculum :