यदि मैं सीमान्त सिपाही होता

प्रस्तावना : भारत विशाल देश है। इसलिए इसका सीमांत भी अधिक विस्तृत है। इसके सीमांत के छोरों में बड़े-बड़े पहाड़, जंगल, मरुस्थल, नगर और सागर आदि हैं। चीन, पाकिस्ताने, बंगलादेश, नेपाल, बर्मा और तिब्बत आदि देशों की भूपटियाँ इसके सीमान्त छोरों पर पड़ती हैं।
सीमान्त की महत्ता : सुरक्षा की दृष्टि से सीमांत छोरों की अधिक महत्ता है; क्योंकि इन्हीं से परदेशियों का देश के भीतर प्रवेश करने का डर रहता है। इसके अलावा यदि सीमान्त के राष्ट्रों से किसी कारणवश शत्रुता हो जाए, तो ये हर प्रकार से चिन्ता का विषय बन जाते हैं, ऐसी स्थिति में शत्रु राष्ट्रों से अपने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सीमान्त की ओर ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है। वहाँ पर सुरक्षा सैनिक लगाने पड़ते हैं। हमारे सीमान्त छोर बड़े ही मुसीबत वाले हैं। चीन और पाकिस्तान आदि देश छेड़छाड़ करते रहते हैं। इसलिए हम इनकी ओर पड़ने वाली विस्तृत भूपट्टियों पर शस्त्रों से सज्जित सेना को सतर्क रखते हैं। इससे हमें रक्षा में बहुत साधन लगाने पड़ रहे हैं। हमारे नेता बराबर शांति और मैत्री की अपील करते हैं। शिमला-समझौते पर चलने के लिए कहते हैं; किन्तु पाकिस्तान ऐसा हठधर्मी राष्ट्र है कि उस पर कुछ प्रभाव पड़ता ही नहीं। यह दिनोंदिन शत्रुता की ओर अग्रसर हो रहा है। कोई नहीं जानता कि इसकी शत्रुता व हठधर्मी का कहाँ अंत होगा ?
देश का एक सीमांत छोर : हमारे देश का राजस्थान का सीमांत छोर बहुत ही पास पड़ता है। यह क्षेत्र मरुस्थली होते हुए भी पाकिस्तान की दुष्टता से आतंकित है। कभी-कभी पाकिस्तानी सैनिक हमारे गाँवों में घुस कर पशुओं को हाँक ले जाते हैं। कभी-कभी चोरी से फसलें भी काट ले जाते हैं। कभी-कभी छोटा-मोटा हमला भी कर देते हैं। फलतः गाँवों में आतंक फैला रहता है। हमारे ग्रामीण डरे से रहते हैं। हमारे सिपाही भी कंधों पर बंदूक रखे, रात-दिन सीमान्त के आसपास बसे हुए ग्रामों की रक्षा करते हैं। कभी-कभी इनकी शत्रु सैनिकों से मुठभेड़ भी हो जाती है।
सीमांत के सिपाही का फर्ज : सीमांत के सिपाही का फर्ज है। कि वह शत्रु के सैनिकों को छेड़छाड़ करने पर और सीमा का अतिक्रमण करने पर बंदी बनाए तथा आक्रमण करने की स्थिति में गोलियों से भून दे। यदि आवश्यकता पड़े, तो देश की रक्षार्थ अपनी आहुति दे दे।
मेरी आकांक्षा : मेरी चिर अभिलाषा है कि मेरी नियुक्ति सीमांत पर हो जाए। मैं जैसलमेर की सीमा पर अपने फर्ज को पूरा करना चाहता हूँ। मैं बहुत दिनों से सेना में रह कर देश की सेवा कर रहा हूँ। मैं सदैव अधिकारियों से प्रार्थना करता रहता हूँ कि मेरी नियुक्ति सीमांत पर कर दें। काश ! ऐसा हो जाए।
उपसंहार : मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सीमांत की धरती बलिदान के लिए पुकार रही है। यदि इच्छा पूर्ण हो जाए, तो मैं उन पाकिस्तानी दस्युओं को मजा चखाऊँ जो रात्रि में घुसकर भारतीय पशुओं को चुरा कर ले जाते हैं। देखें, वह दिन कब आता है ?

यदि मैं शिक्षा मन्त्री होता

प्रस्तावना : शिक्षा ही राष्ट्र की बहुमुखी प्रगति का मूल स्रोत है। इसलिये हर राष्ट्र के कर्णधार शिक्षा को बहुत महत्त्व देते आए हैं। विदेशी शासकों ने हमारे राष्ट्र पर स्थायी रूप से शासन हेतु यहाँ की शिक्षा प्रणाली इस प्रकार की बनायी थी, जिससे हम परतन्त्रता की प्रवृत्ति को ही सदैव के लिए अंगीकार करें।
आधुनिक शिक्षा प्रणाली के दोष : हमारा राष्ट्र स्वतन्त्र हुआ। उसके शासन की बागडोर हमारे कर्णधारों ने सम्भाली । अनेक प्रकार से सुधार किए; पर शिक्षा प्रणाली वैसी की वैसी ही रही। उनी ओर किसी का ध्यान नहीं गया। अब इस स्वतन्त्र राष्ट्र को 54 व वर्ष चल रहा है  तंब भी शिक्षा में कोई विशेष परिवर्तन दृष्टिगत नहीं हो रहा है।
विद्यालय एवं महाविद्यालयों की संख्या अधिक अवश्य हुई; पर शिक्षा का स्तर ज्यों का त्यों ही रहा। देखा जाए तो माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा बिल्कुल ही अपूर्ण है। इस पर भी उसका व्यय दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। पाठ्य पुस्तकों का शीघ्रातिशीघ्र परिवर्तन और शुल्क की बढ़ोतरी शिक्षार्थियों की कमर तोड़ रही है। विद्यालयों में विषयों और पाठ्य पुस्तकों का इतना आधिक्य होता जा रहा है कि शिक्षार्थी रट-रटकर परेशान हो जाते हैं। इस प्रकार के अध्ययन से बुद्धि क्षीण व शिथिल रह जाती है। स्वतन्त्र भारत में शिक्षा की ऐसी स्थिति देखकर मेरा रोम-रोम क्षुब्ध हो उठता है। कभी-कभी सोच उठता हूँ कि इससे अच्छा प्रबन्ध, तो मैं ही शिक्षा मन्त्री होकर कर सकता। यदि मैं शिक्षा मन्त्री होता तो भारतीय शिक्षा के लिये निम्नलिखित उपाय करता।
प्राथमिक शिक्षा : हमारे देश में ऐसे बच्चों की संख्या विशेष है जो निर्धनता के कारण विद्यालय का मुख नहीं देख पाते हैं। मैं उनकी परिस्थितियों का अवलोकन कर उन्हें पढ़ने के लिये अवश्य बाधित ही नहीं करता; अपितु प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य कर देता। हमारे देश में हर बच्चे को शिक्षा पाने का अधिकार है, फिर वे ही निर्धनता के अभिशाप के कारण इससे वंचित क्यों रहें ? प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक दण्ड का निषेध करा देता और इस पर भी अध्यापक वर्ग दण्ड देता हुआ पाया जाता, तो उसे नौकरी से विमुक्त कर देता। प्राथमिक कथाओं में शिशुओं की अवस्था एवं बुद्धि का ध्यान रखकर वैसी ही सरल एवं शिक्षाप्रद पुस्तक रख पाता जिनसे कि बुद्धि का समुचित विकास होता । मान्टेसरी शिक्षा पद्धति पर विशेष बल देता और गाँधी जी द्वारा चालित बेसिक शिक्षा को ग्रामों में विशेष रूप से चलवाता। छोटे-छोटे विद्यालयों का वातावरण प्यार भरा होना चाहिए, जिनसे नन्हे-मुन्ने घर से अधिक इन्हें चाहने लगे।
माध्यमिक शिक्षा : हमारे देश की पुरातन सभ्यता एवं संस्कृति जगत प्रसिद्ध है। इसकी सुरक्षा के लिए माध्यमिक शिक्षा में लड़के और लड़कियों के लिए पृथक्-पृथक् विद्यालरा अनिवार्य हैं। यहाँ पर भी पुस्तकों की संख्या कम ही रखवाता। मेरी इच्छा है कि हमारे देश में ऐसी शिक्षा का प्रचलन रहे कि विद्यार्थी शारीरिक श्रम को उपेक्षा की दृष्टि से न देखें । उन्हें शिक्षा के साथ हस्तकला भी सिखाई जाए ताकि बुद्धि के विकास के साथ-साथ शरीर भी उन्नत हो सके। अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त करा देता और अंकगणित को भी ऐच्छिक विषय बनवा देता। संगीत, नृत्य, बुनाई, कताई, बढ़ईगीरी, पुस्तक बाँधना, छपाई, दर्जीगीरी, चित्रकला, रेडियो इन्जीनियरी, हस्तकला और अन्य शिल्पकला आदि अनेक प्रकार के विषयों पर बल देता। नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास तथा संस्कृत आदि विषय भी इनके साथ रहते। विद्यार्थी इच्छानुसार विषयों का चयन करते। बालिकाओं की शिक्षा में विशेष रूप से भिन्नता होती। उनके विषय में कला और दस्तकारी तथा गृह विज्ञान पर विशेष जोर दिया जाता और उनके अन्य विषय ऐच्छिक होते।
प्रौढ़ शिक्षा : प्रौढ़ शिक्षा भी हमारे देश में बहुत आवश्यक है। इसकी महत्ता को समझते हुए मैं उसके लिए संध्याकालीन विद्यालयों की स्थापना कराता। उनके पठन-पाठन के लिए विशेष प्रकार की पुस्तकों का आयोजन करता। उनके लिए ऐसे पुस्तकालय खुलवाता जहाँ पर बैठकर प्रौढ़ जनता अपनी सुविधा से समाचारपत्र तथा मनोरंजन की पुस्तकों का अवलोकन कर सकती। उनके अध्ययन के लिए विशेष प्रकार से प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति करवाता । इसके अतिरिक्त समस्त राज्यों की उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिये प्रौढ़ शिक्षा के शिक्षण का भी आयोजन करवाता ताकि उन्हें पता चल जाता कि प्रौढों को कैसे शिक्षा दी जाती है? अवकाश के समय में उन्हें सामूहिक रूप में देश के कोने-कोने के भिजवाने का आयोजन कराता ताकि वे प्रौढों को उनके समयानुकूल पढ़ाते।
उच्च शिक्षा : मेधावी शिक्षार्थियों के लिये उच्च शिक्षा अनिवार्य है। इसके साथ ही समूचे राष्ट्र में उद्योग धन्धे वाले उच्च महाविद्यालयों की प्रचुर संख्या में स्थापना करवाता ताकि शिक्षार्थियों को अध्ययन पूर्ण करने के पश्चात् किसी की दासता न करनी पड़े। वे स्वतन्त्र रूप से अपनी आजीविका के साधन जुटा सकें। वे अपनी-अपनी कला की प्रगति के साथ-साथ राष्ट्र को भी प्रगतिशील बना सकें। महिलाएँ भी उच्च शिक्षा में पुरुषों का साथ देतीं।
उपसंहार : यदि आज मैं शिक्षा मंत्री होता, तो देश में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च सभी तरह की शिक्षा पद्धतियों में वस्तुतः आमूलचूल परिवर्तन करता। मैं समझता हूँ कि उत्तम ढंग की शिक्षण पद्धति से ही राष्ट्र प्रगति के शिखर पर पहुँच सकता है।

शहीदी जोड़ मेला – फतहगढ़ साहिब

चण्डीगढ़-सरहिंद सड़क पर स्थित फतहगढ़ साहिब सिखों के दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबज़ादों की अद्वितीय शहीदी और बलिदान के लिए जगत प्रसिद्ध स्थान है। यहां साहिबजादा जोरावर सिंह तथा साहिबज़ादा फतहसिंह अपनी बाल्यावस्था में ही मुगलों के साथ टक्कर लेते हुए।   देश और कौम के लिए शहीद हो गए थे। उस समय इन साहिबज़ादों की आयु क्रमशः मात्र नौ वर्ष तथा सात वर्ष की थी।   उनकी महान् शहादतों की स्मृति में यहां प्रत्येक वर्ष पौष माह की एकादशी से चतुर्दशी तिथि तक (दिसम्बर माह में) शहीदी जोड़ मेला आयोजित किया जाता है।  जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। इस पवित्र कस्बे का नाम फतहगढ़ साहिब, साहिबजादा फतहसिंह के नाम पर रखा गया है। फतहगढ़ साहिब सरहिंद से केवल पांच किलोमीटर तथा चण्डीगढ़ से 48 किलोमीटर दूर है।
सन् 1701 में मुगल सेना ने आनंदपुर साहिब की घेराबंदी कर ली थी। उस समय वहां स्वयं श्रीगुरु गोबिंद सिंह तथा उनका परिवार ठहरा हुआ।  था।जब मुगल सेना इस अविराम घेराबंदी से कोई लाभ न उठा सकी तो उन्होंने एक चाल चली मुगलों ने गुरुजी के समक्ष एक प्रस्ताव रखा कि यदि वह आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दें तो वे घेराबंदी समाप्त करके अपनी सेना वापिस ले जाएंगे तथा उन पर आक्रमण नहीं करेंगे गुरुजी ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया किन्तु जब गुरुजी किले से बाहर निकल आए तब मुगलों की नीयत बदल गई तथा उन्होंने सरसा नदी, जो उस समय बाढ़ के कारण लबालब भरी हुई थी।  के किनारे गुरुजी पर हमला बोल दिया।
इस हमले में माता गुजरी जी (गुरु जी की माता) तथा छोटे साहिबज़ादे जोरावर सिंह तथा फ़तह सिंह गुरुजी से बिछुड़ गएमाता गुजरी जी तथा दोनों साहिबज़ादे ‘खेड़ीगांव’ में अपने एक नौकर गंगू के घर ठहर गए पर गंगू एक सच्चा अनुचर न निकला उसने इनाम के लालच में, तथा मुगलों के भय से मोरिण्डा के शासक के पास खबर भिजवा दीउन तीनों को कैद करके सरहिंद के गवर्नर के पास भेज दिया गया।
यह घटना 9 पौष 1761 की है। अगले दिन 10 पौष को दोनों बालकों को गवर्नर के सामने पेश किया गया।   ।, जिसने उन्हें लालच दिया कि यदि वे इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें तो उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा, अन्यथा। उनकी हत्या कर दी जाएगी। जब साहिबजादों पर उसकी बात का कोई प्रभाव न पड़ा, तब इस निर्दयी ने उन दोनों को एक दीवार में जीवित चिनवा देने का आदेश दे दिया। जब यह दीवार साहिबज़ादों के गले तक पहुंची तो वे लगभग बेहोश हो चुके थे, तभी यह दीवार अचानक स्वयं ही चटककर धराशायी हो गई जब साहिबज़ादों को पुनः चेतना आई तो 12-13 पौष को उनको फिर वही इस्लाम धर्म को अपनाने के लिए बाध्य किया गया। परन्तु उन वीर बालकों ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया परिणामस्वरूप दोनों साहिबज़ादों को शहीद कर दिया गया। जब उनकी दादी, माता गुजरी जी को इस हृदय विदारक घटना के विषय में पता चला तो उन्होंने भी तत्काल अपने प्राण त्याग दिए। इन महान् शहादतों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने यहां पर सर्वप्रथम 1888 में शहीदी जोड़ मेला आयोजित किया गया। जो कि अब प्रत्येक वर्ष बड़ी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है

हाथी के साथी

हो जाने की वजह बन जाती है।
सहायक सामग्रीसी.डीदृश्य – जानवरों की लाश पर भी अत्याचार पशुपक्षियों पर होनेवाले अत्याचार पर आधारित कोई रपट ,स्लाइड । वर्तमानकालिक क्रियाओं का चार्ट या स्लाइड
हाथियों का झुंड
रपट के प्रस्तुतीकरण के साथ कक्षा शुरू करें 
बंदरों का खौफ: छत से कूदी महिला
फरीदाबाद: 10 मई : बंदर के भय से सेक्टर-21 सी. में महिला ने दो मंजिले मकान से छलाँग लगा दी। जिससे उसके चेहरे व नाक की हड्डियाँ टूट गईं । गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना से सेक्टरवासी बंदरों से खौफजदा है। इससे पहले भी यहाँ अनेक हादसे हो चुके हैं। बंदरों के आतंक से निजाद पाने के लिए स्थानीय लोग शिकायत करेंगे। बंदरों को पकड़ने में निगम को नाकाम बताते हुए लोगों ने अब निगमायुक्त से बंदरों को मारने की अनुमति लेने का फैसला किया है ताकि इस समस्या से खुद निपटा जा सके। (खौफ: भय, निजाद: रक्षा)

 ? महिला ने दुमंजिले मकान से क्यों छलाँग लगा दी?
नगर में बंदरों का आतंक क्यों हो रहा है?
स्थानीय लोगों ने किसकी अनुमति लेने का प्रयास किया हैक्या यह उचित है?
उत्तर बताने का अवसर दें।

  • भारी मात्रा में जंगल की कटाई से जानवरों के बेघर हो जानाप्रकृति का असंतुलन होना आदि समस्याएँ आ जाती हैं।

    इस ओर संकेत करते हुए मिलानी की घटना हाथी के साथी” पढ़ें।
पहला अंतर – (यह एक….मर गया)
 वाचन प्रक्रिया ।
 छात्र सस्वर वाचन। वाचन का आकलन।
 ? जंगल के हाथी कैसे बेघर हो गए?
 ? किसी के बेघर हो जाने पर क्या होता है?

गाँव में हाथी का आक्रमण

 ? जंगली जानवरों के बेघर हो जाने से क्या होता है?
 ? “रौंद डालना”, “गुस्सा उतारना” आदि से आप ने क्या समझा है?
 उदा: हाथी ने महावत को रौंद डाला।
इस प्रकार के अन्य उदाहरण देकर अर्थ और प्रसंग समझा दें। ऊपर के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
 ? पशु-पक्षियों को मारना कानूनी जुर्म है।
    क्या आप कानून से परिचित हैं? ( स्रोत पुस्तक के अधिनियम प्रस्तुत करें-स्लाइड शो ।)
 “ज़ोर से बिजली का झटका लगा और वह मर गया।” इसके समान कोई घटना मालूम है तो प्रस्तुत करें।

अगला अंतर – (खबर मिलते ही…..उसे सताना नहीं छोड़ा।)

हाथी के दाँत निकाले गए!

वाचन प्रक्रिया और उसका आकलन ।
? हाथी की लाश से गाँववालों का व्यवहार कैसा था?
? अपने साथी की लाश को हाथियों ने कैसे दफनाया?
? हाथी के मामले में नियमपालक उसके वंचक बन गए हैं। यह कहाँ तक सही है?
? अगर गाँववालों की जगह आप होते तो हाथी की लाश से कैसा व्यवहार करते?
हाथी के बेघर होने में मानव समाज का असंगतिपूर्ण विकास कहाँ तक जिम्मेदार है? टिप्पणी तैयार करें।
? मनुष्य जंगल की कटाई क्यों करते हैं?
? इससे जंगली जानवरों की कैसी हालत होती है?
? जंगली जानवरों के बेघर होने से मानव को क्या नुकसान होता है?
? इसपर मानव की जिम्मेदारी कहाँ तक है?

  • लेखन प्रक्रिया
रपट तैयार करें– (पाठ्यपुस्तक पृ. 21.)
छात्र चित्रवाचन करेंप्रसंग पहचानें।
चित्र में आप क्या देखते हैं?
इन जानवरों की हालत कैसी है?
क्या मानव का जानवरों से ऐसा व्यवहार उचित हैक्योंटिप्पणी तैयार करें।
पाठ्यपुस्तिका की मैंने क्या किया” शीर्षक पर दी गई जाँच सूची का इस्तेमाल करें।
भाषा की बात – विशेषण
प्रक्रिया
खंड का वाचन करें। (पाठ्यपुस्तक पृ. 21)
रेखांकित शब्द किसकी सूचना दे रहे हैं?
?यहाँ क्रिया का व्यापार किस काल में हो रहा है?
इन कालरूपों में क्या अंतर है?
किसकिस प्रसंगों में ऐसे क्रियारूपों का प्रयोग होता है?
वर्तमानकालिक क्रियाओं का चार्ट या स्लाइड दिखाएँ।
इस इकाई के पाठों से वर्तमानकालिक क्रियारूप छाँटें और उनका प्रयोग समझें।
भाषा की बात उद्घोषणा
उद्घोषणा का ध्यानपूर्वक वाचन करें।
उसका आशयग्रहण करें। संबोधनसमयस्थानतिथिकार्य आदि पर ध्यान रखें।
संक्षिप्त एवं स्पष्ट भाषा शैली से परिचय पाएँ।
उद्घोषणा प्रस्तुत करने का अवसर छात्रों को दें।
अध्यापक नमूना प्रस्तुत करें।
उद्घोषणा तैयार करें।
स्कूल के कई कार्यक्रमों से किसी एक का चयन करें।
कार्यक्रम पूर्ण रूप से तैयार करें।
समयस्थानतिथिकार्य जोड़ें।
संबोधन पर ध्यान दें।
संक्षिप्त एवं स्पष्ट भाषा शैली से उद्घोषणा तैयार करें।
भाषा की बात – विश्लेषण
दीप्ती की डायरी टी.बीपृ. 23 पढ़ें।
डायरी ध्यान से पढ़ेंरेखांकित क्रियारूपों पर ध्यान दें।
रेखांकित क्रियाएँ किस काल की सूचना देती हैं?
अन्य उदाहरण दें।
इकाई के पाठों से भविष्यत्कालीन क्रियारूप छाँटकर लिखें।
विश्लेषण– पोस्टर
पोस्टर का वाचन करें।
कार्यक्रम पहचानें।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्याक्या करेंगे?
इन बातों पर चर्चा करें।
प्रदर्शनी कैसे चलाएँगे?
किनकिन साहित्यकारों के चित्र इकट्ठा करेंगे?
कौनकौनसी प्रतियोगिताएँ चलाएँगे?
कवितापाठ का मूल्याँकन कौन करेंगे?
सार्वजनिक सम्मेलन में स्वागत भाषणअध्यक्षीय भाषणकृतज्ञता ज्ञापन आदि कौनकौन करेंगे?
उद्घाटन करने के लिए किसको आमंत्रित करेंगे?

पारिभाषिक शब्दावली टी.बीपृ. 25.
पारिभाषिक शब्दों से परिचय पाएँ।
ये पारिभाषिक शब्द किस विभाग से संबंधित हैं?
संचार संबंधी अन्य दो पारिभाषिक शब्द लिखें।

अतिरिक्त कार्य
पत्नी POSTMAN आया है।
डाकियाएक REGISTERED LETTER है।
पतिकहाँ से है?
डाकियातिरुवनंतपुरम से। यहाँ हस्ताक्षर कीजिए।
पतिइनमें नया STAMP लगाया गया है।
पत्नीएक INLAND LETTER CARD मिलेगा जी?
डाकियानहीं जीडाकघर में जाइए।

हमने क्या किया?
  • रपट द्वारा प्रवेश प्रक्रिया चलाई
  • समस्या निर्धारित की
  • अंकित वाचन कराया
  • टिप्पणी तैयार कराई
  • रपट लिखवाई
  • वर्तमानकालिक क्रियारूपों की अवधारणा बनाई
  • उद्घोषणा लिखवाई
  • पोस्टर तैयार कराया
  • पारिभाषिक शब्दों का परिचय दिया

एकल अभिनय अथवा एक-पात्रीय नाटक

रंगमंच अभिनेता का माध्यम है, किन्तु दुर्भाग्यवश रंगमंच में अभिनेता की अलग पहचान नहीं बन पायी | इस पहचान के बिना रंगमंचकी पहचान भी संभव नहीं है | ‘एकल अभिनय’ पूरी तरह अभिनेता का रंगमंच है | यह एक अभिनेता को उसके द्वारा अर्जित अनुभव, कार्यदक्षता और कल्पनाशीलता के प्रदर्शन का स्वतंत्र अवसर उपलब्ध करता है और उसे उसकी जादुई शक्ति के साथ रंगमंच पर प्रतिष्ठापित भी करता है | एकल नाट्य (या एकल अभिनय) किसी भी स्तर पर सामूहिकता का निषेध नहीं करता, बल्कि यह सामुदायिक जीवन का अंग है, क्योंकि यह व्यापक दर्शक समुदाय को सम्बोधित होता है |
ऊपरी तौर पर ‘एकल अभिनय’ भले ही सरल लगता हो; किन्तु वास्तव में, यह ‘समूह-अभिनय’ से ज्यादा जटिल है और कल्पनाशीलता तथा नाट्य-कौशल में सिद्धहस्त अभिनेता की माँग करता है | समूह अभिनय में, जहाँ अनेक अभिनेताओं की क्रिया-प्रतिक्रिया के संघर्ष से नाट्य प्रभाव की सृष्टि होती है; वहीं एकल अभिनय में, अभिनेता के भीतर यह नाट्य-व्यापार घटित होता है, जो उसकी शारीरिक क्रिया द्वारा मंच पर साकार होता है | एकल अभिनय,
मूल-धारा के समूह अभिनय के विरुद्ध नहीं है; बल्कि यह उसे सम्पुष्ट करता है, बल प्रदान करता है; सबसे अधिक यह रंगमंच की अनिवार्य इकाई अभिनेता को विशेष पहचान देता है, उसके प्रति दर्शकों की आस्था को शक्ति प्रदान करता है | इसप्रकार यह रंगमंच के नायक ‘अभिनेता’ को पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है | बांग्ला रंगमंच में, एकल अभिनय की परम्परा काफी वर्षों से है और तृप्ति मित्र-साँवली मित्र के प्रयोग का भारतीय रंगमंच में उच्च-मूल्यांकन किया जाता है | बाऊल एक तरह का एकल नाट्य ही है | महान बांग्ला अभिनेता शांति गोपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर चर्चित ‘लेनिन’, ‘कार्लमार्क्स’, ‘सुभाषचंद्र’, ‘राममोहन रॉय’ आदि पर मंचित जात्रा; एक हद तक, उनका एकल अभिनय ही था | इधर कुछ वर्षों से; हिन्दी, कन्नड़, मराठी और अन्य भारतीय भाषाओं में एकल अभिनय के अनेक अभिनव प्रयोग किये गए हैं | पटना में ‘नटमंडप’ द्वारा इस सिलसिले को पिछले कुछ वर्षों से गंभीरता से आगे बढाया गया है | बिहार के अन्य कतिपय रंगकर्मियों द्वारा भी एकल अभिनय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये गए हैं | रंगमंच के लिए किसी नाट्य प्रयोग की प्रासंगिकता, उसके द्वारा संपूर्ण नाट्य प्रभाव की सृष्टि और नाट्यकला का आस्वाद करा पाने की उसकी क्षमता में अन्तर्निहित है | इसलिए, एकल अभिनय एक सामान्य नाट्य मंचन जैसा ही है, जिसमें एक-अकेले अभिनेता के अतिरिक्त, किसी दूसरे अभिनेता की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होती और इसकी सफलता भी इसी में है कि दर्शक को किसी भी क्षण किसी अन्य अभिनेता के न होने का अहसास न हो | एकल अभिनय को, रंगमंच के एक ‘फॉर्म’ अथवा शैली के रूप में दर्शकों की स्वीकृति भी मिल रही है और यह रंगमंच के हित में है|

नोम चोमस्की एक अमेरिकी भाषाविद्, दार्शनिक, संज्ञानात्मक वैज्ञानिक, तार्किक, राजनीतिक आलोचक और कार्यकर्ता है

नोम चोमस्की 7 दिसंबर 1928 को फिलाडेल्फिया में पैदा हुआ था और कई वर्षों के लिए भाषा विज्ञान के एक प्रोफेसर की गई है. उन्होंने पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय से 1955 में एक डॉक्टर की डिग्री को सुरक्षित करने में सक्षम था. यह वह भाषा विज्ञान में majored कि कि विश्वविद्यालय में किया गया.

चोमस्की पहले भी भाषा विज्ञान के एक विद्वान था, जो उसकी हिब्रू पिता द्वारा भाषा के क्षेत्र के लिए शुरू की गई थी.

उन्होंने यह भी एक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, संज्ञानात्मक वैज्ञानिक, दार्शनिक और कई पुस्तकों के सम्मानित लेखक माना जाता है. यह लोगों को राजनीतिक क्षेत्र में एक उदारवादी समाजवादी के रूप में उसे वर्णन करने के लिए शुरू किया है कि 1960 के आसपास थी.

उन्होंने कहा कि भाषाई दुनिया पर एक बड़ा प्रभाव है और वह लोगों को एक नई भाषा सीखने के लिए पर जोर डालने में निभाई भूमिका होने के लिए, तथापि, जमा किया गया है.

वे वृद्धि के रूप में अच्छी तरह से चोमस्की पदानुक्रम के रूप में जाना जाता है जो उनके सिद्धांत, और अधिक शक्ति के साथ अलग अलग वर्गों में निर्धारित व्याकरण बिताते हैं. उत्पादक व्याकरण और सार्वभौमिक व्याकरण का उनका विचार भी चोम्स्की और अन्य भाषाविद् के बीच विभाजनकारी का हिस्सा था.

उनका काम भी ऐसे इम्यूनोलॉजी, विकासवादी मनोविज्ञान, और कृत्रिम बुद्धि के अनुसंधान के साथ ही कम्प्यूटरीकृत है कि भाषा के अनुवाद के रूप में विशेषज्ञता के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है.

चोमस्की अपने अन्य समकक्षों की तुलना में एक अलग तरह के प्रकाश में भाषा के अध्ययन का दरवाजा खटखटाया. उनके सार्वभौमिक व्याकरण सिद्धांत है कि सभी मनुष्यों शेयर भाषाई नियमों की एक आंतरिक सेट है कि प्राथमिक सिद्धांत पर बल दिया. यह वह एक भाषा सीखने की शुरुआत चरणों बुलाया.

यह कुछ विशिष्ट नियम, दी जब किसी भी भाषा के उत्पादक व्याकरण, उचित व्याकरण की दृष्टि से एक वाक्य फार्म का गठबंधन होगा कि शब्दों की गणना करेगा कि तथ्य यह है कि पहचान की Naom चोमस्की था. सही ढंग से संपर्क किया जब वे एक ही नियम वाक्य की आकारिकी पर जोर देना होगा.

चोमस्की के उत्पादक व्याकरण के इस सिद्धांत के पहले संस्करण परिवर्तनकारी व्याकरण था. बेशक, उत्पादक व्याकरण संज्ञानात्मक व्याकरण और कार्यात्मक सिद्धांतों के समर्थकों से कुछ आलोचनाओं प्राप्त करता है.

समापन

चोमस्की मन दूसरों को यह ऋण देने से भाषा विज्ञान के साथ क्या करना था कि लगा. वह एक भाषाई वातावरण में रखा जाता है जब एक बच्चे का उदाहरण देकर प्रेफसस इस बोली जाती हैं कि शब्दों के लिए अनुकूल करने के लिए एक सहज क्षमता है करने में सक्षम है.

ब्लॉग में contact पेज कैसे जोडे

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Idea अपने users को पहली बार इस App को download करने पर Free 512 MB 2G/3G/4G data दे रही है ।
Free 512 MB idea data प्राप्त करने के लिए नीचे दिए simple steps follow करें –
Step.1 – सबसे पहले नीचे क्लिक करके My Idea app Download और Install करें ।



Step.2 – अब My Idea app open करें ।
Step.3 – अब इसमें अपना Idea no. डालें ।
Step.4 – अब आपके नंबर पर एक OTP आएगा वैसे तो ये Automatic Verify हो जाएगा लेकिन अगर ऐसा न हो तो आप इसे idea app में enter करें और Next पर क्लिक करें ।
अब आपका Idea Account open हो जाएगा और आपके नंबर पर 512 Mb 2G/3G/4G data प्राप्त हो जाएगा जिसकी Validity 5 Days होगी ।
आप My Idea App पर अपने अन्य नंबरों से भी sigh up करके उन पर भी Free 512 Mb data प्राप्त कर सकते हैं 
इस एप्प की मदद से आप अपने Account information, Recharge history, Recharge, Data packs, offers etc. की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।
अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी तो इसे social media पर भी शेयर करें 

साइट का रेफरल लिंक कैसे बनाए

आजकल इन्टरनेट पर कई तरह के Refer and earn और affiliate programs चल रहे है हर बेवसाइट एडमिन चाहता है कि उसकी साइट पर अधिक से अधिक यूजर्स जुड़े ।
इसके लिए कई लोग अपनी साइट पर रेफर एंड अर्न सर्विस चालू कर रहे हैं ताकि उनकी site अधिक famous हो सके ।
आप भी अपनी site के लिए refer and earn program start कर सकते हैं इसमे अगर कोई व्यक्ति अपने referral link को शेयर करे और इससे जो traffic आपको प्राप्त होगा उसके बदले आपको व्यक्ति को pay करना होगा ।
इससे आपकी site अधिक famous होगी और traffic, earning भी increase होगी ।
Refer and earn start करने के लिए आपको जरूरत होगी site के referral links की, जिसका उपयोग प्रोग्राम यूजर्स कर सके और आप traffic को track कर सकें ।
आज मैं आपको एक ऐसी सिम्पल ट्रिक बताने वाला हूं जिससे आप अपनी साइट के free unlimited referral links create कर पाएंगे ।

व्हाट्सएप्प डाउनलोड और इंस्टाॅल कैसे करे ?

Internet पर सबसे अधिक use होने वाली sites मे Social media sites का बहुत बड़ा हिस्सा शामिल है ।
दुनियाभर मे करोड़ो लोग अपने रोजमर्रा का काफी समय Social media पर व्यतीत करते हैं ।
Social media की list में WhatsApp बहुत popular social media मे से एक है WhatsApp पर लगभग 1 अरब यूजर्स मौजूद है और इनकी संख्या तेजी से बढती ही जा रही है ।
यह अपने end to end encryption की security के कारण बहुत ही popular हो चुका है ।
कुछ समय पहले फेसबुक ने इसे 19 बिलियन डॉलर मे खरीद लिया है 
आज अपनी इस पोस्ट मे मैं आपको बताउंगा कि व्हाट्सएप का नया वर्जन कैसे डाउनलोड करें और इस पर अकाउंट कैसे बनायें ?

WhatsApp kaiser banaye


Latest WhatsApp version kaise download kare ?

WhatsApp पर नए नए फीचर्स लांच होते रहते है जिनका उपयोग करने के लिए हमे WhatsApp का Latest version download करना होता है ।
नया वर्जन डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए स्टेप्स फाॅलो करें –
Step.1 – अपने मोबाइल में Google play store open करें ।
अगर आपने यहा login नही किया है तो सबसे पहले अपने Gmail id से login करें ।
Step.2 – अब यहां WhatsApp को search करें ।
Step.3 – इसके बाद आप install पर click करके WhatsApp install कर सकते है ।
अगर आपके मोबाइल मे पहले से यह डाउनलोड है तो यहा open या update का option दिखाई देगा ।
अगर WhatsApp का new version officially launch हो गया होगा तो आपको यहां Update का option दिखेगा ।
इसपर क्लिक करके आप अपना WhatsApp अपडेट कर सकते हैं ।
Step.3 – अगर आपने WhatsApp update किया है तो आपको दोबारा account बनाने की कोई जरूरत नही ।
लेकिन अगर आपने इसे पहली बार install किया है तो आपको इस पर account बनाना होगा ।

इसके लिए WhatsApp open करें ।
Step.4 – अब Agree and Continue पर क्लिक करें ।
Step.5 – अब अपनी country select करें और अपना Mobile No. डालें फिर Next पर क्लिक करें ।
Step.6 – अब आपके No. पर एक OTP आएगा वैसे ये Automatically Enter हो जाता है लेकिन अगर न हो तो आप ये 6 digit का OTP enter करें ।
Step.7 – अब अपना Profile Photo Select करें और Name डालें ।
Step.8 – अब बैकअप का option आएगा
अगर आप अपने WhatsApp chats का back अपनी Google drive में सेव करना चाहते हैं तो Week, Month या year में से चुने ।
और अगर आप बैकअप लेना नही चाहते तो NEVER चुनें ।
अब आपका WhatsApp Ready हो चुका है आपके मोबाइल Contact no. में से जिन नंबरों पर WhatsApp ID बनी होगी वे show होने लगेंगे ।
आप उनपर क्लिक करके उन्हे मैसेज भेज सकते है और चैटिंग कर सकते हैं ।
अगर आप किसी व्यक्ति को अपने WhatsApp पर जोडना चाहते हैं तो आपको बस उनका WhatsApp no. अपने मोबाइल में सेव करना होगा और WhatsApp को refresh करना होगा ।
इस तरह आप WhatsApp पर अपने family members, Friends और Relatives से जुड़ सकते हैं ।